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Kaithal News: सावन के अंतिम सोमवार को मंदिरों में उमड़ी भीड़
Mon, 28 Aug 2023 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 28 Aug 2023 11:48 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। सावन मास के अंतिम सोमवार को शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। नगर में अनेक स्थानों पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक व महा रुद्राभिषेक करवाया गया। खडालवा शिव मंदिर में तो दूर दराज से आए श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही जमा होना शुरू हो गई थी। भोले बाबा पर जलाभिषेक का सिलसिला बाद दोपहर तक जारी रहा।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सावन भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना होता है। इस महीने में भगवान जब श्री हरि सो जाते हैं तब रुद्र सृष्टि के संचालन का काम संभालते हैं। जो फटाफट भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। इसलिए सावन के महीने में भोले के भक्त बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ सावन सोमवार का व्रत रखते हैं।
उन्होंने बताया कि सावन मास के आखिरी सोमवार को आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग के साथ साथ प्रदोष व्रत का भी शुभ संयोग रहा है। इन शुभ संयोगों में भगवान शिव का करवाया गया रुद्राभिषेक व पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। उन्होंने बताया कि सावन मास के अंतिम सोमवार को महाकांत का अनेक स्थानों पर गन्ने के रस, दूध, सरसों तेल व इत्र के साथ अभिषेक करवाया गया है।
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कलायत। सावन मास के अंतिम सोमवार को शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। नगर में अनेक स्थानों पर भगवान शिव का रुद्राभिषेक व महा रुद्राभिषेक करवाया गया। खडालवा शिव मंदिर में तो दूर दराज से आए श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही जमा होना शुरू हो गई थी। भोले बाबा पर जलाभिषेक का सिलसिला बाद दोपहर तक जारी रहा।
पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया कि सावन भोलेनाथ का सबसे प्रिय महीना होता है। इस महीने में भगवान जब श्री हरि सो जाते हैं तब रुद्र सृष्टि के संचालन का काम संभालते हैं। जो फटाफट भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं। इसलिए सावन के महीने में भोले के भक्त बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ सावन सोमवार का व्रत रखते हैं।
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उन्होंने बताया कि सावन मास के आखिरी सोमवार को आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग के साथ साथ प्रदोष व्रत का भी शुभ संयोग रहा है। इन शुभ संयोगों में भगवान शिव का करवाया गया रुद्राभिषेक व पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। उन्होंने बताया कि सावन मास के अंतिम सोमवार को महाकांत का अनेक स्थानों पर गन्ने के रस, दूध, सरसों तेल व इत्र के साथ अभिषेक करवाया गया है।
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