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ीआर धान की खरीद न होने पर गुस्साए किसानों ने मार्केट कमेटी को लगाया ताला
Updated Tue, 16 Oct 2018 11:34 PM IST
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पीआर धान की खरीद न होने पर किसानों ने मार्केट कमेटी को लगाया ताला
फोटो नंबर-39
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। पीआर धान की सरकारी खरीद न होने से किसानों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। गुस्साए किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालय को ताला भी जड़ दिया।
किसान रघुबीर राणा, मेघ राणा, काला जुहानिया, रामफल मटौर, चंद्र चौशाला, सुरेश खेडी, जगदीश शिमला आदि का कहना था कि वे अपने पीआर धान को बेचने के लिए मंडी में आए हुए हैं। लेकिन खरीद एजेंसी हैफेड उनका धान खरीद नहीं रही। जिसके कारण से उनको सस्ते में अपना धान प्राइवेट परचेजर को बेचना पड़ रहा है। किसानों का कहना था कि धान का सरकारी समर्थन मूल्य 1770 है, एजेंसी खरीद ही नहीं कर रही जिसके कारण से उनको 1500 रुपये तक अपने धान को बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। प्रताप बिधराना, रघिसाला राम, मदन सिंह का कहना था कि सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा उनको कभी नमी के नाम पर तो कभी मिलर के न होने के नाम पर बहकाया जा रहा है। सरकारी समर्थन मूल्य के बजाये किसानों को अपने धान की फसल 1500 से लेकर 1600 प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचने पर मजबूूर होना पड़ रहा है।
हैफेड के कार्यकारी मैनेजर सुखदीप सिंह लोहान ने बताया कि मंगलवार को अनाज मंडी से उनकी खरीद होनी थी। सभी खरीद एजेंसियों के साथ धान को लेने वाले मिलर अटैच किए गए हैं। विभाग ने कलायत मंडी के लिए जिस मिलर को अटैच किया था उसका कोटा पूरा हो चुका है और जो दूसरा मिलर अटैच किया जाना है उसने अभी तक पूरे कागजात जमा नहीं करवाए हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। पीआर धान की सरकारी खरीद न होने से किसानों ने सरकार व प्रशासन के खिलाफ जम कर नारेबाजी की। गुस्साए किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालय को ताला भी जड़ दिया।
किसान रघुबीर राणा, मेघ राणा, काला जुहानिया, रामफल मटौर, चंद्र चौशाला, सुरेश खेडी, जगदीश शिमला आदि का कहना था कि वे अपने पीआर धान को बेचने के लिए मंडी में आए हुए हैं। लेकिन खरीद एजेंसी हैफेड उनका धान खरीद नहीं रही। जिसके कारण से उनको सस्ते में अपना धान प्राइवेट परचेजर को बेचना पड़ रहा है। किसानों का कहना था कि धान का सरकारी समर्थन मूल्य 1770 है, एजेंसी खरीद ही नहीं कर रही जिसके कारण से उनको 1500 रुपये तक अपने धान को बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। प्रताप बिधराना, रघिसाला राम, मदन सिंह का कहना था कि सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा उनको कभी नमी के नाम पर तो कभी मिलर के न होने के नाम पर बहकाया जा रहा है। सरकारी समर्थन मूल्य के बजाये किसानों को अपने धान की फसल 1500 से लेकर 1600 प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचने पर मजबूूर होना पड़ रहा है।
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हैफेड के कार्यकारी मैनेजर सुखदीप सिंह लोहान ने बताया कि मंगलवार को अनाज मंडी से उनकी खरीद होनी थी। सभी खरीद एजेंसियों के साथ धान को लेने वाले मिलर अटैच किए गए हैं। विभाग ने कलायत मंडी के लिए जिस मिलर को अटैच किया था उसका कोटा पूरा हो चुका है और जो दूसरा मिलर अटैच किया जाना है उसने अभी तक पूरे कागजात जमा नहीं करवाए हैं।
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