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धान की कीमतों व मौसम के हालात से पता चलता है रुट साफ या नहीं
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:10 AM IST
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कोडवर्ड का इस्तेमाल कर बचते हैं बेटिकट युवा, मौसम खराब मतलब रास्ते में है चेकिंग टीम
टिकट जांच की टीम की गाड़ियों के नंबरों पर होती है धान के रेटों के माध्यम से बात
कमल बहल
कैथल। हरियाणा रोडवेज में बेटिकट यात्री धान की कीमतों और मौसम के हालात की जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर कर रोडवेज को हर रोज हजारों रुपये का चपत लगा रहे हैं। युवाओं ने ऐसे कोडवर्ड बनाए हैं कि समझने वाला इन्हें सामान्य कीमतें व मौसम की जानकारी ही समझता है, लेकिन असल मेें ये रोडवेज की जांच टीमों को लेकर जानकारी है। इसके लिए युवाओं ने व्हाटसएप ग्रुप बना रखे हैं।
रोडवेज में बेटिकट यात्रियों ने बना रखें हैं कोड : रोडवेज की बसों में महज 25 से 50 किलोमीटर की दूरी का सफर तय करने में बेटिकट यात्री चंद रुपये बचाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुपों में अपने-अपने तरीके से कोड बनाकर टिकट जांच टीम से बचने में सफल रहते हैं। इस पर विभाग के आला अधिकारी भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं पा रहे है। वे पूरी तरह से इन ग्रुपों की जानकारी हासिल करने में नाकाम हैं। यहां तक यदि कभी इन व्हाट्सएप ग्रुप का सदस्य टिकट जांच की टीम की पकड़ में आ भी जाता है तो वह अपने मोबाइल को दूसरे यात्रियों के हाथ में दे देता है। ताकि टिकट जांच टीम उस ग्रुप में एडमिन व अन्य सदस्यों की जानकारी हासिल न कर सकें।
ऐसे होती है टिकट जांच टीम की मुखबिरी : टिकट जांच टीम से बचने के लिए बेटिकट यात्री धान की कीमतों व मौसम के हालात से रूट के साफ होने की जानकारी का पता लगाते हैं। रोडवेज में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बेटिकट यात्रियों द्वारा रोडवेज, मौसम व धान के नामों से कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। उदाहरण के लिए यदि रास्ते में जांच टीम नहीं है तो बताया जाता है कि मौसम साफ है और यदि जांच टीम है तो बताया जाता है कि मौसम खराब है। इसी प्रकार से गाड़ियों के नंबरों को धान के रेटों के अनुसार शेयर किया जाता है। यदि कोई गाड़ी का नंबर 5500 है तो इसे धान की कीमतें बताकर शेयर किया जाता है। विभाग की तीन गाड़ियां हैं, तीनों के नंबर सभी युवाओं को पता है।
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कैथल से करनाल, कुरुक्षेत्र व पानीपत तक लिंक है ग्रुप
रोडवेज की टिकट जांच टीम से बचने के लिए बेटिकट यात्रियों द्वारा बनाए गए ग्रुप महज कैथल जिले तक सीमित नहीं हैं। यह कैथल से बाहर करनाल, कुरुक्षेत्र व यहां तक की पानीपत तक लिंक है। इस प्रकार से कैथल से मिलने वाली जानकारी सीधा करनाल, कुरुक्षेत्र और पानीपत तक पहुंच जाती है।
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विभाग की ओर से ऐसी लोगों का पता लगाने में काफी प्रयास किए जा रहा है। जिस कारण सुबह व शाम को मैं स्वयं चेकिंग में शामिल होता हूं। इसके साथ ही एक दिन में करीब 6 से घंटे तक लगातार स्टाफ की ओर से चेकिंग की जाती है।
- रामकुमार, जीएम, रोडवेज, कैथल।
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टिकट जांच की टीम की गाड़ियों के नंबरों पर होती है धान के रेटों के माध्यम से बात
कमल बहल
कैथल। हरियाणा रोडवेज में बेटिकट यात्री धान की कीमतों और मौसम के हालात की जानकारी व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर कर रोडवेज को हर रोज हजारों रुपये का चपत लगा रहे हैं। युवाओं ने ऐसे कोडवर्ड बनाए हैं कि समझने वाला इन्हें सामान्य कीमतें व मौसम की जानकारी ही समझता है, लेकिन असल मेें ये रोडवेज की जांच टीमों को लेकर जानकारी है। इसके लिए युवाओं ने व्हाटसएप ग्रुप बना रखे हैं।
रोडवेज में बेटिकट यात्रियों ने बना रखें हैं कोड : रोडवेज की बसों में महज 25 से 50 किलोमीटर की दूरी का सफर तय करने में बेटिकट यात्री चंद रुपये बचाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुपों में अपने-अपने तरीके से कोड बनाकर टिकट जांच टीम से बचने में सफल रहते हैं। इस पर विभाग के आला अधिकारी भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं पा रहे है। वे पूरी तरह से इन ग्रुपों की जानकारी हासिल करने में नाकाम हैं। यहां तक यदि कभी इन व्हाट्सएप ग्रुप का सदस्य टिकट जांच की टीम की पकड़ में आ भी जाता है तो वह अपने मोबाइल को दूसरे यात्रियों के हाथ में दे देता है। ताकि टिकट जांच टीम उस ग्रुप में एडमिन व अन्य सदस्यों की जानकारी हासिल न कर सकें।
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ऐसे होती है टिकट जांच टीम की मुखबिरी : टिकट जांच टीम से बचने के लिए बेटिकट यात्री धान की कीमतों व मौसम के हालात से रूट के साफ होने की जानकारी का पता लगाते हैं। रोडवेज में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बेटिकट यात्रियों द्वारा रोडवेज, मौसम व धान के नामों से कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। उदाहरण के लिए यदि रास्ते में जांच टीम नहीं है तो बताया जाता है कि मौसम साफ है और यदि जांच टीम है तो बताया जाता है कि मौसम खराब है। इसी प्रकार से गाड़ियों के नंबरों को धान के रेटों के अनुसार शेयर किया जाता है। यदि कोई गाड़ी का नंबर 5500 है तो इसे धान की कीमतें बताकर शेयर किया जाता है। विभाग की तीन गाड़ियां हैं, तीनों के नंबर सभी युवाओं को पता है।
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कैथल से करनाल, कुरुक्षेत्र व पानीपत तक लिंक है ग्रुप
रोडवेज की टिकट जांच टीम से बचने के लिए बेटिकट यात्रियों द्वारा बनाए गए ग्रुप महज कैथल जिले तक सीमित नहीं हैं। यह कैथल से बाहर करनाल, कुरुक्षेत्र व यहां तक की पानीपत तक लिंक है। इस प्रकार से कैथल से मिलने वाली जानकारी सीधा करनाल, कुरुक्षेत्र और पानीपत तक पहुंच जाती है।
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विभाग की ओर से ऐसी लोगों का पता लगाने में काफी प्रयास किए जा रहा है। जिस कारण सुबह व शाम को मैं स्वयं चेकिंग में शामिल होता हूं। इसके साथ ही एक दिन में करीब 6 से घंटे तक लगातार स्टाफ की ओर से चेकिंग की जाती है।
- रामकुमार, जीएम, रोडवेज, कैथल।