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गीत-संगीत की धुन पर खुशियां बांटने वालों को रोजी रोटी का संकट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jun 2021 11:45 PM IST
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Danger of livelihood to those who share happiness on the tune of song and music
लॉकडाउन में सरकार द्वारा बेहद कम लोगों के शामिल होने की रखी गई शर्त के कारण अधिकांश शादियां व जागरण के कार्यक्रम टाल दिए गए हैं, जिसके कारण शादियों में बैंडबाजे, डीजे व जागरण करने वाले कलाकारों को नहीं बुलाया जा रहा।
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यही कारण है कि दूसरों की खुशियां को कई गुणा बढ़ाकर अपनी जीविका चलाने वाले जिले के सैकड़ों जागरण कलाकार, डीजे संचालक व बैंडबाजा बजाने वाले लोग बेरोजगारी के कारण आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। आलम यह है कि इनमें से अधिकांश को तो रोटी के लिए दूसरे कार्य करने को विवश होना पड़ रहा है। कोई सब्जी की रेहड़ी लगाता है तो फल बेचने लगा है। संवादे
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थियेटर और लोककर्मी अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. महिपाल पठानिया ने कहा कि छोटे कलाकार आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। कुछ कलाकार तो ऐसे हैं जो हर रोज कमाते हैं और खाते हैं। जो बच्चे जागरण में झांकियां निकालते हैं। वह अब घर पर बैठे हैं। उनको दो वक्त की रोटी के लिए काफी कुछ सोचना पड़ रहा है। लॉकडाउन में कलाकारों के साज खूंटियों पर टंगे हुए हैं। सरकार को चाहिए कि छोटे कलाकारों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करे।
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जागरण कलाकार मीत कौर का कहना है कि वह जागरण में लाइव कार्यक्रम करती हैं। पिछले दो साल से तो सभी कलाकार खाली बैठे हैं। जब भी नवरात्र का समय आता है तो लॉकडाउन लग जाता है। दो साल से ऐसा ही हो रहा है। कलाकारों को उधार मांग कर खाना पड़ रहा है। लॉकडाउन में उनकी खाटू श्याम के लिए बुकिंग थी। जो उनको लॉकडाउन लगने के कारण से रद्द करनी पड़ी। सरकार से मांग है कि कलाकारों को भी काम करने का समय दिया जाए।
ढोल कलाकार कपिल ने बताया कि वह जागरण में ढोलक बजाने कार्य करता है। कोरोना के कारण दो वर्षों से बंद पड़ा है। जिससे कलाकार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। घर खर्च चलाने के लिए उसने सब्जी बेचनी पड़ रही है। लेकिन सब्जी में भी घाटा आ जाता है। इस बार नवरात्रों में काम चलने की उम्मीद थी। लेकिन इस बार भी पहले नवरात्र के दिन ही लॉकडाउन लग गया। जिससे कलाकारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
लाइव प्रोग्राम कलाकार महेंद्र मीत ने कहा कि वह की बोर्ड, गिटार, ढोलक बजाते हैं, लेकिन पिछले दो साल से लॉकडाउन लगने से यह काम बंद पड़े हैं। कलाकार भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। इसके अलावा कलाकार दूसरा काम भी नहीं कर सकते। इस समय परिस्थितियों को देखते हुए उनकी आगे आने वाली पीढ़ी को अब लगने लगा है कि इस काम को सीखना नहीं चाहिए। यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में यह कला लुप्त ही हो जाएगी।

कलाकार ढोलक प्लेयर चंचल ने बताया कि लॉकडाउन हाने से उनका काम बंद होने के कगार पर पहुंच गया है। सभी वर्गों का काम थोड़ा बहुत चल पड़ा है। जिससे उनके खर्चे चल रहे है। लेकिन जागरण व शादियों से जुड़े लोगों को काम अभी तक नहीं मिला है। पिछले दो वर्षों से नवरात्र शुरू होते ही लॉकडाउन लग जाता है। जिससे उनको काफी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन से मांग है कि उनको भी काम करने की अनुमति दी जाए।
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