फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   धान की फसल में पता लपेट सुंडी का प्रकोप, किसानों सता रहा भय

धान की फसल में पता लपेट सुंडी का प्रकोप, किसानों सता रहा भय

Mon, 20 Aug 2018 12:16 AM IST
Updated Mon, 20 Aug 2018 12:16 AM IST
विज्ञापन
धान की फसल में पता लपेट सुंडी का प्रकोप, किसानों सता रहा भय
धान की फसल में पत्ता लपेट सुंडी का प्रकोप, किसानों को सता रहा फसल खराब होने का भय
विज्ञापन

फोटो नंबर-15
अमित तनेजा
सीवन। क्षेत्र में धान की फसल में पत्ता लपेट सुंडी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। वहीं तेला ने भी अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। जिसे देख किसानों ने फसल को बचाने के लिए कृषि विशेषज्ञों की सलाह अनुसार कीटनाशक दवाइयों का स्प्रे करना आरंभ कर दिया है। ताकि यह आगे न फैल सके। किसानों को इस बात की चिंता सताए जा रही थी कहीं बीमारी का प्रकोप बढ़ गया तो धान की फसल को नुकसान हो सकता है। इस बार समय समय पर बरसात होते रहने से धान की फसल अच्छी खड़ी है। अगर फसल बीमारियों के प्रकोप से बची रही तो पैदावार अच्छी हो सकती है।
धान की फसल के लिए हमेशा से ही शीथ ब्लाईट, तेला, गोब की सुंडी, पत्ता लपेट आदि बीमारी हर बार घातक सिद्ध होती रही है। इस समय पत्ता लपेट सुंडी और तेला दोनों ने धान की फसल में अटैक करना शुरू कर दिया है। किसान जंगीर सिंह, सुखविन्द्र सिंह लल्ली, नसीब सिंह, अशोक, रामरतन ने बताया कि इस बार मौसम में अचानक गर्मी व कभी ठंडक आने से धान की फसल में तेला व गोब की सुंडी अधिक लगने की संभावना है। जिसके कारण बाली सफेद व धान की फसल सूखने लगती है। पहले यह कीट अधिकतर बासमती धान में ही लगते थे लेकिन इस बार धान की पीआर किस्मों में भी दिखाई दे रही है। जिसको देखते हुए किसानों ने पीआर किस्मों के साथ-साथ धान की लंबी किस्मों में भी स्प्रे करवाना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन

शीथ ब्लाईट लगने का कारण : शीथ ब्लाईट बीमारी लगने का मुख्य कारण खेत की ढयोलो पर घास होना है। घास के कारण ही यह बीमारी पनपती है। किसानों को धान की फसल की ढयोलो पर घास बिलकुल भी नहीं होने देना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

उपचार के उपाय : कृषि विकास अधिकारी डॉ. सुरेन्द्र कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि अगर धान की फसल में शीथ ब्लाईट दिखाई दे तो इसके लिए 400 ग्राम शीथमार दवाई का स्प्रे करें, गोब की सुंडी लगी हो तो किसानों को प्रति एकड़ मोनो 500 मिली ग्राम, धान की फसल में तेला दिखाई दे तो उसके लिए 80 एमएल कोन्फीडोर का स्प्रे करना चाहिए।

धान में ऐसे करें बीमारियों की पहचान : धान की फसल में पत्ता लपेट सुंडी की पहचान यह है कि धान के पौधे की पत्तियां सुंडी मरोड़ लेती है और उसका रस चूसने लगती जिससे पत्ते सूखने लगते हैं। जब पत्ते की मरोड़ी को खोलकर देखते हैं तो उसमें सुंडी निकलेगी। गोब की सुंडी की पहचान यह है कि गोब सूखने लगती है और बाली सफेद निकलने लगती है। तेले के कारण फसल सूखने लगती है। अगर किसान समय पर ध्यान न दे तो सारे खेत में फैल कर फसल को नष्ट कर देता है। यह दिखाई दे तो किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह अनुसार दवाइयों का स्प्रे करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed