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गांवों में मैदान नहीं होने स युवा सड़कों पर दौड़कर कर रहे भर्ती की तैयारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jul 2021 10:30 PM IST
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Due to lack of grounds in the villages, youth are preparing for recruitment by running on the roads
गांव हरसौला में कोई खेल मैदान नहीं है, जिसके चलते युवाओं की खेलों व भर्तियों की तैयार करने के प्रति उदासीनता बढ़ती जा रही है। दूसरी तरफ सैकड़ों युवा सेना भर्ती की तैयारी के लिए जान हथेली पर लेकर सड़कों पर दौड़कर पसीना बहा रहे हैं। ट्रैक, स्टेडियम, जिम का तो अभाव है ही, युवाओं को गाइड करने वाला भी कोई नहीं है। बस युवाओं का देश प्रेम का जज्बा उन्हें हौसला दे रहा है। जिसके चलते वे सड़कों पर दौडर्क, कसरत कर सेना भर्ती के मापदंडों को पूरा करने की जी तोड़ मेहनत में जुटे हैं। इस समय गांव के करबी 50 से अधिक युवा आर्मी, बीएसएफ व पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हजारों की संख्या में युवा भर्ती और खेलों की तैयारी कर रहे हैं।
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इसके बावजूद भी इलाके में कोई ट्रेक, स्टेडियम और जिम नहीं है। किसी कोच की भी व्यवस्था नहीं है जो युवाओं को तैयारी के लिए उचित सलाह दे सके। युवा गांव के खेतों, मंदिर परिसर, लिंक मार्गों, नहर किनारे बने कच्चे पक्के मार्गों पर सुबह शाम दौड़ने व ईंट पत्थरों के सहारे व्यायाम करने को मजबूर हैं। सड़कों पर वाहनों के आवागमन से हादसे का भय बना रहता है। युवाओं को खेल व सेना की भर्ती की तैयारी के लिए स्टेडियम की कमी बहुत अखरती है। खिलाड़ी अपनी क्षमता और प्रतिभा का प्रदर्शन पूरी तरह नहीं कर पाते। क्षेत्र में अगर खेल मैदान का निर्माण करा दिया जाए तो युवाओं प्रतिभाओं में निखार आएगा। युवाओं के लिए किसी तरह का कोई स्टेडियम नहीं बनवाया है और न ही दौड़ने के लिए किसी तरह का ट्रैक है। जबकि क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं हैं।
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युवा रवि ने बताया कि स्टेडियम की कमी के कारण अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। स्टेडियम के बिना कोई भी खिलाड़ी तैयार नहीं हो पा रहा है। उन्हें भी सेना में भर्ती होने के लिए सड़कों पर रेस लगानी पड़ रही है।
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युवा विक्रम का कहना है कि खेल मैदान नहीं होने की वजह से मुझे भी बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा। खेल मैदान न होने से लड़कियां तो खेलकूद, पुलिस व सेना भर्ती की तैयारी कर ही नहीं पाती है। जो लड़कियां सेना में भर्ती होना चाहती है, उनको उनके सपने दबाने पड़ रहे हैं।

युवा गुरदेव ने कहा कि वह सेना भर्ती की तैयार कर रहे हैं। गांव में स्टेडियम न होने के कारण सुबह शाम फिजिकल की तैयारी के लिए शहर में जाना पड़ता है। हर रोज शहर में जाने का समय भी नहीं होता। इसके कारण उनकी तैयारी बीच में टूट जाती है। यदि गांव में ही स्टेडियम बन जाए तो वह निरंतर तैयारी कर पाएंगे।
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