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90 प्राइवेट अस्पतालों में 200 डॉक्टर काम छोड़कर रहे हड़ताल पर, 10 हजार मरीज हुए प्रभावित
Updated Tue, 02 Jan 2018 11:41 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर नेशनल मेडिकल बिल के विरोध में मंगलवार सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी बंद रही। जिस कारण मरीज काफी परेशान हुए। परेशान मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, जहां भीड़ में खूब धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। हालांकि प्राइवेट अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं चालू रखी गई थीं, लेकिन सर्दी के मौसम में सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को काफी दिक्कतें आईं।
नेशनल मेडिकल बिल के प्रावधानों से है आपत्ति : आर्य अस्पताल में हड़ताल को लेकर जिले के सभी निजी डॉक्टरों की बैठक भी हुई। इस बैठक में सभी डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे आईएमए के जिला प्रधान डा. विजय आर्य ने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नेशनल मेडिकल बिल के विरोध में 12 घंटों की हड़ताल कर काला दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बिल के लागू होने से आयुर्वेदिक, होम्योपैथी के डाक्टरों को कुछ ही समय के प्रशिक्षण के बाद उन्हें एक सामान्य डॉक्टर की उपाधि मिलेगी। जिससे वह किसी भी रोगी का इलाज कर सकेंगे। ऐसा होने पर जनता को काफी परेशानी होगी और उनका ठीक ढंग से इलाज नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही सरकार की ओर से एमबीबीएस कर रहे छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद प्रैक्टिस रजिस्ट्रेशन के लिए परीक्षा देना अनिवार्य होगा। सरकार के इस बिल से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस तरह के कई प्रावधानों का विरोध किया जा रहा है। इसके लिए 12 घंटे की हड़ताल रखी गई है। इस मौके पर डा दीपक गर्ग, राजेश गोयल, नवीन बंसल, आरएस मान, डा जिंदल, डा महेंद्र शाह, डा अशोक सिंघल, डा डीपी गुप्ता, डा संजीव, आशीष गुप्ता, सतीश जिंदल, बलविंद्र जिंदल, डा कीर्ति गर्ग, डा किरण, डा अशोका, डा सुधीर जैन, डा अनुपम, ज्योतिका गर्ग, डा सोनी बंसल सहित अन्य मौजूद रहे।
हड़ताल से लोग परेशान, सरकारी अस्पताल में उमड़ी भीड़ : प्राइवेट अस्पतालों के बंद होने के बाद लोग इलाज के लिए जिला के सरकारी अस्पताल पहुंचे। जहां भीड़ बढ़ जाने से धक्का-मुक्की हुई। सबसे अधिक परेशानी बच्चों का इलाज करवाने के लिए आए लोगों को हुई। गांव पाई के महीपाल सिंह ने बताया कि उसके बेटे हर्ष में खून की कमी है। जिस पर वह सुबह आठ बजे ढांड रोड स्थित एक अस्पताल में पहुंचा था। यहां पर हड़ताल थी तो वह तुरंत सरकारी अस्पताल में आया। लेकिन यहां भीड़ होने के कारण उसने तीन घंटों तक लाइन में लगना पड़ा। काफी कठिनाई हुई।
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गांव कुराड़ से पहुंचे गुरनाम सिंह ने बताया कि वह उसकी छह महीने की बेटी साक्षी का इलाज करवाने के लिए पहले तो एक निजी अस्पताल में गया था। जब उसे हड़ताल की जानकारी मिली तो वह सरकार अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा। लेकिन यहां पर अधिक भीड़ होने के कारण कई घंटों तक चेकअप नहीं हो पाया।
35 किलोमीटर दूर से आया, नहीं हुआ इलाज : जिला जींद के गांव पीपलथा से आए शुभदीप सिंह ने बताया कि वह जिला कोर्ट के पास स्थित स्किन के एक अस्पताल में एलर्जी का इलाज करवाने के लिए आया है। उसे हड़ताल के बारे कोई जानकारी नहीं थी। जिस कारण काफी उसका यहां 35 किलोमीटर दूर से आना व्यर्थ गया।
