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Kaithal News: विद्या वाहिनी बस का संचालन न होने से छात्राओं में रोष
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। बस स्टैंड से शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में जाने के लिए छात्राओं लिए चलाई विद्या वाहिनी बस सेवा बंद होने से छात्राओं में रोष है। यह बस सेवा करीब साढ़े तीन साल पहले ही रेडक्रॉस के सहयोग से जिला प्रशासन की ओर से चलाई गई थी परंतु इसे वर्ष 2022 में करीब एक साल में ही बंद कर दिया गया था। इसके बाद इस बस का दोबारा संचालन नहीं हो पाया है।
वहीं, इस बस का संचालन न होने से कॉलेजों की सैंकड़ों छात्राओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस बार कॉलेजों में नए सत्र की शुरूआत हो चुकी है, लेकिन अभी तक इस बस के संचालन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि इस बस सेवा को छात्राओं के लिए निशुल्क शुरू किया था। उधर, विद्या वाहिनी बस सेवा के साथ ही महिलाओं के लिए शुरू की गई विशेष बस सेवा का संचालन भी इस समय बंद है। ऐसे में छात्राओं के साथ अन्य महिला यात्रियों को भी विशेष बस की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
इन बसों के संचालन न होने से काॅलेज, कोचिंग सेंटर व सरकारी आईटीआई में जाने वाली पांच हजार के करीब छात्राएं परेशान हो रही हैं। छात्राओं को पैदल ही बस स्टैंड से शिक्षण संस्थानों तक आना-जाना पड़ रहा है या फिर ऑटो में रोजाना 20 से 40 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जानकारी के अनुसार, छात्राओं के लिए इन बसों की व्यवस्था जिला रेडक्राॅस सोसायटी की ओर से करवाई थी, लेकिन फंड के अभाव में यह बंद हो गई।
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छात्राओं को है अधिक परेशानी ः शहर में आरकेएसडी काॅलेज, आईजी काॅलेज, जाट काॅलेज और सरकारी आईटीआई है। यह सभी संस्थान बस स्टैंड से तीन से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। आईटीआई सबसे अधिक दूर पड़ता है। नए बस स्टैंड से इसकी दूरी करीब छह किलोमीटर है। शहर के इन संस्थानों में करीब पांच हजार छात्राएं विद्या वाहिनी में सफर करती थीं। सरकारी काॅलेज बस स्टैंड से करीब छह किलोमीटर दूर गांव जगदीशपुरा में स्थित है। यहां पर सबसे अधिक छात्राओं का आवागमन में परेशानी होती है।
परेशानी... छात्राओं की जुबानी
बस स्टैंड से सुबह 8:20 पर चला करती थी बसें
कुछ साल पहले ही तीन विद्या वाहिनी बसें शिक्षण संस्थानों के लिए चलाई जा रही थी। बस स्टैंड से यह बसें 8:20 पर चलती थी और सुबह पौने 11 बजे तक लगातार चक्कर लगाती थी। इसी तरह दोपहर को एक बजे से शाम करीब चार बजे तक छात्राओं को बसें शिक्षण संस्थान से बस स्टैंड तक छोड़ती थी। अब बस नहीं चलने से विश्वकर्मा चौक से लेकर काॅलेज तक 20 रुपये किराया देना पड़ता है। आने-जाने में परेशानी होती है। बसों को चलाना चाहिए, ताकि लड़कियों को आने-जाने की समस्या से निजात मिले। -सुमन, छात्रा, कैथल।
होती है दिक्कत
विद्या वाहिनी बसें नहीं चलने से बस स्टैंड से लेकर काॅलेज तक आने जाने में परेशानी होती है। बस स्टैंड से आरकेएसडी काॅलेज दो किलोमीटर से भी अधिक दूर है। पैदल आना-जाना पड़ता है। बस चलाई जाए। छात्राओं को परेशानी है। - सुनीता, छात्रा, कैथल।
विद्या वाहिनी बसें कोरोना महामारी के समय चलाई गई थी। उस समय वे कैथल में कार्यरत नहीं थे। कोरोना महामारी में शिक्षण संस्थान बंद होने के कारण इन बसों का संचालन बंद किया गया था। इसके बाद रोडवेज की तरफ से महिलाओं के विशेष बस सेवा शुरू की गई थी। इस कारण ही विद्या वाहिनी बस सेवा बंद की गई थी। अब बस का संचालन रोडवेज विभाग की ओर से किया जाएगा। - रामजी लाल, सचिव, जिला रेडक्राॅस सोसायटी, कैथल।
