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रेलवे ने बिना जरुरत के बना दिए अंडरपास, कई-कई महीनों तक नहीं निकलता बारिश का पानी लोगों को हादसों का खतरा
Updated Sat, 07 Apr 2018 11:28 PM IST
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रेलवे ने बिना जरूरत के बना दिए अंडरपास, कई-कई महीनों तक नहीं निकलता बारिश का पानी, हादसों का खतरा
गांव कुतुबपुर के लोगों ने की मांग, गांव के आस-पास बनें दो अंडरपास में से पानी की निकासी का प्रबंध किया जाए
इससे पूर्व गांव बरोट के मार्ग पर स्थित अंडर पास में डूबने से हो चुकी है बच्चों की दर्दनाक मौत
फोटो संख्या-1 व 2
नसीब सैनी
कैथल। रेलवे ने कुरुक्षेत्र से जींद मार्ग पर स्थित सभी फाटकों पर अंडर पास बनाकर फाटक बंद करने का निर्णय लिया है। जिसके तहत जिले में 8 फाटकों के नीचे अंडर पास बनाए जा रहे हैं। लेकिन लोगों ने इनका विरोध करना शुरू कर दिया है। क्योंकि 15 से 20 फुट गहरे इन अंडर पास में से पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। एक बार बारिश हो जाए तो कई माह तक इनमें पानी भरा रहता है और लोगों को बड़ा खतरा होने का अंदेशा बना हुआ है। अब गांव कुतुबपुर के लोगों ने गांव के निकट बने दो अंडर पास में पानी की निकासी की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
लोगों ने किया विरोध:-
गांव कुतुबपुर के सरपंच सुनील कुमार, सेवानिवृत्त अध्यापक पृथ्वी सिंह ने कहा कि गांव के निकट रेलवे लाइन के नीचे दो अंडर पास बना दिए गए हैं। जबकि यहां इतना ज्यादा ट्रैफिक भी नहीं था। इसके बावजूद ये अंडर पास बना दिए गए हैं। इनमें से एक बार बारिश हो जाए तथो 15 से 20 फुट तक पानी भर जाता है। जिसमें बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। सजूमा रोड पर बना अंडर पास पिछले दो माह से बंद पड़ा था। क्योंकि इसमें पानी भरा हुआ था। एक दिन यहां एक कार चालक रात को भरे पानी में अंडर पास में उतर गया होता। उसे थोड़े से पानी में जाकर स्थिति का अंदाजा हो गया और वह वापिस लौट गया।
इसी प्रकार से गांव बरोट में भी पिछले साल हुए हादसे में बच्चों की मौत हो गई थी। बारिश के मौसम में यदि इनमें गर्मी के मौसम में पानी भर गया तो बच्चे फिर यहां नहाने के लिए आएंगे तो कोई ना कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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उनकी रेलवे से मांग है कि यहां रेलवे अंडर पास के नीचे खड़े होने वाले पानी की निकासी का प्रबंध किया जाए।
यही स्थिति कैथल में रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे बना गए अंडर पास की है। जहां थोड़ी सी बारिश के बगाद पानी एकत्रित हो जाता है। इस पानी के चलते लोगों को भारी परेशानी होती है।
बरोट के रास्ते पर पिछले साल हो चुकी है मौत, कुतुबपुर रोड पर धंसा था रेलवे ट्रेक:-
गांव बरोट के रास्ते पर पिछले साल तीन बच्चों की मौत हो गई थी। वहीं गांव कुतुबपुर के निकट रेलवे ट्रैक धंस भी चुका है। इसके बावजूद पानी की निकासी के प्रबंध नहीं हो पा रहे हैं। आने वाले बारिश के सीजन में यह बड़ी समस्या बन सकता है।
कैथल जिले में 8 अंडर पास, अभी ओर भी बनाए जा रहे हैं:-
कुरुक्षेत्र से जींद तक 8 अंडर पास बनाए जाने हैं। इनमें से कई बन चुके हैं। कई अभी बनाए जा रहे हैं। गांव सिल्लाखेड़ा की फाटक के अलावा दर्शन सिंह डेरे के निकट अंडर पास बनाया जा रहा है।
सभी अंडरपास में निकासी के लिए लगाए पंप:-
उत्तर रेलवे के प्रवक्ता नितिन चौधरी ने बताया कि रेलवे द्वारा बनाए सभी रेलवे अंडरपास में पंप लगाकर पानी निकालने की प्रकिया को शुरु किया गया है। ताकि आम लोगों को कोई परेशानी हो। यदि इसके बावजूद अन्य किसी शहर में रेलवे अंडरपास में पंप नहीं लगाया गया तो उस पर पंप लगाने की कार्रवाई को अमल में लाया जाएगा।
