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कैथल पुलिस फोर्स में नहीं है सब कुछ सही, तालमेल का स्पष्ट अभाव
अमर उजाला ब्यूरो, कैथल
Updated Wed, 30 Nov 2016 12:09 AM IST
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पुलिस फोर्स कैथल में शायद सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। यही कारण है कि आतंकवादियों के फरार होने के तीसरे दिन बाद भी पुलिस लगभग खाली हाथ है और पुलिस के आला अधिकारियों व निचले स्तर के कर्मचारियों व अधिकारियों के बीच को-ओर्डिनेशन का बड़ा अभाव है। जिसका फायदा उठाकर जेल ब्रेेक के अपराधी जहां लिंक मार्गों से होते हुए कई घंटों तक जिले में रहने के बावजूद फरार हो गए। वहीं लगभग तीसरे दिन तक भी पुलिस आतंकवादियों के फरार होने का स्पष्ट रुटमैप तक तैयार नहीं कर पाई।
रविवार को पंजाब पुलिस से सुबह मिली जानकारी के बाद गांव कुल्तारण में भी कुछ लोगों ने तीन गाड़ियां देखी थीं। जो रास्ता पूछ रहे थे। पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों ने कोई मुस्तैदी नहीं दिखाई। वहीं क्योडक़ नाका तोड़े जाने के बाद महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुरुक्षेत्र पुलिस के गुमथला गड्डू नाके तक भी गाड़ी नहीं पहुंची तो बीच में बेगपुर का लिंक मार्ग आता है। पुलिस ने इस मार्ग की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। यहां से होते हुए अपराधी बेगपुर चौक से सोलू माजरा की ओर मुड़े। अपराधी अपनी एक गाड़ी को सोलू माजरा में छोड़कर यहां अपना हुलिया तक बदलते हैं। इसके बाद फरल में दूसरी गाड़ी छोड़कर बस से आराम से निकल जाते हैं। लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
वीटी हुई या नहीं, इस पर भी असमंजस:-
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्योड़क नाका तोड़ने के बाद तुरंत वीटी की गई है। लेकिन पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह स्पष्ट नहीं है कि वीटी हुई भी या नहीं। क्योड़क पुलिस चौकी प्रभारी ने डीजीपी को बताया कि उन्होंने एसपी रीडर को इस बारे में तुरंत जानकारी दे दी थी। जबकि डीजीपी ने सभी प्वाइंटस पर यह सवाल जरूर पूछा कि वीटी आई थी या नहीं? डीजीपी ने वीटी का रिकॉर्ड मंगवाया है। इसके बाद ही पता चल सकेगा कि सच्चाई क्या है?
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बस चालक से बात हुई
रविवार को आतंकवादी गांव फरल में कार छोड़कर एक बस में सवार होकर ढांड बस अड्डे तक गए थे। पूंडरी एसएचओ ने गांव फरल में पहुंचे डीजीपी को बताया कि उनकी उस बस के चालक से बात हुई है, जिस में चढक़र फरल से चार युवक ढांड बस अड्डे पर गए थे। लेकिन डीजीपी के थोड़ा दूर होने पर मौके पर ही एसपी यह भी कहते सुने कि तुमने यह बात मुझे क्यों नहीं बताई? इससे स्पष्ट होता है कि जिले में निचले स्तर एवं आला अधिकारियों के बीच तालमेल का कितना अभाव है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली से एसपी निराश:-
पुलिस सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि एसपी द्वारा निर्देश दिए जाने के बावजूद कई जगहों पर करीब आधे घंटे बाद तक भी नाके नहीं लगे थे। एसपी खुद कैथल में जेल ब्रेक के अपराधियों की दो गाड़ियां मिलने और एक गाड़ी के नाका तोड़ने के बाद फरार होने की असफलता पर अपने कई अधिकारियों की कार्यप्रणाली से बेहद निराश हैं। लेकिन इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है कि इस लापरवाही की गाज किसके ऊपर गिरेगी।
इस रुट से निकले थे अपराधी:
