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कैथल में ही होगा एचआईवी पॉजीटिव पीड़ितों का उपचार
Updated Wed, 05 Dec 2018 12:39 AM IST
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कैथल में ही होगा एचआईवी पॉजीटिव पीड़ितों का उपचार
अभी तक रोहतक करना पड़ता था रेफर
सरकार ने खोला सेंटर
विशेष टीम भी तैनात की
फोटो संख्या-17
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सरकार ने एड्स व एचआईवी पॉजीटिव मरीजों के ईलाज के लिए अब जिलास्तर पर ही सुविधा प्रदान कर दी है। इसके लिए जिला अस्पताल में विशेष केंद्र इंटीग्रेटिड एआरटी सेंटर बनाया गया है। जहां से मरीजों को दवा दी जाएगी। सेंटर इंचार्ज एवं त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. मीनाक्षी इस केंद्र में मरीजों का ईलाज करेंगी। उन्होंने बताया कि अभी तक एचआईवी पॉजीटिव पाए जाने पर मरीज को रोहतक रेफर किया जाता था। एचआईवी का वायरस हमारे शरीर में धीरे-धीरे डीएनए तक पहुंच जाता है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर देता है। इससे अन्य बीमारियां खड़ी हो जाती हैं। जिससे मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसका समय से पता चल जाए और उसका ईलाज शुरू कर दिया जाए तो एचआईवी पॉजीटिव भी सामान्य जीवन जी सकता है। पहले सीडी-4 कांउट करवाने के लिए रोहतक ही भेजना पड़ता था। लेकिन अब मरीज का सेंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने पर उसका ईलाज शुरू करते हुए दवा दे दी जाएगी। एचआईवी पॉजीटिव को दवा देकर इस वायरस को बढने से रोका जाता है। यह वायरस इतना खत्तरनाक है कि कुछेक सालों के अंतराल के बाद अपनी क्षमता, स्वरुप को बदल रहा है। जिस कारण हर साल इसमें नए अध्ययन सामने आ रहे हैं।
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अभी तक रोहतक करना पड़ता था रेफर
सरकार ने खोला सेंटर
विशेष टीम भी तैनात की
फोटो संख्या-17
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सरकार ने एड्स व एचआईवी पॉजीटिव मरीजों के ईलाज के लिए अब जिलास्तर पर ही सुविधा प्रदान कर दी है। इसके लिए जिला अस्पताल में विशेष केंद्र इंटीग्रेटिड एआरटी सेंटर बनाया गया है। जहां से मरीजों को दवा दी जाएगी। सेंटर इंचार्ज एवं त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. मीनाक्षी इस केंद्र में मरीजों का ईलाज करेंगी। उन्होंने बताया कि अभी तक एचआईवी पॉजीटिव पाए जाने पर मरीज को रोहतक रेफर किया जाता था। एचआईवी का वायरस हमारे शरीर में धीरे-धीरे डीएनए तक पहुंच जाता है। जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर देता है। इससे अन्य बीमारियां खड़ी हो जाती हैं। जिससे मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसका समय से पता चल जाए और उसका ईलाज शुरू कर दिया जाए तो एचआईवी पॉजीटिव भी सामान्य जीवन जी सकता है। पहले सीडी-4 कांउट करवाने के लिए रोहतक ही भेजना पड़ता था। लेकिन अब मरीज का सेंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने पर उसका ईलाज शुरू करते हुए दवा दे दी जाएगी। एचआईवी पॉजीटिव को दवा देकर इस वायरस को बढने से रोका जाता है। यह वायरस इतना खत्तरनाक है कि कुछेक सालों के अंतराल के बाद अपनी क्षमता, स्वरुप को बदल रहा है। जिस कारण हर साल इसमें नए अध्ययन सामने आ रहे हैं।