कैथल। गुहला के उपमंडल न्यायिक दंडाधिकारी देवेंद्र सिंह की अदालत ने पीएनडीटी एक्ट के तहत दायर किए गए दो अलग-अलग मामलों में शर्तिया लड़का होने की दवाई देने के मामले में चीका निवासी प्रेमलता तथा कांगथली निवासी सुरेंद्र को दोषी करार दिया है। इन दोनों मामलों में दोषियों को एक-एक वर्ष का कारावास तथा 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
सिविल सर्जन डॉ. सुरेंद्र नैन ने बताया कि गत 26 नवंबर 2015 को चेयरमैन, जिला समुचित प्राधिकारी की टीम के सदस्यों ने चीका स्थित प्रेमलता पत्नी नरंजन की दुकान पर छापा मारा था और मौके पर ही प्रेमलता को शर्तिया लड़का होने की दवाई देते हुए और बदले में 400 रुपये की धनराशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इसी प्रकार गत 16 नवम्बर 2016 को इसी टीम ने कांगथली निवासी सुरेंद्र सिंह पुत्र साधूराम के घर छापा मारा और मौके पर ही शर्तिया लड़का होने की दवाई देते हुए तथा बदले में 5 हजार रुपये की राशि लेते हुए रंगें हाथों पकड़ा था। इन दोनों के खिलाफ गुहला के न्यायालय में शिकायत दर्ज की गई थी, जिस पर फैसला लेते हुए अतिरिक्त न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को एक-एक वर्ष का कारावास तथा 5-5 हजार रुपये की जुर्माने की सजा सुनाई गई।