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बिना हेलमेट युवती की दर्दनाक मौत देख लगा झटका, घर में आई बेटी को देखकर शुरु किया डॉटर विद हेलमेट अभियान
Updated Mon, 28 May 2018 12:00 AM IST
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बिना हेलमेट युवती की दर्दनाक मौत देख लगा झटका, घर में आई बेटी को देखकर शुरू किया डॉटर विद हेलमेट अभियान
डॉटर विद हेलमेट अभियान चलाकर पुलिस कर्मचारी बेटियों को कर रहे हैं जागरूक
बेटियों द्वारा सड़क हादसों में हेलमेट द्वारा जान बचाने के हेलमेट के प्रयोग के लिए लघु नाटक भी बनाया
फोटो नंबर-35,36
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। दोपहिया वाहन चलाने के दौरान हेलमेट का प्रयोग जान बचा सकता है। इसी संदेश के साथ एक पुलिस कर्मचारी जी-जान से जुटा है। इसका कारण भी स्पष्ट है। सड़क हादसों में सिर की चोट के कारण लोगों की जान जाती है। एक युवती की सड़क हादसे में बिना हेलमेट के हुई मौत और उसी दौरान घर में पैदा हुई बेटी को देखकर एक अभियान शुरू किया। सिटी थाना में कार्यरत पीएसआई रामलाल शर्मा सड़क दुघर्टना से बचाव को लेकर डॉटर विद हेलमेट अभियान से बेटियों व लोगों को जागरूक करने की कवायद कर रहे है। शर्मा ने बताया कि वह 2014 में माउंट एवरेस्ट फतेह करने के बाद जब वापिस लौटा तो स्कूल प्रंबधन समितियों द्वारा उन्हें बच्चों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रमों में बुलाया जाने लगा। इसी बीच वर्ष 2016 में उसने मीडिया के माध्यम से सड़क दुर्घटना में हेलमेट न होने की वजह से एक युवती की दर्दनाक मौत के बारे जानकारी मिली। इसके कुछ ही महीनों बाद उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। उनके मन में बेटियों को जागरुक करने की सूझी। इसके बाद से ही बेटियों को जागरूक करने के लिए डॉटर विद हेलमेट अभियान की शुरुआत हुई। इसके बाद वे लगातार बेटियों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूककर रहे हैं।
300 से अधिक हेलमेट भी किए वितरित:-शर्मा ने बताया कि उन्होंने डॅटर विद अभियान की शुरुआत से लेकर अब तक करीब 300 हेलमेट स्कूटी व मोटरसाइकिल चलाने वाली युवतियों को वितरित भी कर चुके है। बॉलीवुड के रिएलटी शो में भी कर चुके काम :-एसआई रामलाल शर्मा ने बताया कि टोहाना निवासी है। जब उन्होंने 2013 में मांउट एवरेस्ट को फतेह किया था। वे बेहद ही गरीब परिवार से है। जब वे माउंट एवरेस्ट फतेह करने की तैयारी कर रहे थे, तो उसके पिता एक रेहड़ी संचालक थे। वे फलों की रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का गुजारा करते थे। जब वह माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतेह कर वापिस लौटे तो मुंबई की रियालिटी शो की कंपनी ने उनकी जीवनी पर शो बनाया जो लगातार एक वर्ष तक चला।
यह उपलब्धियां की हासिल:-रामलाल शर्मा ने माउंट एवरेस्ट फतेह करने के साथ साथ युरोप के माउंट एलब्रुश की चोटी को फतेह भी किया व समुद्र में साइकिलिंग करने का रिकाड़ॱर अपने नाम किया। जिसके बाद उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में भारत गौरव अवार्ड से भी नवाजा गया।
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं अभियान के साथ उन्हें सड़क दुर्घटना सेे भी बचाना जरूरी:-रामलाल शर्मा ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ उन्हें सड़क दुर्घटना सेे भी बचाना जरूरी है। इसे लेकर वह डॉटर विद अभियान चलाकर बेटियों को जागरूक कर रहे हैं। हमारे देश में बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। इसी दिशा में नारी शक्ति की सुरक्षा भी जरूरी है।
