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मनुष्य की पहचान कर्म और आचरण से : कृष्ण शर्मा
Mon, 02 Feb 2026 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:46 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। मार्केट कमेटी चेयरमैन कृष्ण शर्मा पिलनी ने कहा कि गुरु रविदास जी केवल एक महान संत ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधारक, दार्शनिक और मानवता के सशक्त प्रवक्ता थे। गांव पिलनी में आयोजित गुरु रविदास जयंती कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने अपने विचारों और वाणी के माध्यम से समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, जाति-पांति और भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया।
कृष्ण शर्मा ने कहा कि गुरु रविदास जी का जन्म ऐसे समय में हुआ था, जब समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त था। उन्होंने निर्भीक होकर यह संदेश दिया कि मनुष्य की पहचान उसके कर्म, आचरण और मानवता से होती है, न कि जन्म या जाति से। उनकी वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी अपने समय में थी। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां सभी को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हों। गुरु रविदास जयंती के अवसर पर हम सभी का यह दायित्व है कि उनके विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारें। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि भेदभाव, अन्याय और नफरत के खिलाफ मिलकर आवाज बुलंद करें। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य महेंद्र सिंह कैत, राम जुआरी, कमल कैत, सुबह सिंह, करतार सिंह, चांद राम और जितेंद्र कुमार उपस्थित रहे।
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पूंडरी। मार्केट कमेटी चेयरमैन कृष्ण शर्मा पिलनी ने कहा कि गुरु रविदास जी केवल एक महान संत ही नहीं, बल्कि सामाजिक सुधारक, दार्शनिक और मानवता के सशक्त प्रवक्ता थे। गांव पिलनी में आयोजित गुरु रविदास जयंती कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने अपने विचारों और वाणी के माध्यम से समाज में व्याप्त ऊंच-नीच, जाति-पांति और भेदभाव को समाप्त करने का संदेश दिया।
कृष्ण शर्मा ने कहा कि गुरु रविदास जी का जन्म ऐसे समय में हुआ था, जब समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त था। उन्होंने निर्भीक होकर यह संदेश दिया कि मनुष्य की पहचान उसके कर्म, आचरण और मानवता से होती है, न कि जन्म या जाति से। उनकी वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी अपने समय में थी। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां सभी को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्राप्त हों। गुरु रविदास जयंती के अवसर पर हम सभी का यह दायित्व है कि उनके विचारों को केवल स्मरण तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारें। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि भेदभाव, अन्याय और नफरत के खिलाफ मिलकर आवाज बुलंद करें। इस अवसर पर आयोजन समिति के सदस्य महेंद्र सिंह कैत, राम जुआरी, कमल कैत, सुबह सिंह, करतार सिंह, चांद राम और जितेंद्र कुमार उपस्थित रहे।
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