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Kaithal News: एसीबी ने द केंद्रीय सहकारी बैंक की 31 शाखाओं से सामान का रिकॉर्ड किया तलब
Fri, 09 Feb 2024 04:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 09 Feb 2024 04:32 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एकीकृत सहकारी समिति विकास परियोजना के तहत हुए घोटाले को लेकर अब एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने पैक्स के बाद द केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखाओं में भी जांच शुरू कर दी है। इसके तहत अंबाला की एसीबी ने 31 शाखाओं के सामान का रिकॉर्ड तलब किया है। इसमें एसीबी को कंप्यूटर से लेकर एलईडी, प्रिंटर और फर्नीचर तक में भ्रष्टाचार की आशंका है।
गौरतलब है कि आरोपी संजय हुड्डा और विजय के रहते हुए बैंकों की भी कई शाखाओं में इस योजना के तहत सामान भेजा गया था। ऐसे में सामानों का ब्योरा बैंक प्रबंधन की ओर से दिया गया है। बैंक के प्रबंधक रणबीर सिंह ने बताया कि बैंक में डीएसपी पवन शर्मा ने निरीक्षण किया था। इसके बाद करीब 31 शाखाओं का ब्योरा एसीबी को दिया गया है। इन शाखाओं में एक सोलर, 31 कम्प्यूटर, 10 प्रिंटर, पांच स्कैनर, एक वाटर कूलर और 124 कुर्सियां संजय हुड्डा और विजय के समय में आई थी। यह ब्योरा एसीबी को मुहैया करवाया गया है। उधर, खाते में रुपये डलवाने वाले आरोपी संजय के भतीजे अनिल ने जमानत के लिए याचिका लगाई थी, परंतु निचली अदालत ने खारिज कर दिया है।
नियमों को दरकिनार कर पैक्स प्रबंधन ने की थी अपने स्तर पर भर्ती
जिले की आठ पैक्स में प्रबंधन ने अपने स्तर पर ही 57 भर्तियां की थीं। इन भर्तियों में नियमों को भी अनदेखा किया गया था। इसमें नियमानुसर विज्ञापन निकालना होता है, लेकिन यह नहीं निकाला गया और मनमानी तरीके से क्लर्क, चपरासी और सेल्समैन को रखा गया था। प्रबंधक रणबीर ने बताया कि भर्तियों का यह मामला पुराना है। इसमें पहले से ही एआर और डीआर स्तर पर जांच जारी है। मामला डीआर की कोर्ट में भी विचाराधीन है। अब सहकारी समिति के घोटाले में दोनों अधिकारी जेल में हैं तो इनकी जगह पर अतिरिक्त चार्ज देखने वाले अधिकारी ही इस पर कुछ कार्यवाही कर पाएंगे।
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कैथल। एकीकृत सहकारी समिति विकास परियोजना के तहत हुए घोटाले को लेकर अब एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने पैक्स के बाद द केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखाओं में भी जांच शुरू कर दी है। इसके तहत अंबाला की एसीबी ने 31 शाखाओं के सामान का रिकॉर्ड तलब किया है। इसमें एसीबी को कंप्यूटर से लेकर एलईडी, प्रिंटर और फर्नीचर तक में भ्रष्टाचार की आशंका है।
गौरतलब है कि आरोपी संजय हुड्डा और विजय के रहते हुए बैंकों की भी कई शाखाओं में इस योजना के तहत सामान भेजा गया था। ऐसे में सामानों का ब्योरा बैंक प्रबंधन की ओर से दिया गया है। बैंक के प्रबंधक रणबीर सिंह ने बताया कि बैंक में डीएसपी पवन शर्मा ने निरीक्षण किया था। इसके बाद करीब 31 शाखाओं का ब्योरा एसीबी को दिया गया है। इन शाखाओं में एक सोलर, 31 कम्प्यूटर, 10 प्रिंटर, पांच स्कैनर, एक वाटर कूलर और 124 कुर्सियां संजय हुड्डा और विजय के समय में आई थी। यह ब्योरा एसीबी को मुहैया करवाया गया है। उधर, खाते में रुपये डलवाने वाले आरोपी संजय के भतीजे अनिल ने जमानत के लिए याचिका लगाई थी, परंतु निचली अदालत ने खारिज कर दिया है।
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नियमों को दरकिनार कर पैक्स प्रबंधन ने की थी अपने स्तर पर भर्ती
जिले की आठ पैक्स में प्रबंधन ने अपने स्तर पर ही 57 भर्तियां की थीं। इन भर्तियों में नियमों को भी अनदेखा किया गया था। इसमें नियमानुसर विज्ञापन निकालना होता है, लेकिन यह नहीं निकाला गया और मनमानी तरीके से क्लर्क, चपरासी और सेल्समैन को रखा गया था। प्रबंधक रणबीर ने बताया कि भर्तियों का यह मामला पुराना है। इसमें पहले से ही एआर और डीआर स्तर पर जांच जारी है। मामला डीआर की कोर्ट में भी विचाराधीन है। अब सहकारी समिति के घोटाले में दोनों अधिकारी जेल में हैं तो इनकी जगह पर अतिरिक्त चार्ज देखने वाले अधिकारी ही इस पर कुछ कार्यवाही कर पाएंगे।
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