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Kaithal News: बासमती के नहीं मिल रहे खरीदार
Sun, 02 Nov 2025 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 02 Nov 2025 12:03 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की अनाज मंडियों में इन दिनों बासमती धान की आवक जारी है। 1121, 1718 सहित अन्य उच्च गुणवत्ता वाली किस्में किसानों द्वारा लाई जा रही हैं, लेकिन मंडियों में खरीदारों का अभाव है। व्यापारी धान की ढेरी पर नजर डालते ही आगे बढ़ जाते हैं, जिससे किसानों में निराशा और रोष दोनों बढ़ रहे हैं।
कई किसान कई-कई दिन से मंडी में फसल की रखवाली करते बैठे हैं। उनका कहना है कि व्यापारी आपस में साठगांठ कर धान के दाम गिरा रहे हैं। वर्तमान में बासमती धान का भाव 32 से 35 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक ही लग रहा है। इससे किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही।
किसानों का कहना है कि इस बार फसल की पैदावार भी पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 10 क्विंटल प्रति एकड़ कम रही है। ऐसे में न केवल मुनाफा, बल्कि ठेके और खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। लगातार घाटे में जा रहे किसान अब गेहूं की बिजाई को लेकर भी असमंजस में हैं।
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किसान नेता बोले- व्यापारी कर रहे मनमानी : किसान नेता होशियार गिल ने कहा कि मंडियों में अव्यवस्थाओं का आलम है। किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही। “व्यापारी सस्ते दामों पर फसल हथियाने की फिराक में हैं और सरकार मौन है। यह किसानों की मेहनत की खुली अवमानना है,” उन्होंने कहा।
दो दिन से मंडी में बैठे, कोई खरीदार नहीं : किसान महेंद्र ने बताया कि वह दो दिन पहले मंडी में फसल लेकर आया था, लेकिन अब तक धान नहीं बिका। व्यापारी फसल देखकर बिना बोली लगाए आगे निकल जाते हैं। वहीं किसान जसविंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।
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कैथल। जिले की अनाज मंडियों में इन दिनों बासमती धान की आवक जारी है। 1121, 1718 सहित अन्य उच्च गुणवत्ता वाली किस्में किसानों द्वारा लाई जा रही हैं, लेकिन मंडियों में खरीदारों का अभाव है। व्यापारी धान की ढेरी पर नजर डालते ही आगे बढ़ जाते हैं, जिससे किसानों में निराशा और रोष दोनों बढ़ रहे हैं।
कई किसान कई-कई दिन से मंडी में फसल की रखवाली करते बैठे हैं। उनका कहना है कि व्यापारी आपस में साठगांठ कर धान के दाम गिरा रहे हैं। वर्तमान में बासमती धान का भाव 32 से 35 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक ही लग रहा है। इससे किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही।
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किसानों का कहना है कि इस बार फसल की पैदावार भी पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 10 क्विंटल प्रति एकड़ कम रही है। ऐसे में न केवल मुनाफा, बल्कि ठेके और खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। लगातार घाटे में जा रहे किसान अब गेहूं की बिजाई को लेकर भी असमंजस में हैं।
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किसान नेता बोले- व्यापारी कर रहे मनमानी : किसान नेता होशियार गिल ने कहा कि मंडियों में अव्यवस्थाओं का आलम है। किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही। “व्यापारी सस्ते दामों पर फसल हथियाने की फिराक में हैं और सरकार मौन है। यह किसानों की मेहनत की खुली अवमानना है,” उन्होंने कहा।
दो दिन से मंडी में बैठे, कोई खरीदार नहीं : किसान महेंद्र ने बताया कि वह दो दिन पहले मंडी में फसल लेकर आया था, लेकिन अब तक धान नहीं बिका। व्यापारी फसल देखकर बिना बोली लगाए आगे निकल जाते हैं। वहीं किसान जसविंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।