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Kaithal News: पराली प्रबंधन पर अनुदान के रूप में ढाई करोड़ मिले
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कैथल। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिले के किसानों को करीब ढाई करोड़ रुपये अनुदान के रूप में मिल चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, करीब 18 हजार किसानों ने पराली प्रबंधन के नाम पर लगभग एक लाख 80 हजार एकड़ जमीन का पंजीकरण कराया था। दूसरी ओर कई अन्य जिलों में अभी तक यह प्रक्रिया जारी है।
गौरतलब है कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को पराली की गांठें बनाना या फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाना होता है। इसके बदले किसानों को विभाग की ओर से एक हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाते हैं। इसके लिए किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन कर विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। वर्ष 2022 में किसानों ने एक लाख 80 हजार का विभाग के पास रजिस्ट्रेशन करवाया था। जिसकी सहायता राशि किसानों के खातों में विभाग की ओर से करीब ढाई करोड़ रुपये की रकम डाली जा चुकी है। अफसरों के मुताबिक, प्रदेश में इस योजना में कैथल जिला अव्वल रहा है।
उधर, सीआरएम स्कीम के तहत फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को भी अनुदान राशि जिले के किसानों को सबसे पहले दी जा चुकी है। अब तक सीआरएम स्कीम के तहत एक हजार कृषि यंत्रों के लिए सवा छह करोड़ रुपये की राशि किसानों को दी है। इस योजना के तहत करीब 700 किसानों ने पंजीकरण कराया था। पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र हैप्पी सीडर, मल्चर, जीरो टिल, सीड ड्रिल, रूटावेटर, सुपर सीडर, स्ट्रा बेलर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम पर अनुदान दिया गया है। जो किसान शेष रह गए हैं उनके लिए विभाग ने 16 जनवरी तक किसानों को विभाग के कार्यालय में बिल जमा करवाने को कहा है। तय तारीख तक यदि कोई किसान अनुदान पर लिए कृषि यंत्रों के बिल यदि जमा नहीं करवाते हैं तो उनको अनुदान राशि नहीं दी जाएगी।
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सहायक कृषि अभियंता जगदीश चंद्र मलिक ने कहा कि स्मैम स्कीम के तहत किसानों को पराली प्रबंधन करने का अनुदान ढाई करोड़ रुपये दे दिया है वहीं सीआरएम स्कीम के तहत भी कृषि यंत्रों पर किसानों को को सवा छह करोड़ अनुदान के रूप में वितरित कर दिए गए हैं। जो किसान रह गए हैं, वे 16 जनवरी तक बिल विभाग के कार्यालय में जमा करवा दें ताकि उनका अनुदान समय में आ सके । यदि कोई किसान 16 जनवरी तक बिल नहीं जमा करवाता है तो वह अनुदान के लाभ से वंचित रह जाएगा। इसका जिम्मेदार संबंधित किसान होंगे।
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गौरतलब है कि फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत किसानों को पराली की गांठें बनाना या फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाना होता है। इसके बदले किसानों को विभाग की ओर से एक हजार रुपये प्रति एकड़ दिए जाते हैं। इसके लिए किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन कर विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। वर्ष 2022 में किसानों ने एक लाख 80 हजार का विभाग के पास रजिस्ट्रेशन करवाया था। जिसकी सहायता राशि किसानों के खातों में विभाग की ओर से करीब ढाई करोड़ रुपये की रकम डाली जा चुकी है। अफसरों के मुताबिक, प्रदेश में इस योजना में कैथल जिला अव्वल रहा है।
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उधर, सीआरएम स्कीम के तहत फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को भी अनुदान राशि जिले के किसानों को सबसे पहले दी जा चुकी है। अब तक सीआरएम स्कीम के तहत एक हजार कृषि यंत्रों के लिए सवा छह करोड़ रुपये की राशि किसानों को दी है। इस योजना के तहत करीब 700 किसानों ने पंजीकरण कराया था। पराली प्रबंधन के लिए कृषि यंत्र हैप्पी सीडर, मल्चर, जीरो टिल, सीड ड्रिल, रूटावेटर, सुपर सीडर, स्ट्रा बेलर, सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम पर अनुदान दिया गया है। जो किसान शेष रह गए हैं उनके लिए विभाग ने 16 जनवरी तक किसानों को विभाग के कार्यालय में बिल जमा करवाने को कहा है। तय तारीख तक यदि कोई किसान अनुदान पर लिए कृषि यंत्रों के बिल यदि जमा नहीं करवाते हैं तो उनको अनुदान राशि नहीं दी जाएगी।
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सहायक कृषि अभियंता जगदीश चंद्र मलिक ने कहा कि स्मैम स्कीम के तहत किसानों को पराली प्रबंधन करने का अनुदान ढाई करोड़ रुपये दे दिया है वहीं सीआरएम स्कीम के तहत भी कृषि यंत्रों पर किसानों को को सवा छह करोड़ अनुदान के रूप में वितरित कर दिए गए हैं। जो किसान रह गए हैं, वे 16 जनवरी तक बिल विभाग के कार्यालय में जमा करवा दें ताकि उनका अनुदान समय में आ सके । यदि कोई किसान 16 जनवरी तक बिल नहीं जमा करवाता है तो वह अनुदान के लाभ से वंचित रह जाएगा। इसका जिम्मेदार संबंधित किसान होंगे।