सरकारी अस्पताल में दोगुनी हुई ओपीडी : निजी अस्पतालों की हड़ताल से जहां इलाज करवाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी। वहीं अन्य दिनों की अपेक्षा मंगलवार को ओपीडी में भारी इजाफा हुआ। मंगलवार को सरकारी अस्पताल में करीब 1200 ओपीडी हुई। जबकि अन्य दिनों में यह ओपीडी 700 के करीब रहती है। बच्चों के इलाज के लिए भी मंगलवार को 200 लोग पहुंचे।
आईएमए से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 90 प्राइवेट अस्पताल हैं, जिनमें 200 चिकित्सक एक दिन में लगभग 10 हजार की ओपीडी निपटाते हैं।
अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सेवा भी बंद : निजी अस्पतालों की हड़ताल के साथ साथ शहर में स्थित अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सुविधा भी बंद रही। जिससे अल्ट्रासाउंड व एक्सरे के लिए पहुंचे लोगों को भी काफी कठिनाई हुई। मरीज सुशील ने बताया कि उसे पत्थरी की शिकायत थी। जिसका अल्ट्रासाउंड करवाना था। लेकिन हड़ताल के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं करवा सका।
इमरजेंसी की सेवाओं पर किए प्रबंध : सीएमओ डा. अशोक चौधरी ने बताया कि निजी अस्पतालों की हड़ताल को लेकर इमरजेंसी सेवा में अतिरिक्त डॉक्टर को तैनात किया गया। इसके साथ ही सभी डॉक्टरों यह निर्देश दिए गए है कि कोई भी डॉक्टर मरीजों की जांच के बिना अपनी छुट्टी न करे।
90 प्राइवेट अस्पतालों में 200 डॉक्टर रहे हड़ताल पर, 10 हजार मरीज हुए प्रभावित
- नेशनल मेडिकल बिल के विरोध में आईएमए की हड़ताल, बंद रही ओपीडी तो सरकारी में उमड़ी मरीजों की भीड़
फोटो नंबर-2 से 6
कैथल। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर नेशनल मेडिकल बिल के विरोध में मंगलवार सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी बंद रही। जिस कारण मरीज काफी परेशान हुए। परेशान मरीज इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे, जहां भीड़ में खूब धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ा। हालांकि प्राइवेट अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं चालू रखी गई थीं, लेकिन सर्दी के मौसम में सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को काफी दिक्कतें आईं।
नेशनल मेडिकल बिल के प्रावधानों से है आपत्ति : आर्य अस्पताल में हड़ताल को लेकर जिले के सभी निजी डॉक्टरों की बैठक भी हुई। इस बैठक में सभी डॉक्टरों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रकट किया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे आईएमए के जिला प्रधान डा. विजय आर्य ने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नेशनल मेडिकल बिल के विरोध में 12 घंटों की हड़ताल कर काला दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बिल के लागू होने से आयुर्वेदिक, होम्योपैथी के डाक्टरों को कुछ ही समय के प्रशिक्षण के बाद उन्हें एक सामान्य डॉक्टर की उपाधि मिलेगी। जिससे वह किसी भी रोगी का इलाज कर सकेंगे। ऐसा होने पर जनता को काफी परेशानी होगी और उनका ठीक ढंग से इलाज नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही सरकार की ओर से एमबीबीएस कर रहे छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद प्रैक्टिस रजिस्ट्रेशन के लिए परीक्षा देना अनिवार्य होगा। सरकार के इस बिल से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस तरह के कई प्रावधानों का विरोध किया जा रहा है। इसके लिए 12 घंटे की हड़ताल रखी गई है। इस मौके पर डा दीपक गर्ग, राजेश गोयल, नवीन बंसल, आरएस मान, डा जिंदल, डा महेंद्र शाह, डा अशोक सिंघल, डा डीपी गुप्ता, डा संजीव, आशीष गुप्ता, सतीश जिंदल, बलविंद्र जिंदल, डा कीर्ति गर्ग, डा किरण, डा अशोका, डा सुधीर जैन, डा अनुपम, ज्योतिका गर्ग, डा सोनी बंसल सहित अन्य मौजूद रहे।
