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डीएपी न मिलने से नाराज किसानों ने पिहोवा चौक पर लगाया जाम
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Angry farmers blocked Pehowa Chowk due to non-receipt of DAP
- फोटो : Kaithal
डीएपी खाद न मिलने से नाराज किसानों ने पिहोवा चौक पर करीब तीन घंटे तक जाम लगाया। इससे पूर्व किसान अनाज मंडी में खाद बिक्री केंद्र पहुंचे थे, वहां पर खाद नहीं मिली तो पिहोवा चौक पर पहुंच कर चारों ओर से जाम जाम लगा दिया। एसडीएम डॉ. संजय कुमार और कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने मौके पर पहुंच कर किसानों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया।
इस दौरान किसानों ने ब्लैक मार्केटिंग का आरोप लगाया। जिस पर अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई ऐसा करत हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसान अमित, करनैल सिंह, मंदीप, सुखविंद्र, गुरमीत, चरणदास, रणबीर, रामफल, गजे सिंह व नारायण ने कहा कि वे दो दिनों से लगातार बिक्री केंद्र पर डीएपी लेने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। लेकिन उन्हें खाद नहीं मिलती। यदि पूछते हैं तो बताया जाता है कि खाद खत्म हो गया है, जबकि बाजार में कालाबाजारी हो रही है। एसडीएम ने कहा कि उन्होंने टीम के साथ कई जगह स्टॉक और रिकॉर्ड की जांच की है, लेकिन कहीं भी कालाबाजारी जैसी स्थिति सामने नहीं आई। अगर कहीं ऐसा हो रहा है तो किसान सूचना दें, वह खुद मौके पर जाकर छापामारी करेंगे।
एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि डीएपी की सप्लाई में दिक्कत है, लेकिन जितनी भी खाद मुहैया होती है जिला प्रशासन उसे बांट देता है। आज भी शाम को 6 हजार कट्टे आने की संभावना है और शाम को आते ही उसे बंटवाना शुरू कर देंगे। किसानों की समस्या जायज है। जिन किसानों ने अगेती गेहूं की बिजाई कर रखी है, अगर उन्हें अभी डीएपी नहीं मिलती है तो बीज खराब हो जाएगा। उन्होंने बताया कि डीएपी खाद का ज्यादातर आयात चीन से होता था, लेकिन अब उससे बिगड़े रिश्तों के कारण आयात बंद हो गया है। जो हमारे देश में फैक्टरी है, वह डिमांड के हिसाब से आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं, इस कारण से पूरे प्रदेश में डीएपी की किल्लत खड़ी हो गई है।
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कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि पहले प्रत्येक जिले को डीएपी की रैक भेज दी जाती थी, जिससे खाद की समस्या नहीं रहती थी। इस बार ऐसा नहीं है। इस साल शिफ्टों में रैक भेजी जा रही हैं। अभी तक डेढ़ लाख बैग ही मिले हैं, जबकि पांच लाख की डिमांड है। जल्दी ही करनाल से डीएपी की एक रैक पहुंच जाएगी। प्रत्येक किसान को पांच-पांच बैग दे दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब भी डीएपी खाद वितरित किया जाता है तो किसानों को मैसेज भेज दिया जाता है। उसी के हिसाब से खाद बांटी जाती है।
वहीं जाम के दौरान पिहोवा चौक को चारों ओर से जाम कर दिया था। इसके बावजूद भी कुछ राहगीर जाम के बीच से गुजरने की कौशिश कर रहे थे, लेकिन किसानों के साथ उनकी तू तड़ाक हुई। कई राहगीरों के साथ तो किसानों की हाथापाई भी हुई। लेकिन किसानों ने रास्ता खोलने से साफ मना कर दिया। जाम के कारण राहगीरों को कोई परेशानी न हो इसके लिए पुलिस प्रशासन ने राहगीरों का रूट बदलाया। शहर की ओर जाने वाले वाहनों को छोटू राम चौक से होकर पार्क रोड पर निकाला गया। वहीं सचिवालय की ओर आने वाले वाहनों का ढांड रोड से निकाला गया।
पिहोवा चौक पर जब किसान जाम लगाकर रोष जता रहे थे तो एसडीएम संजय कुमार के सामने किसानों ने कालाबाजारी के आरोप लगाए। किसानों ने कहा कि 1200 रुपये का कट्टा 1600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है तो एसडीएम ने तुरंत जेब से 1600 रुपये निकाले। उक्त किसान को कहा कि उसके लिए कहीं से भी एक कट्टा डीएपी लाकर दे दो। बाकि काम वे खुद कर देंगे। लेकिन किसी भी किसान ने खाद लाने के लिए पैसे नहीं पकड़े। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। एसडीएम की किसानों के साथ करीब 20 मिनट तक बहस हुई लेकिन किसानों ने जाम नहीं खोला। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद केंद्र पर डीएपी उपलब्ध नहीं है, जबकि मार्केट में इसकी काला बाजारी हो रही है। जिस डीएपी के बैग का सरकारी रेट 1200 रुपये है, वह मार्केट में 1600 से 1800 रुपये में बेचा जा रहा है। बैग के साथ किसानों को 200 रुपये की दवाई भी दी जा रही है।
