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Kaithal News: आरोपी बरी, गवाह के बयानों में विरोध पर जताई आपत्ति

Sat, 25 Oct 2025 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 25 Oct 2025 01:50 AM IST
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Accused acquitted, objection raised on contradiction in witness statement
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। एनडीपीएस स्पेशल कोर्ट ने थाना गुहला क्षेत्र में अगस्त 2020 में दर्ज अवैध अफीम और शराब बरामदगी के मामले में आरोपी बलबीर सिंह निवासी गांव खंभेड़ा को बरी कर दिया है। पुलिस ने घर में दबिश देकर 50 ग्राम अफीम, पांच बोतल शराब बरामद करने का दावा किया था।

अदालत ने जांच में गंभीर खामियों और गवाहों के विरोधाभासी बयानों के चलते अभियोजन की कहानी को अविश्वसनीय करार दिया। सुनवाई में यह सामने आया कि पुलिस ने जिस गुप्त सूचना के आधार पर दबिश दी, उसका स्रोत रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं था। गवाह उप निरीक्षक बलजीत सिंह ने जिरह में कहा कि सूचना देने वाले व्यक्ति को टवेरा गाड़ी की पिछली सीट पर बैठाया गया था, जबकि सह-अन्वेषक उप निरीक्षक शुभकरण ने बयान दिया कि वह बीच वाली सीट पर था। इसी प्रकार, बलजीत सिंह ने कहा कि छापेमारी के समय वह वर्दी में थे और बाकी पुलिसकर्मी सिविल में, जबकि अन्य गवाहों ने टीम को वर्दी में बताया। अदालत ने इन बयानों को विरोधाभासी करार दिया।
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अवैध शराब बरामदगी के दौरान अफीम मिलने के दावे को प्रमाणित करने के लिए अपनाई गई सूची, नमूने और सीलिंग प्रक्रिया में भी कमियां पाई गईं। अदालत ने कहा कि शराब की बोतलों को इलाका मजिस्ट्रेट के समक्ष नमूनाकरण के समय पेश नहीं किया गया, जिससे चेन ऑफ कस्टडी पर सवाल उठते हैं। शिकायत और गिरफ्तारी मेमो में अफीम और शराब की मात्रा को लेकर भी गंभीर विरोधाभास पाया गया। एक दस्तावेज में 182 ग्राम अफीम और ढाई बोतल शराब, जबकि रिकवरी मेमो में 50 ग्राम अफीम और पांच बोतल शराब दर्ज है।
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बरामदगी में वीडियोग्राफी और स्वतंत्र गवाह नहीं

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस के पास मौके पर स्वतंत्र व्यक्तियों को गवाह बनाने का अवसर था, लेकिन किसी को शामिल नहीं किया गया। न तो बरामदगी की वीडियोग्राफी हुई और न ही फोटोग्राफी, जिससे संपूर्ण कार्यवाही संदेह के घेरे में आ जाती है।


इन सभी कारणों के आधार पर अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित नहीं कर पाया, इसलिए आरोपी बलबीर सिंह को बरी किया जाता है। इस मामले में आरोपी पक्ष की तरफ से अधिवक्ता अजय कुमार गुप्ता और अधिवक्ता अर्पित गुप्ता ने पैरवी की और अदालत में तर्कसंगत रूप से यह साबित किया कि बरामदगी संदिग्ध, प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण और गवाहियां विरोधाभासी थीं।
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