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Kaithal News: बसों में फॉग लाइटें और रिफ्लेक्टर के प्रबंध अधूरे

Wed, 20 Nov 2024 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 20 Nov 2024 01:18 AM IST
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Arrangements for fog lights and reflectors in buses are incomplete
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। इस सीजन में नवंबर महीने से ठंड में इजाफा हुआ है। ऐसे में अब सुबह और शाम धुंध और कोहरा भी छाने लगा है। इसके बावजूद कैथल डिपो में अब तक फॉग लाइटों का कोई प्रबंध नहीं किया गया है।

ऐसे में रोडवेज बसों में सफर के दौरान यात्रियों को हादसों का भय रहता है। वहीं, अब तक बसों में रिफ्लेक्टर लगाने का कार्य भी शुरू नहीं हो पाया है। इस समय भी कैथल डिपो में 192 में से बीएस-4 तकनीक की 100 बसें हैं। बीएस-4 तकनीक की बसों पर अलग से फोगिंग लाइटें लगानी पड़ती हंै। हालांकि रोडवेज के अधिकारियों का दावा है कि अधिकतर बसों में फॉग लाइटें लगवा दी गई हैं।
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गौरतलब है कि इस समय कैथल डिपो में नई आई बसों में फॉग लाइट का प्रबंध किया गया है लेकिन अभी तक पहले ही चल रही बीएस तीन और चार की तकनीक वाली बसों में फॉग लाइट का प्रबंध नहीं किया गया है। इस समय कैथल डिपो में 192 बसें हैं। इनमें से करीब 90 बसें बीएस छह तकनीक की हैं जबकि अन्य बसों बीएस तीन और चार तकनीक की हैं।
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अब धुंध व कोहरे के दौरान बस चालकों के लिए सड़कों पर सफर करना परेशानी भरा हो जाता है। अभी तक रोडवेज कार्यशाला की तरफ से बसों को फॉग लाइटें नहीं लगाई गई है। यात्री सुमित, आशीष और सूरज ने बताया कि रोडवेज बस में फॉग लाइट नहीं है, इस कारण रोडवेज बसों में सफर करते समय हर समय हादसे का खतरा बना रहता है।

यात्रियों का कहना है कि ठंड व धुंध के मौसम को देखते हुए फॉग लाइटों का प्रबंध किया जाना चाहिए। सुबह के समय कॉलेज के विद्यार्थियों के अधिक होने के चलते बसों में भीड़ का आलम अधिक रहता है। इसलिए सड़क दुर्घटनाएं होने की आशंका अधिक रहती है। संबंधित विभाग को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।

धुंध के दौरान सड़क से गुजर रही बस दूर से ही दिखाई दे इसके लिए रिफ्लेक्टर लगाने जरूरी है लेकिन रोडवेज की बसों में यह बहुत कम दिखाई दे रहा है। ऐसे में यदि कोई तेज गति से वाहन बस से टकराता है तो बड़ा हादसा हो सकता है। इस मौसम में बिना फॉग लाइट वाले वाहन को देखना संभव नहीं हो पाता है, जिससे सामने से आ रहा वाहन चालक गाड़ी नहीं देख पाता है और दुर्घटना हो जाती है।


उन्होंने बताया कि बसों के पीछे व साइड में रेडियम टेप या तो लगे ही नहीं हैं और अधिकतर बसों में टेप काफी गंदे हो चुके हैं, जिससे इन पर लाइट पड़ने पर भी चमक नहीं बन पाती है। इससे वाहन चालक दूसरी गाड़ी का अंदाजा नहीं लगा पाता और दुर्घटना हो जाती है।
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