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Kaithal News: सात वर्षों से अधर में प्रदेश के पहले संस्कृत विवि का निर्माण
Mon, 06 May 2024 04:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 06 May 2024 04:53 AM IST
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कुलदीप प्रजापति
कैथल। मतदान तिथि नजदीक आने के साथ ही लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो रही हैं। ऐसे में वर्षों से लंबित मुद्दों पर चरचा आम है। क्षेत्र के लोगों के लिए प्रदेश के पहले संस्कृत विश्वविद्यालय का मुद्दा भी अहम है, जो बीते सात से लंबित है। लोगों का मानना है कि विवि प्रशासन के संग जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण भी वर्षों बाद विवि का भवन नहीं बन सका है।
जिला कैथल के मूंदड़ी गांव में वर्ष 2017 में संस्कृत विश्वविद्यालय बनने का कार्य शुरू हुआ था, जो 2024 तक पूरा नहीं हुआ। कैथल वासियों के लिए संस्कृत विश्वविद्यालय का अलग भवन बनने की उम्मीद अभी पूरी होने की संभावना भी नहीं। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन का भवन निर्माण मामले में ढुलमुल रवैया है।
गौरतलब है कि संस्कृत विश्वविद्यालय का भवन बनाने के लिए सरकार ने करीब 100 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया था, लेकिन बजट के अनुसार अब तक संस्कृत विश्वविद्यालय का भवन नहीं बना है। संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए टीक में एक निजी भवन किराए पर लिया है जिसका हर महीनों लाखों रुपये किराये का भुगतान करना पड़ता है। आखिर निर्माण में कहां कमी आ रही है यह शहरवासियों की समझ से बाहर है क्योंकि सरकार की ओर से करोड़ों रुपये का बजट तो आया है, लेकिन निर्माण नहीं हो रहा।
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विश्वविद्यालय में तीन कोर्स हुए कम-
कैथल में प्रदेश का पहला संस्कृत विश्वविद्यालय बनने की सात वर्ष पहले घोषणा हुई थी, लेकिन आज तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। दूसरी ओर बीते वर्ष मेडिकल कॉलेज की घोषणा हुई थी, जिसका कार्य तेजी के साथ चल रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय में हर वर्ष कोर्स बढ़ने चाहिए, लेकिन कम होते जा रहे हैं। पहले आयुर्वेदा, पत्रकारिता एवं कंप्यूटर का कोर्स चलता था, अब तीनों कोर्स बंद हो गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को नुकसान है।
-सर्जन सिंह, पूर्व छात्र संस्कृत विश्वविद्यालय।
भवन निर्माण पर विश्वविद्यालय प्रशासन का नहीं ध्यान-
बीते सात साल से विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन आज तक एक भी कमरे का निर्माण नहीं हो पाया है। यहां पर न कोई विधायक आकर देखता है न ही कोई राजनेता। विश्वविद्यालय प्रशासन का ढुलमुल रवैया, विद्यार्थियों के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। कई जगहों पर संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री को अमान्य घोषित किया जा चुका है लेकिन प्रशासन को इसकी कोई परवाह नहीं। सरकार की ओर से विश्वविद्यालय के लिए बजट भी पूरा आया हुआ है पर भवन निर्माण की ओर प्रशासन ध्यान ही नहीं दे रहा।
-महेंद्र सिंह, श्री लव कुश तीर्थ ट्रस्ट मुंदड़ी के सदस्य।
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कैथल। मतदान तिथि नजदीक आने के साथ ही लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो रही हैं। ऐसे में वर्षों से लंबित मुद्दों पर चरचा आम है। क्षेत्र के लोगों के लिए प्रदेश के पहले संस्कृत विश्वविद्यालय का मुद्दा भी अहम है, जो बीते सात से लंबित है। लोगों का मानना है कि विवि प्रशासन के संग जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण भी वर्षों बाद विवि का भवन नहीं बन सका है।
जिला कैथल के मूंदड़ी गांव में वर्ष 2017 में संस्कृत विश्वविद्यालय बनने का कार्य शुरू हुआ था, जो 2024 तक पूरा नहीं हुआ। कैथल वासियों के लिए संस्कृत विश्वविद्यालय का अलग भवन बनने की उम्मीद अभी पूरी होने की संभावना भी नहीं। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन का भवन निर्माण मामले में ढुलमुल रवैया है।
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गौरतलब है कि संस्कृत विश्वविद्यालय का भवन बनाने के लिए सरकार ने करीब 100 करोड़ रुपये का बजट भी जारी किया था, लेकिन बजट के अनुसार अब तक संस्कृत विश्वविद्यालय का भवन नहीं बना है। संस्कृत विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए टीक में एक निजी भवन किराए पर लिया है जिसका हर महीनों लाखों रुपये किराये का भुगतान करना पड़ता है। आखिर निर्माण में कहां कमी आ रही है यह शहरवासियों की समझ से बाहर है क्योंकि सरकार की ओर से करोड़ों रुपये का बजट तो आया है, लेकिन निर्माण नहीं हो रहा।
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विश्वविद्यालय में तीन कोर्स हुए कम-
कैथल में प्रदेश का पहला संस्कृत विश्वविद्यालय बनने की सात वर्ष पहले घोषणा हुई थी, लेकिन आज तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। दूसरी ओर बीते वर्ष मेडिकल कॉलेज की घोषणा हुई थी, जिसका कार्य तेजी के साथ चल रहा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय में हर वर्ष कोर्स बढ़ने चाहिए, लेकिन कम होते जा रहे हैं। पहले आयुर्वेदा, पत्रकारिता एवं कंप्यूटर का कोर्स चलता था, अब तीनों कोर्स बंद हो गए हैं, जिससे विद्यार्थियों को नुकसान है।
-सर्जन सिंह, पूर्व छात्र संस्कृत विश्वविद्यालय।
भवन निर्माण पर विश्वविद्यालय प्रशासन का नहीं ध्यान-
बीते सात साल से विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन आज तक एक भी कमरे का निर्माण नहीं हो पाया है। यहां पर न कोई विधायक आकर देखता है न ही कोई राजनेता। विश्वविद्यालय प्रशासन का ढुलमुल रवैया, विद्यार्थियों के भविष्य के लिए ठीक नहीं है। कई जगहों पर संस्कृत विश्वविद्यालय की डिग्री को अमान्य घोषित किया जा चुका है लेकिन प्रशासन को इसकी कोई परवाह नहीं। सरकार की ओर से विश्वविद्यालय के लिए बजट भी पूरा आया हुआ है पर भवन निर्माण की ओर प्रशासन ध्यान ही नहीं दे रहा।
-महेंद्र सिंह, श्री लव कुश तीर्थ ट्रस्ट मुंदड़ी के सदस्य।