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Kaithal News: वन संपदा को खुर्द-बुर्द करने का आरोप, सीएम को शिकायत
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वन अधिकारियों पर वन संपदा को खुर्द-बुर्द करने और कलायत सिटी प्लांटेशन योजना को पलीता लगाने के आरोप लगे हैं। श्रमिक देवेंद्र ने अपने ही विभाग के अधिकारियों पर वित्तीय नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में कोताही करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
देवेंद्र कैथल रेंज के अधीन कलायत बीट में सेवाएं दे रहे हैं। इन्होंने सीएम विंडों के माध्यम से हरियाणा मुख्यमंत्री, प्रधान मुख्य वन पालक और अन्य अधिकारियों को शिकायत देकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की फरियाद लगाई है। श्रमिक का आरोप है कि कलायत ब्लॉक में बड़े पूंडरी ड्रेन, शिमला से भाणा मार्ग, कलायत सिटी प्लांटेशन व अन्य स्थानों पर वन संपदा को कुछ अधिकारियों द्वारा निरंतर नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
इन स्थानों पर न तो लंबे समय से पेड़ों पर नंबर लगाए गए और न ही पेड़-पौधों की देखरेख की जा रही है। देवेंद्र का कहना है कि वन विभाग के नियम अनुसार पेड़ों पर नंबर लगाना जरूरी है, ताकि संपदा का रिकार्ड रखा जाए। वन विभाग रेंजर अशोक कुमार ने बताया कि हर छह वर्ष के बाद वृक्षों की मोटाई के आंकलन अनुसार नंबर लगाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके अनुसार वृक्षों का वन विभाग में रिकॉर्ड रखा जाता है। जहां तक प्रश्न वन संपदा को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा है, उसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। रिकॉर्ड चेक करने के बाद भी वे कुछ बता पाएंगे।
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देवेंद्र कैथल रेंज के अधीन कलायत बीट में सेवाएं दे रहे हैं। इन्होंने सीएम विंडों के माध्यम से हरियाणा मुख्यमंत्री, प्रधान मुख्य वन पालक और अन्य अधिकारियों को शिकायत देकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की फरियाद लगाई है। श्रमिक का आरोप है कि कलायत ब्लॉक में बड़े पूंडरी ड्रेन, शिमला से भाणा मार्ग, कलायत सिटी प्लांटेशन व अन्य स्थानों पर वन संपदा को कुछ अधिकारियों द्वारा निरंतर नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
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इन स्थानों पर न तो लंबे समय से पेड़ों पर नंबर लगाए गए और न ही पेड़-पौधों की देखरेख की जा रही है। देवेंद्र का कहना है कि वन विभाग के नियम अनुसार पेड़ों पर नंबर लगाना जरूरी है, ताकि संपदा का रिकार्ड रखा जाए। वन विभाग रेंजर अशोक कुमार ने बताया कि हर छह वर्ष के बाद वृक्षों की मोटाई के आंकलन अनुसार नंबर लगाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके अनुसार वृक्षों का वन विभाग में रिकॉर्ड रखा जाता है। जहां तक प्रश्न वन संपदा को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा है, उसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। रिकॉर्ड चेक करने के बाद भी वे कुछ बता पाएंगे।
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