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Kaithal News: पूंडरी में 31 अध्यापकों को किया सम्मानित
Sat, 07 Sep 2024 04:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 07 Sep 2024 04:52 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। अध्यापक दिवस के उपलक्ष्य में पर्यावरण एवं संस्कृति संरक्षण मंच पूंडरी ने पद्माक्षी पैलेस में कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर 31 अध्यापकों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि समाजसेवी अजीत सिंह व विशिष्टï अतिथि के रूप में डॉ. देवेंद्र सैनी ने शिरकत की। मुख्यातिथि अजीत सिंह ने कहा कि शिक्षक का दर्जा सबसे ऊंचा होता है, इसलिए हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए। शिक्षक न केवल समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य करता बल्कि समाज के नवनिर्माण में भी अपनी भूमिका निभाता है।
मंच के उपप्रधान निरंजन आचार्य ने बताया प्राचीन काल से गुरु का स्थान पूजनीय रहा है, क्यों कि बिना गुरु के ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। हमारे शास्त्रों में गुरु को भगवान से बड़ा दर्जा दिया है और ये उचित भी है। गुरु के ज्ञान से ही हम भगवान को प्राप्त कर सकते हैं, इसलिए सर्वप्रथम हमें अपने गुरु का सम्मान करना चाहिए। मंच के प्रधान अनिल आर्य ने बताया कि मंच हर वर्ष शिक्षकों के सम्मान में इस कार्यक्रम का आयोजन करता है, जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने अध्यापकों को मंच की ओर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है।
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कार्यक्रम के दौरान कमिता गिरधर, रिंपल टाया व मंच के सचिव रोशनलाल ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच प्रधान अनिल आर्य ने की।
इस मौके पर मंच के उपप्रधान निरंजन आचार्य, सरदार कुलदीप सिंह, ईश्वर दयाल मोहना, हरिचंद सैनी, सेवा सिंह, जयपाल सैनी, बृजेश टाया, सुभाष चंद, राकेश मित्तल मौजूद रहे।
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पूंडरी। अध्यापक दिवस के उपलक्ष्य में पर्यावरण एवं संस्कृति संरक्षण मंच पूंडरी ने पद्माक्षी पैलेस में कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर 31 अध्यापकों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि समाजसेवी अजीत सिंह व विशिष्टï अतिथि के रूप में डॉ. देवेंद्र सैनी ने शिरकत की। मुख्यातिथि अजीत सिंह ने कहा कि शिक्षक का दर्जा सबसे ऊंचा होता है, इसलिए हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए। शिक्षक न केवल समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य करता बल्कि समाज के नवनिर्माण में भी अपनी भूमिका निभाता है।
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मंच के उपप्रधान निरंजन आचार्य ने बताया प्राचीन काल से गुरु का स्थान पूजनीय रहा है, क्यों कि बिना गुरु के ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। हमारे शास्त्रों में गुरु को भगवान से बड़ा दर्जा दिया है और ये उचित भी है। गुरु के ज्ञान से ही हम भगवान को प्राप्त कर सकते हैं, इसलिए सर्वप्रथम हमें अपने गुरु का सम्मान करना चाहिए। मंच के प्रधान अनिल आर्य ने बताया कि मंच हर वर्ष शिक्षकों के सम्मान में इस कार्यक्रम का आयोजन करता है, जिसमें शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने अध्यापकों को मंच की ओर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है।
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कार्यक्रम के दौरान कमिता गिरधर, रिंपल टाया व मंच के सचिव रोशनलाल ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच प्रधान अनिल आर्य ने की।
इस मौके पर मंच के उपप्रधान निरंजन आचार्य, सरदार कुलदीप सिंह, ईश्वर दयाल मोहना, हरिचंद सैनी, सेवा सिंह, जयपाल सैनी, बृजेश टाया, सुभाष चंद, राकेश मित्तल मौजूद रहे।