{"_id":"57d6fbb24f1c1b912cd47a59","slug":"mother-born-child-throw-in-bush-kaithal","type":"story","status":"publish","title_hn":"जन्म देने वाली ही नवजात को झाड़ियों में फेंक गई ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जन्म देने वाली ही नवजात को झाड़ियों में फेंक गई
ब्यूरो कैथल
Updated Tue, 13 Sep 2016 12:32 AM IST
विज्ञापन
नवजात बच्ची
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंद घंटे पहले इस दुनिया में आई एक नवजात बच्ची को जन्म दात्री ही झाड़ियों में फेंक कर चली गई। सोमवार रात करीब दस बजे घूमने के लिए हनुमान वाटिका आईं महिलाओं ने बच्ची के रोने की आवाज सुनीं तो पास ही पुलिस नाके पर तैनात पुलिस कर्मियों को सूचित किया। इसके बाद युवकों ने झाड़ियों से बच्ची को निकाला। महिलाओं ने बच्ची को दूध पिलाया। रात को ही उसे गोद लेने के लिए तमाम लोग तैयार हो गए थे।
फ्रेंड्स कालोनी निवासी सुखदेई, सोना देवी, महिंद्रो, बोहती देवी, संतरो, बोहती देवी ने हनुमान वाटिका की झाड़ियों से बच्चे की रोने की आवाज सुनी तो एकबारगी तो उन्हें लगा कोई जानवर होगा। ध्यान से सुनने पर नवजात बच्ची की आवाज सुनी। उन्होंने पास ही के नाके से पुलिस कर्मियों को बुलाया। यहां प्रदीप व रणबीर सिक्योरिटी गार्डों ने झाड़ियों में महज एक तौलियों में औंधे मुंह पड़ी नवजात बच्ची को बाहर निकाला।
चार-पांच घंटे पहले जन्मी यह बच्ची ठीक हालत में थी। उसके पेट पर लगी नाल पर चगी चिमटी से अंदाजा लग रहा है कि यह सरकारी अस्पताल या फिर निकट के किसी निजी अस्पताल में ही पैदा हुई है। महिलाएं तब तक वहां डटी रहीं जब तक पुलिस कार्रवाई पूरी नहीं हो गई।
विज्ञापन
सिविल अस्पताल में 7ः30 बजे जन्म देने के बाद बच्ची को लेकर गायब हुई थी महिला
झाड़ियों से बरामद बच्ची को लेकर पुलिस सिविल अस्पताल पहुंची तो पता चला कि सोमवार को ही शाम 6.20 पर बच्ची को जन्म देने के बाद बेड पर शिफ्ट की गई महिला शाम करीब 7.30 पर बच्ची को लेकर भाग गई थी। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि महिला दिन में अकेले ही अस्पताल में आई थी। वह प्रसव पीड़ित थी। उसे करीब 3.00 बजे भर्ती किया गया था। सात बजे स्टाफ की शिफ्ट बदली। साढ़े सात बजे स्टाफ जच्चा-बच्चा को देखने पहुंचा तो वे बेड पर नहीं थे। स्टाफ का कहना है कि उन्होंने समझा कि महिला यहां कहीं होगी फिर वह रूटीन के काम में व्यस्त हो गए। जब लोग झाड़ियों से बरामद बच्ची को लेकर पहुंचे तभी उन्हें घटना का पता चला।
लोगों ने लगाया अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप
पुलिस के साथ बच्ची को अस्पताल लेकर गए लोगों और अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक महिला को बिना उसके आईडी प्रूफ के भर्ती करने के बाद उसके बारे में जानने की जहमत भी प्रशासन ने नहीं उठाई । जब नव प्रसूता महिला और बच्ची बेड पर नहीं मिली तो भी स्टाफ ने यह जानना जरूरी नहीं समझा कि वे कहां गए। तीन-चार घंटे तक उनकी कोई खोज खबर न लेना भी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का प्रमाण है। सीएमओ डा. मनीष बंसल ने कहा कि वह मामले में स्टाफ की लापरवाही की जांच कराएंगे। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती बच्ची की अच्छी तरह से देखभाल की जाएगी।
विज्ञापन
फ्रेंड्स कालोनी निवासी सुखदेई, सोना देवी, महिंद्रो, बोहती देवी, संतरो, बोहती देवी ने हनुमान वाटिका की झाड़ियों से बच्चे की रोने की आवाज सुनी तो एकबारगी तो उन्हें लगा कोई जानवर होगा। ध्यान से सुनने पर नवजात बच्ची की आवाज सुनी। उन्होंने पास ही के नाके से पुलिस कर्मियों को बुलाया। यहां प्रदीप व रणबीर सिक्योरिटी गार्डों ने झाड़ियों में महज एक तौलियों में औंधे मुंह पड़ी नवजात बच्ची को बाहर निकाला।
विज्ञापन
चार-पांच घंटे पहले जन्मी यह बच्ची ठीक हालत में थी। उसके पेट पर लगी नाल पर चगी चिमटी से अंदाजा लग रहा है कि यह सरकारी अस्पताल या फिर निकट के किसी निजी अस्पताल में ही पैदा हुई है। महिलाएं तब तक वहां डटी रहीं जब तक पुलिस कार्रवाई पूरी नहीं हो गई।
विज्ञापन
सिविल अस्पताल में 7ः30 बजे जन्म देने के बाद बच्ची को लेकर गायब हुई थी महिला
झाड़ियों से बरामद बच्ची को लेकर पुलिस सिविल अस्पताल पहुंची तो पता चला कि सोमवार को ही शाम 6.20 पर बच्ची को जन्म देने के बाद बेड पर शिफ्ट की गई महिला शाम करीब 7.30 पर बच्ची को लेकर भाग गई थी। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि महिला दिन में अकेले ही अस्पताल में आई थी। वह प्रसव पीड़ित थी। उसे करीब 3.00 बजे भर्ती किया गया था। सात बजे स्टाफ की शिफ्ट बदली। साढ़े सात बजे स्टाफ जच्चा-बच्चा को देखने पहुंचा तो वे बेड पर नहीं थे। स्टाफ का कहना है कि उन्होंने समझा कि महिला यहां कहीं होगी फिर वह रूटीन के काम में व्यस्त हो गए। जब लोग झाड़ियों से बरामद बच्ची को लेकर पहुंचे तभी उन्हें घटना का पता चला।
लोगों ने लगाया अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप
पुलिस के साथ बच्ची को अस्पताल लेकर गए लोगों और अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक महिला को बिना उसके आईडी प्रूफ के भर्ती करने के बाद उसके बारे में जानने की जहमत भी प्रशासन ने नहीं उठाई । जब नव प्रसूता महिला और बच्ची बेड पर नहीं मिली तो भी स्टाफ ने यह जानना जरूरी नहीं समझा कि वे कहां गए। तीन-चार घंटे तक उनकी कोई खोज खबर न लेना भी अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का प्रमाण है। सीएमओ डा. मनीष बंसल ने कहा कि वह मामले में स्टाफ की लापरवाही की जांच कराएंगे। फिलहाल, अस्पताल में भर्ती बच्ची की अच्छी तरह से देखभाल की जाएगी।