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जिले में अब तक 19 प्रतिशत कम बारिश
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Sat, 11 Jul 2015 12:04 AM IST
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कैथल में बीते दो दिन में जिले में 35 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। शुक्रवार शाम को भी जिलेभर में बारिश हुई। कई कॉलनियों नें पानी भरने से लोगों को दिक्कत हुई। हालांकि लगातार बारिश से किसान निहाल हैं, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई में मानसून के हिसाब से अब तक जिले में 19 प्रतिशत कम बरसात हुई है।
उधर, अगले 48 घंटों में तेज बरसात की संभावनाएं हैं। इससे बरसात का आंकड़े में सुधार आने की उम्मीद है। किसान धान की रोपाई में जुट हुए हैं। शहर में जगह-जगह भरे पानी के कारण प्रशासन के पानी की निकासी के दावे फेल नजर आ रहे हैं।
वीरवार शाम को करीब 20 एमएम बरसात दर्ज की गई थी। बीते दिन का पानी अभी विभिन्न कालोनियों से निकला भी नहीं था कि शुक्रवार शाम फिर से करीब एक घंटे तक तेज बरसात से कॉलोनियां लबालब हो गई। बरसात के कारण शहर में सरगोधा कालोनी, भगत सिंह चौक के चारों ओर की सड़कों, नानकपुरी बस्ती, हरसौला बस्ती, रामनगर, भाट बस्ती, रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे की बस्ती, अमरगढ़ गामड़ी में कई घरों में पानी घुस गया। दो दिन में 35 एमएम बरसात से पूरे शहर में जलभराव की स्थिति बन गई है।
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समाज सेवी लाजपत सिंगला का कहना है कि यहां सरगोधा कालोनी में चारों ओर पानी खड़ा हो गया है। प्रशासन द्वारा पानी निकासी के लिए किए दावे फेल हो गए हैं। अधिकारी बरसात से पहले पानी निकासी की तैयारियों के लिए दौरे तो करते हैं। लेकिन उनका कोई परिणाम नहीं निकलता। खामियाजा शहर के लोगों को थोड़ी सी बरसात में खड़े होने वाले पानी से होने वाली समस्याओं के रूप में भुगतना पड़ता है।
किसानों के लिए बारिश वरदान
इस समय जिले में धान की रोपाई का कार्य पूरे जोरशोर से चल रहा है। करीब एक लाख 50 हजार हेक्टेयर में से अब तक 1 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है। शेष बचे इलाके के लिए भी किसान दिन-रात एक किए हैं। बारिश के कारण किसानों को आर्थिक रूप से भी फायदा होगा। डीजल के पैसे बचेंगे और भूजल का दोहन भी कम होगा।
अब तक 66 एमएम बारिश होनी चाहिए थी : विभाग
जिले में मानसून के हिसाब से अब तक 19 प्रतिशत कम बरसात हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 9 जुलाई तक कैथल जिले में औसतन 66 एमएम बरसात होनी थी। लेकिन अब तक यह 53 एमएम ही हुई है। जो औसत से कम है।
कृषि वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा के अनुसार वीरवार को जहां 20 एमएम बरसात दर्ज की गई थी। शुक्रवार शाम 15 एमएम बरसात हुई है। जो किसानों के लिए फायदेमंद है। इस बरसात से खेतों में जो पानी एकत्रित होगा, वह धान की रोपाई के लिए काफी लाभदायक है। इससे किसानों की धान की रोपाई पर लागत में भी कमी आएगी। अगले 48 घंटों में तेज बरसात की संभावनाएं हैं।
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उधर, अगले 48 घंटों में तेज बरसात की संभावनाएं हैं। इससे बरसात का आंकड़े में सुधार आने की उम्मीद है। किसान धान की रोपाई में जुट हुए हैं। शहर में जगह-जगह भरे पानी के कारण प्रशासन के पानी की निकासी के दावे फेल नजर आ रहे हैं।
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वीरवार शाम को करीब 20 एमएम बरसात दर्ज की गई थी। बीते दिन का पानी अभी विभिन्न कालोनियों से निकला भी नहीं था कि शुक्रवार शाम फिर से करीब एक घंटे तक तेज बरसात से कॉलोनियां लबालब हो गई। बरसात के कारण शहर में सरगोधा कालोनी, भगत सिंह चौक के चारों ओर की सड़कों, नानकपुरी बस्ती, हरसौला बस्ती, रामनगर, भाट बस्ती, रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे की बस्ती, अमरगढ़ गामड़ी में कई घरों में पानी घुस गया। दो दिन में 35 एमएम बरसात से पूरे शहर में जलभराव की स्थिति बन गई है।
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समाज सेवी लाजपत सिंगला का कहना है कि यहां सरगोधा कालोनी में चारों ओर पानी खड़ा हो गया है। प्रशासन द्वारा पानी निकासी के लिए किए दावे फेल हो गए हैं। अधिकारी बरसात से पहले पानी निकासी की तैयारियों के लिए दौरे तो करते हैं। लेकिन उनका कोई परिणाम नहीं निकलता। खामियाजा शहर के लोगों को थोड़ी सी बरसात में खड़े होने वाले पानी से होने वाली समस्याओं के रूप में भुगतना पड़ता है।
किसानों के लिए बारिश वरदान
इस समय जिले में धान की रोपाई का कार्य पूरे जोरशोर से चल रहा है। करीब एक लाख 50 हजार हेक्टेयर में से अब तक 1 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो चुकी है। शेष बचे इलाके के लिए भी किसान दिन-रात एक किए हैं। बारिश के कारण किसानों को आर्थिक रूप से भी फायदा होगा। डीजल के पैसे बचेंगे और भूजल का दोहन भी कम होगा।
अब तक 66 एमएम बारिश होनी चाहिए थी : विभाग
जिले में मानसून के हिसाब से अब तक 19 प्रतिशत कम बरसात हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 9 जुलाई तक कैथल जिले में औसतन 66 एमएम बरसात होनी थी। लेकिन अब तक यह 53 एमएम ही हुई है। जो औसत से कम है।
कृषि वैज्ञानिक डा. रमेश वर्मा के अनुसार वीरवार को जहां 20 एमएम बरसात दर्ज की गई थी। शुक्रवार शाम 15 एमएम बरसात हुई है। जो किसानों के लिए फायदेमंद है। इस बरसात से खेतों में जो पानी एकत्रित होगा, वह धान की रोपाई के लिए काफी लाभदायक है। इससे किसानों की धान की रोपाई पर लागत में भी कमी आएगी। अगले 48 घंटों में तेज बरसात की संभावनाएं हैं।