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Kaithal News: 8 साल बाद परशुराम सामुदायिक केंद्र को संजीवनी
Thu, 05 Feb 2026 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 05 Feb 2026 01:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। वार्ड नंबर 11 में महिला कॉलेज के समीप स्थित भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र का आठ वर्षों से चला आ रहा वनवास अब समाप्त होने जा रहा है। नगर पालिका प्रशासन ने लंबे समय से अधूरी पड़ी इस परियोजना को दोबारा पटरी पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 2 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। टेंडर जारी होते ही जर्जर हो चुकी इमारत का पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
करोड़ों का प्रोजेक्ट बना रहा नशेबाजों का अड्डा ः 13 अगस्त 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा कलायत में 1.80 करोड़ रुपये की लागत से सामुदायिक केंद्र निर्माण की घोषणा की गई थी। वर्ष 2018 में भगवान परशुराम के नाम पर इस केंद्र का निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन धनाभाव और प्रशासनिक अड़चनों के चलते यह आज तक पूरा नहीं हो सका। आठ वर्ष बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा यह भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गया।
निर्माण अधूरा रहने के कारण यह सामुदायिक केंद्र आमजन के उपयोग के बजाय नशेबाजों और शराबियों की शरणस्थली बन गया था। भवन परिसर में नशे का सामान बिखरा रहता था। असामाजिक तत्वों ने यहां आगजनी की घटनाएं भी कीं और फॉल सीलिंग तक उखाड़ दी गई। नगर पालिका के कनिष्ठ अभियंता संजीव धीमान ने बताया कि प्रशासन लंबे समय से इस परियोजना के पुनरुद्धार के प्रयास कर रहा था, जो अब साकार होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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अभिभावकों ने ली राहत की सांस
महिला कॉलेज के बिल्कुल समीप स्थित होने के कारण इस अधूरे भवन में नशेबाजों के जमावड़े से छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में हमेशा चिंता बनी रहती थी। बीरभान निर्मल, विजय अत्रेय, असीम शर्मा और राधेश्याम भट्ट ने कहा कि निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने की खबर से अभिभावकों और शहरवासियों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने मांग की कि इस बार निर्माण कार्य को बिना किसी देरी के तय समय-सीमा में पूरा किया जाए।
बीचों-बीच स्थित है केंद्र
भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र रेलवे रोड पर, शहर के बीचों-बीच स्थित है। इसके शुरू होने से शहरवासियों को निजी मैरिज पैलेसों के महंगे खर्च से राहत मिलेगी। विवाह, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए लोगों को एक किफायती और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा, जिससे आमजन के हजारों रुपये की बचत होगी।
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कलायत। वार्ड नंबर 11 में महिला कॉलेज के समीप स्थित भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र का आठ वर्षों से चला आ रहा वनवास अब समाप्त होने जा रहा है। नगर पालिका प्रशासन ने लंबे समय से अधूरी पड़ी इस परियोजना को दोबारा पटरी पर लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 2 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। टेंडर जारी होते ही जर्जर हो चुकी इमारत का पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
करोड़ों का प्रोजेक्ट बना रहा नशेबाजों का अड्डा ः 13 अगस्त 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा कलायत में 1.80 करोड़ रुपये की लागत से सामुदायिक केंद्र निर्माण की घोषणा की गई थी। वर्ष 2018 में भगवान परशुराम के नाम पर इस केंद्र का निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन धनाभाव और प्रशासनिक अड़चनों के चलते यह आज तक पूरा नहीं हो सका। आठ वर्ष बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा यह भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गया।
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निर्माण अधूरा रहने के कारण यह सामुदायिक केंद्र आमजन के उपयोग के बजाय नशेबाजों और शराबियों की शरणस्थली बन गया था। भवन परिसर में नशे का सामान बिखरा रहता था। असामाजिक तत्वों ने यहां आगजनी की घटनाएं भी कीं और फॉल सीलिंग तक उखाड़ दी गई। नगर पालिका के कनिष्ठ अभियंता संजीव धीमान ने बताया कि प्रशासन लंबे समय से इस परियोजना के पुनरुद्धार के प्रयास कर रहा था, जो अब साकार होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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अभिभावकों ने ली राहत की सांस
महिला कॉलेज के बिल्कुल समीप स्थित होने के कारण इस अधूरे भवन में नशेबाजों के जमावड़े से छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में हमेशा चिंता बनी रहती थी। बीरभान निर्मल, विजय अत्रेय, असीम शर्मा और राधेश्याम भट्ट ने कहा कि निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने की खबर से अभिभावकों और शहरवासियों ने राहत की सांस ली है। उन्होंने मांग की कि इस बार निर्माण कार्य को बिना किसी देरी के तय समय-सीमा में पूरा किया जाए।
बीचों-बीच स्थित है केंद्र
भगवान परशुराम सामुदायिक केंद्र रेलवे रोड पर, शहर के बीचों-बीच स्थित है। इसके शुरू होने से शहरवासियों को निजी मैरिज पैलेसों के महंगे खर्च से राहत मिलेगी। विवाह, सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए लोगों को एक किफायती और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा, जिससे आमजन के हजारों रुपये की बचत होगी।