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इस दौरान किसानों ने ब्लैक मार्केटिंग का आरोप लगाया। जिस पर अधिकारियों ने कहा कि यदि कोई ऐसा करत हुए पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसान अमित, करनैल सिंह, मंदीप, सुखविंद्र, गुरमीत, चरणदास, रणबीर, रामफल, गजे सिंह व नारायण ने कहा कि वे दो दिनों से लगातार बिक्री केंद्र पर डीएपी लेने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। लेकिन उन्हें खाद नहीं मिलती। यदि पूछते हैं तो बताया जाता है कि खाद खत्म हो गया है, जबकि बाजार में कालाबाजारी हो रही है। एसडीएम ने कहा कि उन्होंने टीम के साथ कई जगह स्टॉक और रिकॉर्ड की जांच की है, लेकिन कहीं भी कालाबाजारी जैसी स्थिति सामने नहीं आई। अगर कहीं ऐसा हो रहा है तो किसान सूचना दें, वह खुद मौके पर जाकर छापामारी करेंगे।
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एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि डीएपी की सप्लाई में दिक्कत है, लेकिन जितनी भी खाद मुहैया होती है जिला प्रशासन उसे बांट देता है। आज भी शाम को 6 हजार कट्टे आने की संभावना है और शाम को आते ही उसे बंटवाना शुरू कर देंगे। किसानों की समस्या जायज है। जिन किसानों ने अगेती गेहूं की बिजाई कर रखी है, अगर उन्हें अभी डीएपी नहीं मिलती है तो बीज खराब हो जाएगा। उन्होंने बताया कि डीएपी खाद का ज्यादातर आयात चीन से होता था, लेकिन अब उससे बिगड़े रिश्तों के कारण आयात बंद हो गया है। जो हमारे देश में फैक्टरी है, वह डिमांड के हिसाब से आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं, इस कारण से पूरे प्रदेश में डीएपी की किल्लत खड़ी हो गई है।
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कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि पहले प्रत्येक जिले को डीएपी की रैक भेज दी जाती थी, जिससे खाद की समस्या नहीं रहती थी। इस बार ऐसा नहीं है। इस साल शिफ्टों में रैक भेजी जा रही हैं। अभी तक डेढ़ लाख बैग ही मिले हैं, जबकि पांच लाख की डिमांड है। जल्दी ही करनाल से डीएपी की एक रैक पहुंच जाएगी। प्रत्येक किसान को पांच-पांच बैग दे दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब भी डीएपी खाद वितरित किया जाता है तो किसानों को मैसेज भेज दिया जाता है। उसी के हिसाब से खाद बांटी जाती है।
वहीं जाम के दौरान पिहोवा चौक को चारों ओर से जाम कर दिया था। इसके बावजूद भी कुछ राहगीर जाम के बीच से गुजरने की कौशिश कर रहे थे, लेकिन किसानों के साथ उनकी तू तड़ाक हुई। कई राहगीरों के साथ तो किसानों की हाथापाई भी हुई। लेकिन किसानों ने रास्ता खोलने से साफ मना कर दिया। जाम के कारण राहगीरों को कोई परेशानी न हो इसके लिए पुलिस प्रशासन ने राहगीरों का रूट बदलाया। शहर की ओर जाने वाले वाहनों को छोटू राम चौक से होकर पार्क रोड पर निकाला गया। वहीं सचिवालय की ओर आने वाले वाहनों का ढांड रोड से निकाला गया।
पिहोवा चौक पर जब किसान जाम लगाकर रोष जता रहे थे तो एसडीएम संजय कुमार के सामने किसानों ने कालाबाजारी के आरोप लगाए। किसानों ने कहा कि 1200 रुपये का कट्टा 1600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है तो एसडीएम ने तुरंत जेब से 1600 रुपये निकाले। उक्त किसान को कहा कि उसके लिए कहीं से भी एक कट्टा डीएपी लाकर दे दो। बाकि काम वे खुद कर देंगे। लेकिन किसी भी किसान ने खाद लाने के लिए पैसे नहीं पकड़े। उन्होंने किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। एसडीएम की किसानों के साथ करीब 20 मिनट तक बहस हुई लेकिन किसानों ने जाम नहीं खोला। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद केंद्र पर डीएपी उपलब्ध नहीं है, जबकि मार्केट में इसकी काला बाजारी हो रही है। जिस डीएपी के बैग का सरकारी रेट 1200 रुपये है, वह मार्केट में 1600 से 1800 रुपये में बेचा जा रहा है। बैग के साथ किसानों को 200 रुपये की दवाई भी दी जा रही है।