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Kaithal News: अखंड सौभाग्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक वट
Tue, 07 Oct 2025 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 07 Oct 2025 01:00 AM IST
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06kht_23जिले के कमेटी चौक पर स्थित 80 साल पुराना बरगद का पेड़।
क़ैथल। कमेटी चौक के नजदीक स्थित एक बरगद का पेड़ 80 वर्षों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाओं के लिए यहां आते हैं। स्थानीय निवासी रवि, विक्रम और आशुतोष ने बताया कि मान्यता है कि इस पेड़ की परिक्रमा करने से मनोकामनाएं जल्दी पूर्ण होती हैं।
लोगों ने बताया कि लोग अपनी मन्नत के लिए पेड़ पर धागा बांधते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में भगवान ब्रह्मा, श्रीहरि और शिव का वास होता है। इसके अलावा, बरगद के पेड़ की लंबी आयु के कारण इसे अक्षयवट कहा जाता है। अखंड सौभाग्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि के लिए वटवृक्ष की पूजा की जाती है।
पीपल की जड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसके पूजन से माता लक्ष्मी और भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है। पीपल पर पितरों का वास भी माना जाता है और अमावस्या के दिन इसे जल देने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
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बरगद और पीपल के वृक्ष पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ये ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वायु प्रदूषण कम करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और विभिन्न बीमारियों के उपचार में औषधीय गुण रखते हैं।
प्रस्तुति: पुनीत, निवासी, कमेटी चौक, कैथल
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लोगों ने बताया कि लोग अपनी मन्नत के लिए पेड़ पर धागा बांधते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में भगवान ब्रह्मा, श्रीहरि और शिव का वास होता है। इसके अलावा, बरगद के पेड़ की लंबी आयु के कारण इसे अक्षयवट कहा जाता है। अखंड सौभाग्य, आरोग्य और सुख-समृद्धि के लिए वटवृक्ष की पूजा की जाती है।
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पीपल की जड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसके पूजन से माता लक्ष्मी और भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है। पीपल पर पितरों का वास भी माना जाता है और अमावस्या के दिन इसे जल देने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
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बरगद और पीपल के वृक्ष पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ये ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, वायु प्रदूषण कम करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और विभिन्न बीमारियों के उपचार में औषधीय गुण रखते हैं।
प्रस्तुति: पुनीत, निवासी, कमेटी चौक, कैथल