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Kaithal News: कार्बन प्यूरीफायर ओसियन इफेक्ट मॉडल प्रथम

Mon, 07 Apr 2025 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 07 Apr 2025 11:36 PM IST
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Carbon Purifier Ocean Effect Model First
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। आईजी महिला महाविद्यालय में भूगोल विभाग के तत्वावधान में जियोग्राफी के वर्किंग और नॉन- वर्किंग मॉडल्स की प्रदर्शनी लगाई गई। इसके परिणामों में कार्बन प्यूरीफायर- ओसियन इफेक्ट मॉडल को प्रथम स्थान मिला। इसी प्रकार जियोस्टेशनरी सेटलाइट मॉडल द्वितीय, स्टेट एंड कैपिटल ऑफ इंडिया तृतीय स्थान पर रहा।

कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि कॉलेज प्रबंधक समिति के प्रधान राम बहादुर खुरानिया ने शिरकत की। सर्वप्रथम भूगोल विभाग की प्राध्यापिका सुदेश ने मुख्य अतिथि कॉलेज प्रधान, कॉलेज प्राचार्या डॉ. आरती गर्ग एवं सायंक़ालीन सत्र की प्राचार्या प्रभारी श्वेता तंवर को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
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इस प्रदर्शनी के माध्यम से भूगोल विभाग की छात्राओं की ओर से बहुत नॉन- वर्किंग एवं वर्किंग मॉडल प्रस्तुत किए गए। भूगोल विभाग की छात्राओं ने नॉन वर्किंग मॉडल में एग्रीकल्चर, रेनवाटर हार्वेशन,नेचुरल डिजास्टर,फोटोसिंथेसिस,टाइप्स ऑफ़ क्रॉप्स,लैंड फ्रॉम मॉडल एवं वर्किंग मॉडल में कार्बन ऑब्जरवेशन, हाइड्रो पावर प्लांट, एजुकेशनल टूल, जियोस्टेशनरी सैटलाइट, डे एंड नाइट, चंद्रयान- 3 , वाटर प्यूरीफायर, एटमॉस्फेरिक प्रेशर, रेन डिक्टेटर, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, आर्टिफिशियल फाउंडेशन, पोल्यूटेड सिटी -ओसियन इफेक्ट, डेवलप्ड सिटी,
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सोलर एलिप्स लीनर एक्लिप्स,

ग्रीनहाउस -ओसियन इफेक्ट,स्टेट्स एंड कैपिटल्स ऑफ़ इंडिया आदि कई मॉडल प्रस्तुत किए गए।

मुख्य अतिथि प्रबंधक समिति के प्रधान राम बहादुर खुरानिया ने कहा कि समुद्र पृथ्वी के फेफड़े होते हैं, जिस कारण इसका संरक्षण करना आवश्यक है। इस प्रकार की प्रदर्शनियां युवाओं को सागरों को सुरक्षित करने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने प्रथम द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। प्राचार्य डॉ. आरती गर्ग ने बताया कि भारतीय महासागर प्रभाव एक महत्वपूर्ण जलवायु संबंधी घटना है, जिसका प्रभाव भारत व विश्व के सभी देशों पर पड़ रहा है।


भूगोल की विभागाध्यक्ष प्रो. सुदेश ने बताया कि मॉडलों का उद्देश्य मानव जीवन में महासागरों की महत्वपूर्ण भूमिका और इनके सरंक्षण के लिए लोगों को जागरूक करना है। महासागर भोजन ,दवाइयों के प्रमुख स्त्रोत और जीवमंडल का महत्वपूर्ण भाग है इसलिए इनका संरक्षण में जरूरी है। इस अवसर पर प्रो. सीमा सुनेजा, डॉ. मोनिका गूगलनी, प्रो. नीरू गर्ग और डॉ. दीपा के साथ स्टाफ मौजूद रहा।
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