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ग्रामीण क्षेत्रों में लगाए जाएंगे 40 बायोगैस संयंत्र
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40 biogas plants to be set up in rural areas
- फोटो : Kaithal
जिले में न्यू नेशनल बायो गैस एंड ऑर्गेनिक मेन्योर प्रोग्राम स्कीम के तहत कृषि विभाग की तरफ से 40 बायोगैस प्लांट संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन पर विभाग की ओर से कार्य शुरू कर दिया गया है। प्लांट लगाने का मुख्य उद्देश्य ऑर्गेनिक खेती और प्रदूषण को नियंत्रित रखना है।
जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में पशुओं की संख्या अधिक होती है। उनके गोबर का सही इस्तेमाल हो इसलिए कृषि विभाग ने ग्रामीणों के लिए प्लांट स्थापित करने की योजना शुरू की है। ग्रामीण क्षेत्र में गोबर की अधिक उपलब्धता के कारण इसका सदुपयोग गांवों में किया जा सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार बायोगैस संयंत्र लगाने में 50 हजार रुपये खर्च आता है। इसके लिए विभाग की ओर से 12 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जाती है। वहीं किसानों का कहना है कि संयंत्र बनाने में जितनी लागत आती है उसका 50 प्रतिशत अनुदान विभाग की ओर से किसानों को दिया जाना चाहिए। ताकि अधिक किसान बायोगैस प्लांट लगवाकर इसका लाभ उठा सके।
एडीओ सज्जन सिंह ने बताया कि बायोगैस संयंत्र से प्रदूषण नहीं होता है, बायोगैस उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे पदार्थ गांवों में काफी मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। इनसे सिर्फ बायोगैस का उत्पादन ही नहीं होता, बल्कि फसलों की उपज बढ़ाने के लिए समृद्ध खाद भी मिलती है। बायोगैस धुआं मुक्त संयंत्र है। ये प्रदूषण को भी नियंत्रित रखता है, क्योंकि इसमें गोबर खुले में पड़ा रहता। इससे कीटाणु और मच्छर नहीं पनप पाते। बायोगैस के कारण लकड़ी की बचत होती है। उन्होंने कहा कि गोबर गैस संयंत्र लगाने के लिए पांच से अधिक मवेशी और 50 किलो गोबर की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा 13 फीट की डोम सहित कुल 25 फुट की जगह होनी चाहिए। जिसमें गोबर गैस संयंत्र बनाने के साथ-साथ खाद भी रखने की व्यवस्था हो सके। उन्होंने बताया कि 14 गैस प्लांट संयंत्रों पर काम शुरू कर दिया है।
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सहायक कृषि अभियंता पुरुषोत्तम लाल व सहायक परियोजना अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से 40 प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 14 गैस प्लांट संयंत्रों पर काम शुरू कर दिया गया है। रसोई गैस के भाव बढ़ रहे है। इसलिए ये प्लांट स्थापित कर ग्रामीण गोबर से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
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जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में पशुओं की संख्या अधिक होती है। उनके गोबर का सही इस्तेमाल हो इसलिए कृषि विभाग ने ग्रामीणों के लिए प्लांट स्थापित करने की योजना शुरू की है। ग्रामीण क्षेत्र में गोबर की अधिक उपलब्धता के कारण इसका सदुपयोग गांवों में किया जा सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार बायोगैस संयंत्र लगाने में 50 हजार रुपये खर्च आता है। इसके लिए विभाग की ओर से 12 हजार रुपये की अनुदान राशि दी जाती है। वहीं किसानों का कहना है कि संयंत्र बनाने में जितनी लागत आती है उसका 50 प्रतिशत अनुदान विभाग की ओर से किसानों को दिया जाना चाहिए। ताकि अधिक किसान बायोगैस प्लांट लगवाकर इसका लाभ उठा सके।
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एडीओ सज्जन सिंह ने बताया कि बायोगैस संयंत्र से प्रदूषण नहीं होता है, बायोगैस उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे पदार्थ गांवों में काफी मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। इनसे सिर्फ बायोगैस का उत्पादन ही नहीं होता, बल्कि फसलों की उपज बढ़ाने के लिए समृद्ध खाद भी मिलती है। बायोगैस धुआं मुक्त संयंत्र है। ये प्रदूषण को भी नियंत्रित रखता है, क्योंकि इसमें गोबर खुले में पड़ा रहता। इससे कीटाणु और मच्छर नहीं पनप पाते। बायोगैस के कारण लकड़ी की बचत होती है। उन्होंने कहा कि गोबर गैस संयंत्र लगाने के लिए पांच से अधिक मवेशी और 50 किलो गोबर की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा 13 फीट की डोम सहित कुल 25 फुट की जगह होनी चाहिए। जिसमें गोबर गैस संयंत्र बनाने के साथ-साथ खाद भी रखने की व्यवस्था हो सके। उन्होंने बताया कि 14 गैस प्लांट संयंत्रों पर काम शुरू कर दिया है।
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सहायक कृषि अभियंता पुरुषोत्तम लाल व सहायक परियोजना अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि विभाग की ओर से 40 प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से 14 गैस प्लांट संयंत्रों पर काम शुरू कर दिया गया है। रसोई गैस के भाव बढ़ रहे है। इसलिए ये प्लांट स्थापित कर ग्रामीण गोबर से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।