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कैथल। बस स्टैंड से शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में जाने के लिए छात्राओं लिए चलाई विद्या वाहिनी बस सेवा बंद होने से छात्राओं में रोष है। यह बस सेवा करीब साढ़े तीन साल पहले ही रेडक्रॉस के सहयोग से जिला प्रशासन की ओर से चलाई गई थी परंतु इसे वर्ष 2022 में करीब एक साल में ही बंद कर दिया गया था। इसके बाद इस बस का दोबारा संचालन नहीं हो पाया है।
वहीं, इस बस का संचालन न होने से कॉलेजों की सैंकड़ों छात्राओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस बार कॉलेजों में नए सत्र की शुरूआत हो चुकी है, लेकिन अभी तक इस बस के संचालन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। गौरतलब है कि इस बस सेवा को छात्राओं के लिए निशुल्क शुरू किया था। उधर, विद्या वाहिनी बस सेवा के साथ ही महिलाओं के लिए शुरू की गई विशेष बस सेवा का संचालन भी इस समय बंद है। ऐसे में छात्राओं के साथ अन्य महिला यात्रियों को भी विशेष बस की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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इन बसों के संचालन न होने से काॅलेज, कोचिंग सेंटर व सरकारी आईटीआई में जाने वाली पांच हजार के करीब छात्राएं परेशान हो रही हैं। छात्राओं को पैदल ही बस स्टैंड से शिक्षण संस्थानों तक आना-जाना पड़ रहा है या फिर ऑटो में रोजाना 20 से 40 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जानकारी के अनुसार, छात्राओं के लिए इन बसों की व्यवस्था जिला रेडक्राॅस सोसायटी की ओर से करवाई थी, लेकिन फंड के अभाव में यह बंद हो गई।
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छात्राओं को है अधिक परेशानी ः शहर में आरकेएसडी काॅलेज, आईजी काॅलेज, जाट काॅलेज और सरकारी आईटीआई है। यह सभी संस्थान बस स्टैंड से तीन से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। आईटीआई सबसे अधिक दूर पड़ता है। नए बस स्टैंड से इसकी दूरी करीब छह किलोमीटर है। शहर के इन संस्थानों में करीब पांच हजार छात्राएं विद्या वाहिनी में सफर करती थीं। सरकारी काॅलेज बस स्टैंड से करीब छह किलोमीटर दूर गांव जगदीशपुरा में स्थित है। यहां पर सबसे अधिक छात्राओं का आवागमन में परेशानी होती है।
परेशानी... छात्राओं की जुबानी
बस स्टैंड से सुबह 8:20 पर चला करती थी बसें
कुछ साल पहले ही तीन विद्या वाहिनी बसें शिक्षण संस्थानों के लिए चलाई जा रही थी। बस स्टैंड से यह बसें 8:20 पर चलती थी और सुबह पौने 11 बजे तक लगातार चक्कर लगाती थी। इसी तरह दोपहर को एक बजे से शाम करीब चार बजे तक छात्राओं को बसें शिक्षण संस्थान से बस स्टैंड तक छोड़ती थी। अब बस नहीं चलने से विश्वकर्मा चौक से लेकर काॅलेज तक 20 रुपये किराया देना पड़ता है। आने-जाने में परेशानी होती है। बसों को चलाना चाहिए, ताकि लड़कियों को आने-जाने की समस्या से निजात मिले। -सुमन, छात्रा, कैथल।
होती है दिक्कत
विद्या वाहिनी बसें नहीं चलने से बस स्टैंड से लेकर काॅलेज तक आने जाने में परेशानी होती है। बस स्टैंड से आरकेएसडी काॅलेज दो किलोमीटर से भी अधिक दूर है। पैदल आना-जाना पड़ता है। बस चलाई जाए। छात्राओं को परेशानी है। - सुनीता, छात्रा, कैथल।
विद्या वाहिनी बसें कोरोना महामारी के समय चलाई गई थी। उस समय वे कैथल में कार्यरत नहीं थे। कोरोना महामारी में शिक्षण संस्थान बंद होने के कारण इन बसों का संचालन बंद किया गया था। इसके बाद रोडवेज की तरफ से महिलाओं के विशेष बस सेवा शुरू की गई थी। इस कारण ही विद्या वाहिनी बस सेवा बंद की गई थी। अब बस का संचालन रोडवेज विभाग की ओर से किया जाएगा। - रामजी लाल, सचिव, जिला रेडक्राॅस सोसायटी, कैथल।