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Kaithal News: फल्गु मेले में वट वृक्ष पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
Sun, 21 Sep 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 21 Sep 2025 01:15 AM IST
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101 फल्गु मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले संवाद
- फोटो : mathura
संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। तीन दिवसीय फल्गु मेले के दूसरे दिन शनिवार को तीर्थ स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही स्नान करने और तर्पण करवाने वालों का तांता लगा रहा। मेले में आए लोग झूलों का आनंद भी लेते नज़र आए।
गोताखोर श्रवण शर्मा की टीम नाव से तीर्थ का जायजा ले रही थी ताकि स्नान करते श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा बनी रहे। तीर्थ के पश्चिम में स्थित प्राचीन वट वृक्ष को स्थानीय लोग पवित्र मानते हैं। यह वृक्ष महाभारतकालीन माना जाता है, जिसके नीचे फल्गु ऋषि ने तपस्या की थी। आश्विन मास की सोमवती अमावस्या पर यहां बड़ा मेला लगता है। मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध करने से पितरों को गया जैसा फल मिलता है।
कथा मान्यता के अनुसार, सीता जी ने महाराज दशरथ का पिंडदान इसी वटवृक्ष को साक्षी बनाकर किया था। ग्रामीण इसकी टहनियों को तोड़ने या जलाने को पाप मानते हैं।
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पूंडरी। तीन दिवसीय फल्गु मेले के दूसरे दिन शनिवार को तीर्थ स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही स्नान करने और तर्पण करवाने वालों का तांता लगा रहा। मेले में आए लोग झूलों का आनंद भी लेते नज़र आए।
गोताखोर श्रवण शर्मा की टीम नाव से तीर्थ का जायजा ले रही थी ताकि स्नान करते श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा बनी रहे। तीर्थ के पश्चिम में स्थित प्राचीन वट वृक्ष को स्थानीय लोग पवित्र मानते हैं। यह वृक्ष महाभारतकालीन माना जाता है, जिसके नीचे फल्गु ऋषि ने तपस्या की थी। आश्विन मास की सोमवती अमावस्या पर यहां बड़ा मेला लगता है। मान्यता है कि इस दिन श्राद्ध करने से पितरों को गया जैसा फल मिलता है।
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कथा मान्यता के अनुसार, सीता जी ने महाराज दशरथ का पिंडदान इसी वटवृक्ष को साक्षी बनाकर किया था। ग्रामीण इसकी टहनियों को तोड़ने या जलाने को पाप मानते हैं।
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