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मोबाइल-नशे से दूरी से लक्ष्य प्राप्ति संभव : आलोक
Fri, 22 Aug 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 22 Aug 2025 01:10 AM IST
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09 कैथल। मोबाइल की लत व नशों से दूरी के लिए जागरूक करते योग वेदांत समिति के सदस्य आलोक।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान शेरगढ़ में योगा वेदांत समिति, जींद के तत्वावधान में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता आलोक ने विद्यार्थियों को मोबाइल की लत, नशीली वस्तुओं से दूरी और ब्रह्मचर्य व्रत के पालन से जीवन में सफलता प्राप्त करने के मार्ग बताए।
आलोक ने बताया कि नई तकनीक ने जीवन को सरल बनाया है, लेकिन इसके अति प्रयोग ने लोगों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। विशेष रूप से युवा वर्ग मोबाइल की लत का शिकार हो रहा है, जिससे शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
मोबाइल रेडिएशन के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि मोबाइल से निकलने वाली थर्मल और मैग्नेटिक रेडिएशन मस्तिष्क और हृदय की कोशिकाओं को असामान्य रूप से सक्रिय कर देती हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए यह रेडिएशन विशेष रूप से हानिकारक है, क्योंकि यह भ्रूण के ग्रोइंग टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है। छोटे बच्चों में यह हाइपरएक्टिविटी और मानसिक असंतुलन पैदा कर सकता है।
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आलोक ने चेताया कि मोबाइल रेडिएशन से प्रजनन क्षमता में कमी, डीएनए क्षति, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, मिसकैरेज, ऑर्थराइटिस, अल्जाइमर और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अत्यधिक मोबाइल उपयोग से युवाओं में बहरेपन की समस्या भी देखी जा रही है।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए आलोक ने कहा कि वे मोबाइल का प्रयोग सीमित करें, केवल रचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए उसका उपयोग करें, नशों से दूर रहें और ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। यही तरीका है जिससे वे अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन प्रधानाचार्य कुलवीर सिंह अहलावत के मार्गदर्शन में किया गया। संचालन एप्लाइड साइंस विभाग के अध्यक्ष सत्यवान ढाका ने किया। कार्यक्रम में एप्लाइड साइंस विभाग का स्टाफ एवं प्रथम वर्ष के छात्र उपस्थित रहे।
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कैथल। राजकीय बहुतकनीकी संस्थान शेरगढ़ में योगा वेदांत समिति, जींद के तत्वावधान में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता आलोक ने विद्यार्थियों को मोबाइल की लत, नशीली वस्तुओं से दूरी और ब्रह्मचर्य व्रत के पालन से जीवन में सफलता प्राप्त करने के मार्ग बताए।
आलोक ने बताया कि नई तकनीक ने जीवन को सरल बनाया है, लेकिन इसके अति प्रयोग ने लोगों के स्वास्थ्य और जीवनशैली पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। विशेष रूप से युवा वर्ग मोबाइल की लत का शिकार हो रहा है, जिससे शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
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मोबाइल रेडिएशन के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि मोबाइल से निकलने वाली थर्मल और मैग्नेटिक रेडिएशन मस्तिष्क और हृदय की कोशिकाओं को असामान्य रूप से सक्रिय कर देती हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए यह रेडिएशन विशेष रूप से हानिकारक है, क्योंकि यह भ्रूण के ग्रोइंग टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है। छोटे बच्चों में यह हाइपरएक्टिविटी और मानसिक असंतुलन पैदा कर सकता है।
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आलोक ने चेताया कि मोबाइल रेडिएशन से प्रजनन क्षमता में कमी, डीएनए क्षति, कैंसर, ब्रेन ट्यूमर, मिसकैरेज, ऑर्थराइटिस, अल्जाइमर और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अत्यधिक मोबाइल उपयोग से युवाओं में बहरेपन की समस्या भी देखी जा रही है।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए आलोक ने कहा कि वे मोबाइल का प्रयोग सीमित करें, केवल रचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए उसका उपयोग करें, नशों से दूर रहें और ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। यही तरीका है जिससे वे अपने जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
इस अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन प्रधानाचार्य कुलवीर सिंह अहलावत के मार्गदर्शन में किया गया। संचालन एप्लाइड साइंस विभाग के अध्यक्ष सत्यवान ढाका ने किया। कार्यक्रम में एप्लाइड साइंस विभाग का स्टाफ एवं प्रथम वर्ष के छात्र उपस्थित रहे।