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हड़ताल से लोग परेशान, सरकारी अस्पताल में उमड़ी भीड़ : प्राइवेट अस्पतालों के बंद होने के बाद लोग इलाज के लिए जिला के सरकारी अस्पताल पहुंचे। जहां भीड़ बढ़ जाने से धक्का-मुक्की हुई। सबसे अधिक परेशानी बच्चों का इलाज करवाने के लिए आए लोगों को हुई। गांव पाई के महीपाल सिंह ने बताया कि उसके बेटे हर्ष में खून की कमी है। जिस पर वह सुबह आठ बजे ढांड रोड स्थित एक अस्पताल में पहुंचा था। यहां पर हड़ताल थी तो वह तुरंत सरकारी अस्पताल में आया। लेकिन यहां भीड़ होने के कारण उसने तीन घंटों तक लाइन में लगना पड़ा। काफी कठिनाई हुई।
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गांव कुराड़ से पहुंचे गुरनाम सिंह ने बताया कि वह उसकी छह महीने की बेटी साक्षी का इलाज करवाने के लिए पहले तो एक निजी अस्पताल में गया था। जब उसे हड़ताल की जानकारी मिली तो वह सरकार अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा। लेकिन यहां पर अधिक भीड़ होने के कारण कई घंटों तक चेकअप नहीं हो पाया।
35 किलोमीटर दूर से आया, नहीं हुआ इलाज : जिला जींद के गांव पीपलथा से आए शुभदीप सिंह ने बताया कि वह जिला कोर्ट के पास स्थित स्किन के एक अस्पताल में एलर्जी का इलाज करवाने के लिए आया है। उसे हड़ताल के बारे कोई जानकारी नहीं थी। जिस कारण काफी उसका यहां 35 किलोमीटर दूर से आना व्यर्थ गया।
सरकारी अस्पताल में दोगुनी हुई ओपीडी : निजी अस्पतालों की हड़ताल से जहां इलाज करवाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी। वहीं अन्य दिनों की अपेक्षा मंगलवार को ओपीडी में भारी इजाफा हुआ। मंगलवार को सरकारी अस्पताल में करीब 1200 ओपीडी हुई। जबकि अन्य दिनों में यह ओपीडी 700 के करीब रहती है। बच्चों के इलाज के लिए भी मंगलवार को 200 लोग पहुंचे।
आईएमए से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 90 प्राइवेट अस्पताल हैं, जिनमें 200 चिकित्सक एक दिन में लगभग 10 हजार की ओपीडी निपटाते हैं।
अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सेवा भी बंद : निजी अस्पतालों की हड़ताल के साथ साथ शहर में स्थित अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सुविधा भी बंद रही। जिससे अल्ट्रासाउंड व एक्सरे के लिए पहुंचे लोगों को भी काफी कठिनाई हुई। मरीज सुशील ने बताया कि उसे पत्थरी की शिकायत थी। जिसका अल्ट्रासाउंड करवाना था। लेकिन हड़ताल के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं करवा सका।
इमरजेंसी की सेवाओं पर किए प्रबंध : सीएमओ डा. अशोक चौधरी ने बताया कि निजी अस्पतालों की हड़ताल को लेकर इमरजेंसी सेवा में अतिरिक्त डॉक्टर को तैनात किया गया। इसके साथ ही सभी डॉक्टरों यह निर्देश दिए गए है कि कोई भी डॉक्टर मरीजों की जांच के बिना अपनी छुट्टी न करे।
90 प्राइवेट अस्पतालों में 200 डॉक्टर रहे हड़ताल पर, 10 हजार मरीज हुए प्रभावित
- नेशनल मेडिकल बिल के विरोध में आईएमए की हड़ताल, बंद रही ओपीडी तो सरकारी में उमड़ी मरीजों की भीड़
फोटो नंबर-2 से 6