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ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया बनी गले की फांस
Updated Wed, 19 Jul 2017 11:59 PM IST
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ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया बनी गले की फांस
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नोटबंदी के बाद से सरकार ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया है। लेकिन 8 महीनों के बाद भी ऑनलाईन प्रकिया में कोई सुधार नहीं हो सका है। लघु सचिवालय में मिलने वाली ऑनलाइन सुविधाएं भी काफी ढीली हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए एक अन्य ई-दिशा केंद्र भी स्थापित किया है। जिसमें वाहन पंजीकरण व लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को अलग-अलग ई-दिशा केंद्रों में किया गया है। इसके बावजूद भी यहां आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया एक सरल प्रक्रिया तो है। लेकिन अधिकतर समय प्रयोग में लाए जाने वाले साफ्टवेयर कार्य करना बंद कर देते हैं। जिस कारण उन्हें भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है। लाइसेंस बनवाने आए गांव पोलड़ निवासी लवप्रीत सिंह ने बताया कि भीड़ न होने के बावजूद टोकन लेने के बाद इंटरनेट न चलने की वजह से उसे एक घंटा इंटरनेट की स्पीड ठीक होने का इंतजार करना पड़ा। वह सुबह 10 बजे ही ई-दिशा केंद्र में आ गया था। दोपहर बारह बजे तक उसे स्पीड ठीक होने का इंतजार करना पड़ा।
डीआईओ दीपक खुराना ने कहा कि कई बार पीछे से सर्वर डाउन होने के कारण कुछ परेशानी है। इस तरह की समस्या आती रहती है। जैसे ही पीछे से सर्वर ठीक होता है, उसी अनुसार सेवाएं चल जाती हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। नोटबंदी के बाद से सरकार ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया है। लेकिन 8 महीनों के बाद भी ऑनलाईन प्रकिया में कोई सुधार नहीं हो सका है। लघु सचिवालय में मिलने वाली ऑनलाइन सुविधाएं भी काफी ढीली हैं। हालांकि जिला प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए एक अन्य ई-दिशा केंद्र भी स्थापित किया है। जिसमें वाहन पंजीकरण व लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को अलग-अलग ई-दिशा केंद्रों में किया गया है। इसके बावजूद भी यहां आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया एक सरल प्रक्रिया तो है। लेकिन अधिकतर समय प्रयोग में लाए जाने वाले साफ्टवेयर कार्य करना बंद कर देते हैं। जिस कारण उन्हें भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है। लाइसेंस बनवाने आए गांव पोलड़ निवासी लवप्रीत सिंह ने बताया कि भीड़ न होने के बावजूद टोकन लेने के बाद इंटरनेट न चलने की वजह से उसे एक घंटा इंटरनेट की स्पीड ठीक होने का इंतजार करना पड़ा। वह सुबह 10 बजे ही ई-दिशा केंद्र में आ गया था। दोपहर बारह बजे तक उसे स्पीड ठीक होने का इंतजार करना पड़ा।
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डीआईओ दीपक खुराना ने कहा कि कई बार पीछे से सर्वर डाउन होने के कारण कुछ परेशानी है। इस तरह की समस्या आती रहती है। जैसे ही पीछे से सर्वर ठीक होता है, उसी अनुसार सेवाएं चल जाती हैं।
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