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बेटी है भविष्य की आधारशिला : डॉ. श्यामसुंदर
Wed, 12 Nov 2025 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 12 Nov 2025 12:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कौल की ओर से गांव पाबला में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सीएचसी के एसएमओ डॉ. श्यामसुंदर ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि एक बेटी के शिक्षित होने से दो परिवार शिक्षित हो जाते हैं। तभी कहा जाता है कि बेटी ही भविष्य की आधारशिला है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। महिलाओं को संबोधित करते हुए डॉ. श्यामसुंदर ने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना का उद्देश्य समाज में बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज की सोच में परिवर्तन नहीं आएगा, तब तक बेटियों को समान अधिकार नहीं मिल पाएंगे।
उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से बेटों को प्राथमिकता देने की मानसिकता समाज के लिए घातक सिद्ध हो रही है, क्योंकि इससे लिंगानुपात में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेटियों को शिक्षित करना ही सच्चा सशक्तीकरण है, क्योंकि “एक बेटी के शिक्षित होने से दो परिवार शिक्षित हो जाते हैं।
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डॉ. श्यामसुंदर ने कहा कि सरकार द्वारा बालिकाओं के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ समाज के प्रत्येक परिवार को उठाना चाहिए। इस अवसर पर हेल्थ इंस्पेक्टर सुनील गिल, बिमला, सरला और पुष्पा भी मौजूद रहीं।
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ढांड। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कौल की ओर से गांव पाबला में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सीएचसी के एसएमओ डॉ. श्यामसुंदर ने शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि एक बेटी के शिक्षित होने से दो परिवार शिक्षित हो जाते हैं। तभी कहा जाता है कि बेटी ही भविष्य की आधारशिला है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया। महिलाओं को संबोधित करते हुए डॉ. श्यामसुंदर ने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना का उद्देश्य समाज में बालिकाओं को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज की सोच में परिवर्तन नहीं आएगा, तब तक बेटियों को समान अधिकार नहीं मिल पाएंगे।
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उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से बेटों को प्राथमिकता देने की मानसिकता समाज के लिए घातक सिद्ध हो रही है, क्योंकि इससे लिंगानुपात में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बेटियों को शिक्षित करना ही सच्चा सशक्तीकरण है, क्योंकि “एक बेटी के शिक्षित होने से दो परिवार शिक्षित हो जाते हैं।
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डॉ. श्यामसुंदर ने कहा कि सरकार द्वारा बालिकाओं के उत्थान के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ समाज के प्रत्येक परिवार को उठाना चाहिए। इस अवसर पर हेल्थ इंस्पेक्टर सुनील गिल, बिमला, सरला और पुष्पा भी मौजूद रहीं।