गांव कुतुबपुर के लोगों ने की मांग, गांव के आस-पास बनें दो अंडरपास में से पानी की निकासी का प्रबंध किया जाए
इससे पूर्व गांव बरोट के मार्ग पर स्थित अंडर पास में डूबने से हो चुकी है बच्चों की दर्दनाक मौत
फोटो संख्या-1 व 2
नसीब सैनी
कैथल। रेलवे ने कुरुक्षेत्र से जींद मार्ग पर स्थित सभी फाटकों पर अंडर पास बनाकर फाटक बंद करने का निर्णय लिया है। जिसके तहत जिले में 8 फाटकों के नीचे अंडर पास बनाए जा रहे हैं। लेकिन लोगों ने इनका विरोध करना शुरू कर दिया है। क्योंकि 15 से 20 फुट गहरे इन अंडर पास में से पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं है। एक बार बारिश हो जाए तो कई माह तक इनमें पानी भरा रहता है और लोगों को बड़ा खतरा होने का अंदेशा बना हुआ है। अब गांव कुतुबपुर के लोगों ने गांव के निकट बने दो अंडर पास में पानी की निकासी की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
लोगों ने किया विरोध:-
गांव कुतुबपुर के सरपंच सुनील कुमार, सेवानिवृत्त अध्यापक पृथ्वी सिंह ने कहा कि गांव के निकट रेलवे लाइन के नीचे दो अंडर पास बना दिए गए हैं। जबकि यहां इतना ज्यादा ट्रैफिक भी नहीं था। इसके बावजूद ये अंडर पास बना दिए गए हैं। इनमें से एक बार बारिश हो जाए तथो 15 से 20 फुट तक पानी भर जाता है। जिसमें बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। सजूमा रोड पर बना अंडर पास पिछले दो माह से बंद पड़ा था। क्योंकि इसमें पानी भरा हुआ था। एक दिन यहां एक कार चालक रात को भरे पानी में अंडर पास में उतर गया होता। उसे थोड़े से पानी में जाकर स्थिति का अंदाजा हो गया और वह वापिस लौट गया।
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इसी प्रकार से गांव बरोट में भी पिछले साल हुए हादसे में बच्चों की मौत हो गई थी। बारिश के मौसम में यदि इनमें गर्मी के मौसम में पानी भर गया तो बच्चे फिर यहां नहाने के लिए आएंगे तो कोई ना कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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उनकी रेलवे से मांग है कि यहां रेलवे अंडर पास के नीचे खड़े होने वाले पानी की निकासी का प्रबंध किया जाए।
यही स्थिति कैथल में रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे बना गए अंडर पास की है। जहां थोड़ी सी बारिश के बगाद पानी एकत्रित हो जाता है। इस पानी के चलते लोगों को भारी परेशानी होती है।
बरोट के रास्ते पर पिछले साल हो चुकी है मौत, कुतुबपुर रोड पर धंसा था रेलवे ट्रेक:-
गांव बरोट के रास्ते पर पिछले साल तीन बच्चों की मौत हो गई थी। वहीं गांव कुतुबपुर के निकट रेलवे ट्रैक धंस भी चुका है। इसके बावजूद पानी की निकासी के प्रबंध नहीं हो पा रहे हैं। आने वाले बारिश के सीजन में यह बड़ी समस्या बन सकता है।
कैथल जिले में 8 अंडर पास, अभी ओर भी बनाए जा रहे हैं:-
कुरुक्षेत्र से जींद तक 8 अंडर पास बनाए जाने हैं। इनमें से कई बन चुके हैं। कई अभी बनाए जा रहे हैं। गांव सिल्लाखेड़ा की फाटक के अलावा दर्शन सिंह डेरे के निकट अंडर पास बनाया जा रहा है।
सभी अंडरपास में निकासी के लिए लगाए पंप:-
उत्तर रेलवे के प्रवक्ता नितिन चौधरी ने बताया कि रेलवे द्वारा बनाए सभी रेलवे अंडरपास में पंप लगाकर पानी निकालने की प्रकिया को शुरु किया गया है। ताकि आम लोगों को कोई परेशानी हो। यदि इसके बावजूद अन्य किसी शहर में रेलवे अंडरपास में पंप नहीं लगाया गया तो उस पर पंप लगाने की कार्रवाई को अमल में लाया जाएगा।