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गैस चंबर बना जिले में आसमान
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जिले का आसमान गैस चैंबर बन गया है। हरियाणा में दूसरा सबसे प्रदूषित आकाश कैथल शहर का रिकार्ड किया जा रहा है। यहां एयर क्वालिटी इंडेक्स में प्रदूषण लेवल बढ़कर 446 पहुंच गया है। जो सबसे खत्तरनाक स्थिति है। शुक्रवार को आंखों में जलन के कारण लोग परेशान रहे। देर सांय तक यह जलन काफी बढ़ गई थी। हांलाकि दिन में कुछ देर धूप निकली। जिससे लोगों को हल्की राहत मिली थी। उम्मीद थी कि स्मॉग का बादल छंट जाएगा। लेकिन देर सांय तक स्मॉग बढ़ता गया और आंखों में जलन की समस्या बढ़ गई।
खेतों में पराली को जलाने की घटनाओं में जिले में दिवाली के बाद काफी कमी आई है। लेकिन स्मॉग बढ़ता जा रहा है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 864 जगहों पर जो आगजनी की बात रिकार्ड की गई थी, उसमें से 460 मामले सही नहीं पाए गए। पिछले साल के 1056 के मुकाबले जिले में अभी तक 60 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। डीडीए डा. पवन शर्मा ने कहा कि कैथल जिला पंजाब बॉर्डर पर स्थित है। जिस कारण पंजाब क्षेत्र में जो आगजनी की जा रही है, उसका प्रभाव कैथल में दिख रहा है। यहां पिछले साल के मुकाबले 60 प्रतिशत कम आगजनी की घटनाएं रिकॉर्ड में आई हैं। हवा ना के बराबर चल रही है। जिस कारण पंजाब बॉर्डर की ओर से आया हुआ धुंआ आकाश में जम गया है। पूरे जिले में विशछेष निगरानी की जा रही है। किसानों से अपील की जा रही है कि वे सरकार द्वारा स्वीकृत डिस्कपोजर से पराली या फसल अवशेष की खेत में ही खाद बना लें। ताकि उन्हें आग लगाने की जरुरत ही न पड़े।
शाह अस्पताल में डॉक्टर राजेश शर्मा का कहना है कि इस प्रदूषण से बचने के लिए मॉस्क का प्रयोग करें। प्रयास करें कि ज्यादा बाहर ना निकलना पड़े। सांस व जुकाम के रोगियों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत है। आंखों की जलन से बचने के लिए ठंडे पानी से आंखों को धोएं। ताकि आंख साफ हो सकें।
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खेतों में पराली को जलाने की घटनाओं में जिले में दिवाली के बाद काफी कमी आई है। लेकिन स्मॉग बढ़ता जा रहा है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 864 जगहों पर जो आगजनी की बात रिकार्ड की गई थी, उसमें से 460 मामले सही नहीं पाए गए। पिछले साल के 1056 के मुकाबले जिले में अभी तक 60 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। डीडीए डा. पवन शर्मा ने कहा कि कैथल जिला पंजाब बॉर्डर पर स्थित है। जिस कारण पंजाब क्षेत्र में जो आगजनी की जा रही है, उसका प्रभाव कैथल में दिख रहा है। यहां पिछले साल के मुकाबले 60 प्रतिशत कम आगजनी की घटनाएं रिकॉर्ड में आई हैं। हवा ना के बराबर चल रही है। जिस कारण पंजाब बॉर्डर की ओर से आया हुआ धुंआ आकाश में जम गया है। पूरे जिले में विशछेष निगरानी की जा रही है। किसानों से अपील की जा रही है कि वे सरकार द्वारा स्वीकृत डिस्कपोजर से पराली या फसल अवशेष की खेत में ही खाद बना लें। ताकि उन्हें आग लगाने की जरुरत ही न पड़े।
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शाह अस्पताल में डॉक्टर राजेश शर्मा का कहना है कि इस प्रदूषण से बचने के लिए मॉस्क का प्रयोग करें। प्रयास करें कि ज्यादा बाहर ना निकलना पड़े। सांस व जुकाम के रोगियों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत है। आंखों की जलन से बचने के लिए ठंडे पानी से आंखों को धोएं। ताकि आंख साफ हो सकें।
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