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डॉटर विद हेलमेट अभियान चलाकर पुलिस कर्मचारी बेटियों को कर रहे हैं जागरूक
बेटियों द्वारा सड़क हादसों में हेलमेट द्वारा जान बचाने के हेलमेट के प्रयोग के लिए लघु नाटक भी बनाया
फोटो नंबर-35,36
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। दोपहिया वाहन चलाने के दौरान हेलमेट का प्रयोग जान बचा सकता है। इसी संदेश के साथ एक पुलिस कर्मचारी जी-जान से जुटा है। इसका कारण भी स्पष्ट है। सड़क हादसों में सिर की चोट के कारण लोगों की जान जाती है। एक युवती की सड़क हादसे में बिना हेलमेट के हुई मौत और उसी दौरान घर में पैदा हुई बेटी को देखकर एक अभियान शुरू किया। सिटी थाना में कार्यरत पीएसआई रामलाल शर्मा सड़क दुघर्टना से बचाव को लेकर डॉटर विद हेलमेट अभियान से बेटियों व लोगों को जागरूक करने की कवायद कर रहे है। शर्मा ने बताया कि वह 2014 में माउंट एवरेस्ट फतेह करने के बाद जब वापिस लौटा तो स्कूल प्रंबधन समितियों द्वारा उन्हें बच्चों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रमों में बुलाया जाने लगा। इसी बीच वर्ष 2016 में उसने मीडिया के माध्यम से सड़क दुर्घटना में हेलमेट न होने की वजह से एक युवती की दर्दनाक मौत के बारे जानकारी मिली। इसके कुछ ही महीनों बाद उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। उनके मन में बेटियों को जागरुक करने की सूझी। इसके बाद से ही बेटियों को जागरूक करने के लिए डॉटर विद हेलमेट अभियान की शुरुआत हुई। इसके बाद वे लगातार बेटियों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूककर रहे हैं।
300 से अधिक हेलमेट भी किए वितरित:-शर्मा ने बताया कि उन्होंने डॅटर विद अभियान की शुरुआत से लेकर अब तक करीब 300 हेलमेट स्कूटी व मोटरसाइकिल चलाने वाली युवतियों को वितरित भी कर चुके है। बॉलीवुड के रिएलटी शो में भी कर चुके काम :-एसआई रामलाल शर्मा ने बताया कि टोहाना निवासी है। जब उन्होंने 2013 में मांउट एवरेस्ट को फतेह किया था। वे बेहद ही गरीब परिवार से है। जब वे माउंट एवरेस्ट फतेह करने की तैयारी कर रहे थे, तो उसके पिता एक रेहड़ी संचालक थे। वे फलों की रेहड़ी लगाकर अपने परिवार का गुजारा करते थे। जब वह माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतेह कर वापिस लौटे तो मुंबई की रियालिटी शो की कंपनी ने उनकी जीवनी पर शो बनाया जो लगातार एक वर्ष तक चला।
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यह उपलब्धियां की हासिल:-रामलाल शर्मा ने माउंट एवरेस्ट फतेह करने के साथ साथ युरोप के माउंट एलब्रुश की चोटी को फतेह भी किया व समुद्र में साइकिलिंग करने का रिकाड़ॱर अपने नाम किया। जिसके बाद उन्हें भारत सरकार द्वारा वर्ष 2014 में भारत गौरव अवार्ड से भी नवाजा गया।
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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं अभियान के साथ उन्हें सड़क दुर्घटना सेे भी बचाना जरूरी:-रामलाल शर्मा ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के साथ उन्हें सड़क दुर्घटना सेे भी बचाना जरूरी है। इसे लेकर वह डॉटर विद अभियान चलाकर बेटियों को जागरूक कर रहे हैं। हमारे देश में बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। इसी दिशा में नारी शक्ति की सुरक्षा भी जरूरी है।