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Kaithal News: मंडी में खुले आसमान के नीचे पड़ा 1.95 लाख एमटी धान, मौसम ने बढ़ाई चिंता
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अतिरिक्त मंडी में लगे धान के कट्टों के चट्टे। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सरकारी दावों के विपरीत जिले की अनाज मंडियों में धान का उठान सुस्त गति से चल रहा है, जिस कारण आढ़ती और किसान परेशान हैं। अतिरिक्त मंडी में पैर रखने तक की जगह नहीं है, जिसके कारण धान लोड करने आई गाड़ियों को घंटों तक निकलने का रास्ता नहीं मिल पा रहा है। इस अव्यवस्था के बीच मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
करीब 1.95 लाख मीट्रिक टन बिका और बिना बिका धान अभी भी मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। यदि बारिश या मौसम खराब होता है, तो करोड़ों रुपये का धान बर्बाद होने की संभावना है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले की विभिन्न मंडियों में अब तक कुल 7.47 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान की आवक हो चुकी है। इसमें से सरकारी व निजी एजेंसियों 6.70 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद भी कर चुकी है लेकिन समस्या उठान को लेकर आ रही है। अब तक केवल 5.52 लाख एमटी धान का ही उठान संभव हो पाया है। वहीं, सरकार की ओर से अब तक किसानों के खातों में 1300 करोड़ रुपये का भुगतान भेजा जा चुका है।
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पीआर धान की आवक घटी
मंडियों के मौजूदा रुझानों को देखें तो पीआर धान की आवक में अब कमी देखने को मिल रही है। अधिकांश क्षेत्रों में पीआर धान की कटाई लगभग अंतिम चरण में है। वहीं दूसरी ओर, मंडियों में अब बासमती धान की आवक ने रफ्तार पकड़ ली है। अतिरिक्त मंडी के प्रधान रघबीर मलिक का कहना है कि यदि बासमती की आवक के चरम पर पहुंचने से पहले मौजूदा स्टॉक का उठान नहीं किया गया, तो मंडियों में पैर रखने की जगह भी नहीं बचेगी।
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खरीद प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही : डीसी
उपायुक्त अपराजिता ने कहा कि खरीद प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है और संबंधित खरीद एजेंसियों व मंडी सचिवों से नियमित रूप से अपडेट ली जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सरकार और जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि किसानों की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा जाए और खरीदे गए धान का जल्द उठान व समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
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कैथल। सरकारी दावों के विपरीत जिले की अनाज मंडियों में धान का उठान सुस्त गति से चल रहा है, जिस कारण आढ़ती और किसान परेशान हैं। अतिरिक्त मंडी में पैर रखने तक की जगह नहीं है, जिसके कारण धान लोड करने आई गाड़ियों को घंटों तक निकलने का रास्ता नहीं मिल पा रहा है। इस अव्यवस्था के बीच मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।
करीब 1.95 लाख मीट्रिक टन बिका और बिना बिका धान अभी भी मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। यदि बारिश या मौसम खराब होता है, तो करोड़ों रुपये का धान बर्बाद होने की संभावना है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले की विभिन्न मंडियों में अब तक कुल 7.47 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान की आवक हो चुकी है। इसमें से सरकारी व निजी एजेंसियों 6.70 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद भी कर चुकी है लेकिन समस्या उठान को लेकर आ रही है। अब तक केवल 5.52 लाख एमटी धान का ही उठान संभव हो पाया है। वहीं, सरकार की ओर से अब तक किसानों के खातों में 1300 करोड़ रुपये का भुगतान भेजा जा चुका है।
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पीआर धान की आवक घटी
मंडियों के मौजूदा रुझानों को देखें तो पीआर धान की आवक में अब कमी देखने को मिल रही है। अधिकांश क्षेत्रों में पीआर धान की कटाई लगभग अंतिम चरण में है। वहीं दूसरी ओर, मंडियों में अब बासमती धान की आवक ने रफ्तार पकड़ ली है। अतिरिक्त मंडी के प्रधान रघबीर मलिक का कहना है कि यदि बासमती की आवक के चरम पर पहुंचने से पहले मौजूदा स्टॉक का उठान नहीं किया गया, तो मंडियों में पैर रखने की जगह भी नहीं बचेगी।
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खरीद प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही : डीसी
उपायुक्त अपराजिता ने कहा कि खरीद प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है और संबंधित खरीद एजेंसियों व मंडी सचिवों से नियमित रूप से अपडेट ली जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसानों को फसल बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सरकार और जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि किसानों की फसल का एक-एक दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदा जाए और खरीदे गए धान का जल्द उठान व समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।