। पराली जलाने की 582 घटनाओं के बाद हरियाणा की मुख्य सचिव केसनी आनंद अरोड़ा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से डीसी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन के बारे दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्णय अनुसार धान की फसल के अवशेषों के प्रबंधन के लिए बेलर्स को एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। जिले में किसानों द्वारा धान की पराली न जलाई जाए। सरकार द्वारा धान के अवशेष जलाने की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि अधिकारियों को सतर्क किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं पर भी पराली को नहीं जलाया जा रहा। उन्होंने कहा कि कागज मिलों से भी संपर्क किया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा पराली को किसानों से खरीदा जा सके। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा गत वर्ष प्रदेश भर में लगभग एक हजार फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्र अनुदान पर दिए गए थे व इस वर्ष भी लगभग 14 हजार ऐसे कृषि यंत्र दिए गए हैं। उन्होंने प्रोत्साहन राशि के पात्रों की रिपोर्ट 13 नवंबर तक भिजवाने की बात कही। डीसी डॉ. प्रियंका सोनी ने कहा कि जिले में 36 हजार एकड़ में धान की फसल की कटाई की जा चुकी है व 25 हजार एकड़ में पराली अभी मौजूद है। जिला में 22 बेलर उपलब्ध हैं। लगभग 85 प्रतिशत धान की फसल की कटाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। उन्होंने कहा कि जिले में गत वर्ष धान फसल के अवशेष जलाने की 1313 घटनाएं दर्ज की गई थी, जबकि इस वर्ष अभी तक 582 ऐसी घटनाएं दर्ज की गई हैं। जिला प्रशासन द्वारा धान फसल के अवशेष जलाने पर अंकुश लगाने के लिए विभिन्न टीमें गठित की गई हैं, जो निरंतर निगरानी कर रही हैं। इस अवसर पर एडीसी राहुल हुड्डा, जिला राजस्व अधिकारी सुरेश कुमार, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी जसविंद्र सिंह, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप मंडल कृषि अधिकारी सतीश नारा व अन्य अधिकारी मौजूद थे।