डीजीपी की टीम ने दिल्ली पुलिस की जांच से मिली सूचना सहित कैथल पुलिस की सूचनाओं के बाद पता चला कि गुहला-चीका एरिया से क्योड़क नाका तोड़ने के बाद अपराधी लिंक मार्ग बेगपुर, बेगपुर से सोलू माजरा, सोलू माजरा में एक कार छोड़कर फरल, फरल में दूसरी कार छोड़कर ढांड एवं ढांड से पबनावा, पबनावा से कौल पहुंचे। कौल में नहर से होते हुए करनाल पहुंचे थे। पुलिस अधिकारियों की बातचीत से पता चला कि अपराधी कैथल में करीब 4 घंटे तक रहे। इसके बाद वे जीटीरोड पर पहुंचने में सफल हुए थे।
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रविवार को पंजाब पुलिस से सुबह मिली जानकारी के बाद गांव कुल्तारण में भी कुछ लोगों ने तीन गाड़ियां देखी थीं। जो रास्ता पूछ रहे थे। पुलिस को इसकी जानकारी दी गई। लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों ने कोई मुस्तैदी नहीं दिखाई। वहीं क्योडक़ नाका तोड़े जाने के बाद महज 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुरुक्षेत्र पुलिस के गुमथला गड्डू नाके तक भी गाड़ी नहीं पहुंची तो बीच में बेगपुर का लिंक मार्ग आता है। पुलिस ने इस मार्ग की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। यहां से होते हुए अपराधी बेगपुर चौक से सोलू माजरा की ओर मुड़े। अपराधी अपनी एक गाड़ी को सोलू माजरा में छोड़कर यहां अपना हुलिया तक बदलते हैं। इसके बाद फरल में दूसरी गाड़ी छोड़कर बस से आराम से निकल जाते हैं। लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
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वीटी हुई या नहीं, इस पर भी असमंजस:-
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्योड़क नाका तोड़ने के बाद तुरंत वीटी की गई है। लेकिन पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह स्पष्ट नहीं है कि वीटी हुई भी या नहीं। क्योड़क पुलिस चौकी प्रभारी ने डीजीपी को बताया कि उन्होंने एसपी रीडर को इस बारे में तुरंत जानकारी दे दी थी। जबकि डीजीपी ने सभी प्वाइंटस पर यह सवाल जरूर पूछा कि वीटी आई थी या नहीं? डीजीपी ने वीटी का रिकॉर्ड मंगवाया है। इसके बाद ही पता चल सकेगा कि सच्चाई क्या है?
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बस चालक से बात हुई
रविवार को आतंकवादी गांव फरल में कार छोड़कर एक बस में सवार होकर ढांड बस अड्डे तक गए थे। पूंडरी एसएचओ ने गांव फरल में पहुंचे डीजीपी को बताया कि उनकी उस बस के चालक से बात हुई है, जिस में चढक़र फरल से चार युवक ढांड बस अड्डे पर गए थे। लेकिन डीजीपी के थोड़ा दूर होने पर मौके पर ही एसपी यह भी कहते सुने कि तुमने यह बात मुझे क्यों नहीं बताई? इससे स्पष्ट होता है कि जिले में निचले स्तर एवं आला अधिकारियों के बीच तालमेल का कितना अभाव है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली से एसपी निराश:-
पुलिस सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि एसपी द्वारा निर्देश दिए जाने के बावजूद कई जगहों पर करीब आधे घंटे बाद तक भी नाके नहीं लगे थे। एसपी खुद कैथल में जेल ब्रेक के अपराधियों की दो गाड़ियां मिलने और एक गाड़ी के नाका तोड़ने के बाद फरार होने की असफलता पर अपने कई अधिकारियों की कार्यप्रणाली से बेहद निराश हैं। लेकिन इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है कि इस लापरवाही की गाज किसके ऊपर गिरेगी।
इस रुट से निकले थे अपराधी:
डीजीपी की टीम ने दिल्ली पुलिस की जांच से मिली सूचना सहित कैथल पुलिस की सूचनाओं के बाद पता चला कि गुहला-चीका एरिया से क्योड़क नाका तोड़ने के बाद अपराधी लिंक मार्ग बेगपुर, बेगपुर से सोलू माजरा, सोलू माजरा में एक कार छोड़कर फरल, फरल में दूसरी कार छोड़कर ढांड एवं ढांड से पबनावा, पबनावा से कौल पहुंचे। कौल में नहर से होते हुए करनाल पहुंचे थे। पुलिस अधिकारियों की बातचीत से पता चला कि अपराधी कैथल में करीब 4 घंटे तक रहे। इसके बाद वे जीटीरोड पर पहुंचने में सफल हुए थे।