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कटे-फटे तिरपाल के नीचे गुजर कर रहे पीएमएवाई योजना के पात्र परिवार
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पक्की छत की बजाय सिर पर कटे-फटे तिरपाल के ढांपे गए लकड़ी के टुकड़े, बिना चूना-मिट्टी की दीवार, फर्श के स्थान पर ऊबड़-खाबड़ जमीन और जुगाड़ बनाकर किया गया रोशनी का प्रबंध। इस प्रकार की दयनीय स्थिति में कलायत वार्ड 10 में प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्र विधवा महिला शकुंतला देवी गुजर बसर कर रही है।
आवास योजना के तहत सपनों का घर मिलने की उम्मीद से करीब दो वर्ष पहले औपचारिकताएं पूरा करने के लिए पुराने मकान को गिराया था। इस दौरान शकुंतला देवी, सास ज्यूणी देवी और दो बच्चों सहित करीब एक वर्ष तक किराये पर मकान लिया। जब पहली किश्त का इंतजार करते-करते लंबे समय बीत गया तो और किराये व अन्य खर्च के लिए कोई संसाधन न रहे। आखिरकार विधवा महिला को परिवार सहित अपने अधूरे घर में आना पड़ा। अब एक वर्ष से बिना छत के मकान में अपना डेरा जमाए है। विधवा महिला का कहना है कि उसके ससुर और पति का पूर्व में निधन हो चुका है। सास-बहु के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी है। पक्के मकान की इंतजार करते-करते सास ज्यूणी देवी भी दुनिया को अलविदा कर गई। इन परिस्थितियों में उम्र दराज विधवा शकुंतला देवी के कंधों पर परिवार के लालन-पालन की जिम्मेदारी है। बरसात, तूफान और भीषण गर्मी के मौसम में तिरपाल के नीचे इस बीपीएल परिवार को पग-पग पर संकटों से दो चार होना पड़ रहा है। बीपीएल पर मिलने वाले अनाज से जैसे-जैसे दो जून की रोटी का प्रबंध तो हो जाता है। समस्या अदद आशियाना की गंभीर है।
शकुंतला देवी के साथ-साथ विधवा प्रेमपति, सतबीर सिंह और अन्य परिवार भी तिरपाल के नीचे गुजर बसर कर रहे हैं। इनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा। पात्रों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से आवास योजना का लाभ सुनिश्चित करने की अपील की है।
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कलायत नगर पालिका सचिव मोहन लाल तंवर ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए वर्तमान में नपा के पास बजट उपलब्ध नहीं है। पात्रों को आवास योजना की राशि का लाभ प्रदान करने के लिए 3 करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई है। राशि जारी होने के बाद पात्रों के समक्ष समस्याएं नहीं आने दी जाएंगी।
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आवास योजना के तहत सपनों का घर मिलने की उम्मीद से करीब दो वर्ष पहले औपचारिकताएं पूरा करने के लिए पुराने मकान को गिराया था। इस दौरान शकुंतला देवी, सास ज्यूणी देवी और दो बच्चों सहित करीब एक वर्ष तक किराये पर मकान लिया। जब पहली किश्त का इंतजार करते-करते लंबे समय बीत गया तो और किराये व अन्य खर्च के लिए कोई संसाधन न रहे। आखिरकार विधवा महिला को परिवार सहित अपने अधूरे घर में आना पड़ा। अब एक वर्ष से बिना छत के मकान में अपना डेरा जमाए है। विधवा महिला का कहना है कि उसके ससुर और पति का पूर्व में निधन हो चुका है। सास-बहु के कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी है। पक्के मकान की इंतजार करते-करते सास ज्यूणी देवी भी दुनिया को अलविदा कर गई। इन परिस्थितियों में उम्र दराज विधवा शकुंतला देवी के कंधों पर परिवार के लालन-पालन की जिम्मेदारी है। बरसात, तूफान और भीषण गर्मी के मौसम में तिरपाल के नीचे इस बीपीएल परिवार को पग-पग पर संकटों से दो चार होना पड़ रहा है। बीपीएल पर मिलने वाले अनाज से जैसे-जैसे दो जून की रोटी का प्रबंध तो हो जाता है। समस्या अदद आशियाना की गंभीर है।
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शकुंतला देवी के साथ-साथ विधवा प्रेमपति, सतबीर सिंह और अन्य परिवार भी तिरपाल के नीचे गुजर बसर कर रहे हैं। इनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें समय पर लाभ नहीं मिल पा रहा। पात्रों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से आवास योजना का लाभ सुनिश्चित करने की अपील की है।
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कलायत नगर पालिका सचिव मोहन लाल तंवर ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए वर्तमान में नपा के पास बजट उपलब्ध नहीं है। पात्रों को आवास योजना की राशि का लाभ प्रदान करने के लिए 3 करोड़ रुपये के बजट की मांग की गई है। राशि जारी होने के बाद पात्रों के समक्ष समस्याएं नहीं आने दी जाएंगी।