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सोमावती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने फल्गु तीर्थ में लगाई डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो/पूंडरी
Updated Mon, 08 Feb 2016 11:24 PM IST
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माघ मास की सोमावती अमावस्या पर गांव फरल में स्थित विश्व प्रसिद्ध महातीर्थ फल्गु में प्रदेश के कोने कोने से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान कर पिंड दान व तर्पण करवाया। वायु पुराण के अनुसार तो फल्गु तीर्थ को पतित-पावनी गंगा से भी श्रेष्ठ मानते हुए कहा गया है कि गंगा भगवान विष्णु की पादोदक स्वरूप है किंतु फल्गु तो स्वयं आदि गदाधर स्वरूप है, इस प्रकार उनका महात्म्य गंगा से अधिक माना गया है।
फल्गु तीर्थ के बारे यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति एक लाख अश्वमेध यज्ञ करता है। वह भी इतना फल प्राप्त नहीं कर पाता जितना कि फल्गु तीर्थ में स्नान करने से होता है। ऐसा भी कहा गया है कि फल्गु तीर्थ में स्नान करके गदाधर देव दर्शन करने वाला मनुष्य अपने उद्धार के साथ साथ अपने पूर्व की 10 पीढ़ियों तथा भावी 10 पीढ़ियों का उद्धार करता है।
तीर्थ पर फैली गंदगी व बदबूदार पानी ने किया श्रद्धालु परेशान
पंजाब, हिमाचल व दिल्ली से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि वे फल्गु तीर्थ पर बड़ी आस्था के साथ आया था कि तीर्थ पर सभी सुविधाएं जो कि अश्विन मास की सोमावती पर फल्गु तीर्थ पर प्रशासन द्वारा होती वैसी ही होंगी मगर तीर्थ पर पहुंचते ही उनकी आस्था को बड़ी भारी ठेस लगी। उन्होंने बताया कि तीर्थ के घाटों पर गंदगी ही गंदगी का आलम था तथा पानी से भी बदबू आ रही थी। ग्रामीणों व फल्गु तीर्थ विकास एवं ग्राम सुधार समिति के सदस्यों ने बताया कि मेला समाप्त होते ही उन्होंने प्रशासन से तीर्थ के पानी को बदलने की मांग रखी थी लेकिन प्रशासन से उन्हें कोरे आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
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मेले के समय तो जिला प्रशासन तीर्थ पर विकास कार्य करवाने के दावे करते नहीं थकते थे लेकिन मेले के कुछ दिन बाद किसी भी अधिकारी व विधायक ने प्राचीन तीर्थ की सुध तक लेना मुनासिब नहीं समझा। हालांकि प्राचीन तीर्थ की पूर्व दिशा में विधायक के प्रयासों से करोड़ों रुपयों की लागत से नए तीर्थ पर जोरों से कार्य प्रगति पर है लेकिन ऐतिहासिक महत्ता वाले प्राचीन तीर्थ की सुध लेने वाला कोई नहीं।
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फल्गु तीर्थ के बारे यह भी कहा गया है कि जो व्यक्ति एक लाख अश्वमेध यज्ञ करता है। वह भी इतना फल प्राप्त नहीं कर पाता जितना कि फल्गु तीर्थ में स्नान करने से होता है। ऐसा भी कहा गया है कि फल्गु तीर्थ में स्नान करके गदाधर देव दर्शन करने वाला मनुष्य अपने उद्धार के साथ साथ अपने पूर्व की 10 पीढ़ियों तथा भावी 10 पीढ़ियों का उद्धार करता है।
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तीर्थ पर फैली गंदगी व बदबूदार पानी ने किया श्रद्धालु परेशान
पंजाब, हिमाचल व दिल्ली से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि वे फल्गु तीर्थ पर बड़ी आस्था के साथ आया था कि तीर्थ पर सभी सुविधाएं जो कि अश्विन मास की सोमावती पर फल्गु तीर्थ पर प्रशासन द्वारा होती वैसी ही होंगी मगर तीर्थ पर पहुंचते ही उनकी आस्था को बड़ी भारी ठेस लगी। उन्होंने बताया कि तीर्थ के घाटों पर गंदगी ही गंदगी का आलम था तथा पानी से भी बदबू आ रही थी। ग्रामीणों व फल्गु तीर्थ विकास एवं ग्राम सुधार समिति के सदस्यों ने बताया कि मेला समाप्त होते ही उन्होंने प्रशासन से तीर्थ के पानी को बदलने की मांग रखी थी लेकिन प्रशासन से उन्हें कोरे आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
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मेले के समय तो जिला प्रशासन तीर्थ पर विकास कार्य करवाने के दावे करते नहीं थकते थे लेकिन मेले के कुछ दिन बाद किसी भी अधिकारी व विधायक ने प्राचीन तीर्थ की सुध तक लेना मुनासिब नहीं समझा। हालांकि प्राचीन तीर्थ की पूर्व दिशा में विधायक के प्रयासों से करोड़ों रुपयों की लागत से नए तीर्थ पर जोरों से कार्य प्रगति पर है लेकिन ऐतिहासिक महत्ता वाले प्राचीन तीर्थ की सुध लेने वाला कोई नहीं।