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सीधी दिल्ली रेलसेवा में सफर करना परेशानी का सबब
Updated Sun, 05 Nov 2017 12:10 AM IST
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सीधी दिल्ली रेलसेवा में सफर करना परेशानी का सबब
सभी कोचों के शौचालयों को वेल्डिंग करके किया हुआ है बंद, लोगों को होती हैं भारी परेशानियां
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
तीन साल पहले शुरू हुई नई दिल्ली तक की सीधी रेलसेवा अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। लोगों को इसमें मजबूरन सफर भी करना पड़ता है, लेकिन जनसुविधाओं व टूट-फूट के कारण यात्री परेशान हैं। इसके शौचालयों को वेल्डिंग करके बंद किया हुआ है। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। सर्द मौसम में हवाओं के कारण अधिकतर यात्री परेशान रहते हैं। बार-बार मांग के बावजूद इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
लंबी मांग के बाद करीब 3 साल पहले कुरुक्षेत्र से दिल्ली वाया कैथल सुबह एक ट्रेन शुरू हुई थी। तीन साल पहले तत्कालीन सांसद नवीन जिंदल ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। लोगों में खुशी तो थी ही, साथ में कैथल से नरवाना, जींद, उचाना, रोहतक सहित नई दिल्ली तक करीब 32 जगह ठहराव से लोगों को इन क्षेत्रों में आने-जाने की सुविधा भी मिली थी।
सुविधा बनी दुविधा : ट्रेन सुबह 6 बजे कैथल रेलवे स्टेशन पर पहुंचती है। यहां कुरुक्षेत्र जाने वाली ट्रेन की क्रॉसिंग होती है। कैथल से चलकर दिल्ली तक करीब 6 घंटे लंबा सफर है। इस दौरान यदि किसी को शौचालय जाने की इच्छा हो जाए तो उसे उस स्टेशन का इंतजार करना पड़ेगा, जहां इस ट्रेन का ठहराव 10 मिनट से ज्यादा का है। इसके अंदर सभी शौचालयों को वेल्डिंग करके बंद किया हुआ है। यात्री आढ़ती पवन कुमार आर्य, रोहतक जाने वाले राजकुमार ने कहा कि इस सुविधा का ध्यान रखा जाए। इसके सभी शौचालयों पर लगे वोल्डिंग सील तुड़वाकर इसे खोला जाए। ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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ट्रेन के कोचों की खिड़कियां टूटीं, सर्द मौसम में यात्रा करना मुश्किल : तीन साल में ही इस ट्रेन की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। सुबह 6 बजे मौसम में ठंड होती है। सुबह के समय लोगों को भीड़ के चलते सीट मुश्किल से मिलती है। बाद में यदि टूटी हुई खिड़की के निकट बैठे हैं तो गंतव्य तक उन्हें उसी ठंड में बैठे रहना पड़ता है।
ओ भई ए ता ए सी आ...: सुबह के समय यात्रा कर रहे बुजुर्ग निहाल सिंह ने कहा कि खिड़की टूटी हुई हैं। ओ भई ए ता ऐसी आ...पर हुण ठंड आ गई ए..। एस ए सी नू बंद कर देणा चाइदा।
सुविधाओं पर ध्यान दे रेलवे : लेक्चरर सुरेंद्र सैनी ने कहा कि इस क्षेत्र की जनता के लिए यह सस्ता व सुबह के समय सुलभ यातायात का साधन है। इसमें सुविधाओं का ध्यान दिया जाना चाहिए। इसी समय में दिल्ली से कुरुक्षेत्र के लिए भी एक ट्रेन चलनी चाहिए। ताकि सुबह यदि दिल्ली क्षेत्र से आना चाहे तो वह जल्दी अपने गंतव्य पर आ सके।
टिकट काटने के लिए एक कर्मचारी, दो ट्रेनों का समय एक साथ होने के कारण होती है परेशानी : रेलवे स्टेशन पर टिकट के लिए महज एक खिड़की है। जहां सुबह केवल एक कर्मचारी की ड्यूटी लगती है। कई बार नए स्टेशन पर दिल्ली तक के लिए टिकट नहीं मिलती तो यहां से चढ़ने वाले यात्रियों को भी बड़े स्टेशन से जाकर टिकट लेनी पड़ती है। लेकिन यहां केवल एक कर्मचारी होने के कारण न केवल कर्मचारी बल्कि लोगों को परेशानी होती है। कई बार यात्रियों को बेटिकट यात्रा के लिए भी मजबूर होना पड़ता है। जब लाइन में काफी संख्या में लोग लगे हों। ऐसे में लोगों की मांग है कि यहां दो खिड़की बनाई जाएं और कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जाए।
रेलयात्री कल्याण समिति के संयोजक सतपाल गुप्ता ने कहा कि उन्होंने बंद पड़े शौचालयों के लिए रेलवे को पत्र लिखा था, पत्र का जवाब आया कि ट्रेन के शौचालयों को खोल दिया गया है। लेकिन अभी तक उन्हें खोला नहीं। जिससे यात्री परेशान हैं। रेलवे स्टेशन पर भी दिक्कतें हैं। लेकिन रेलवे अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
रेलवे स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह ने कहा कि टिकट संबंधी लोगों की मांग है। इसके समाधान के लिए काम चल रहा है। ट्रेन में शौचालय खोले जाने संबंधी मामला उच्चाधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
सांसद राजकुमार सैनी ने कहा कि शीघ्र ही इन समस्याओं के संबंध में आला अधिकारियों को पत्र लिखकर समाधान करवाया जाएगा।
5 बजे कुरुक्षेत्र से चलकर 11 बजे दिल्ली पहुंचने तक के 6 घंटे के सफर में जनसुविधाओं की मांग
तीन साल पहले चली ट्रेन की खिड़कियों के टूटे हुए हैं शीशे, सुबह के समय सर्द हवाओं के बीच सफर करते हैं यात्री
कहा-मजबूरी है, एकमात्र ट्रेन शुरू हुई थी, रेलवे का इस ओर नहीं है ध्यान
रेलवे स्टेशन पर टिकट काटने के लिए सुबह विंडो पर महज एक कर्मचारी, कई यात्रियों को करनी पड़ती है बिना टिकट यात्रा
फोटो संख्या-6, 7, 8, 9, 10, 11, 12
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सभी कोचों के शौचालयों को वेल्डिंग करके किया हुआ है बंद, लोगों को होती हैं भारी परेशानियां
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
तीन साल पहले शुरू हुई नई दिल्ली तक की सीधी रेलसेवा अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। लोगों को इसमें मजबूरन सफर भी करना पड़ता है, लेकिन जनसुविधाओं व टूट-फूट के कारण यात्री परेशान हैं। इसके शौचालयों को वेल्डिंग करके बंद किया हुआ है। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। सर्द मौसम में हवाओं के कारण अधिकतर यात्री परेशान रहते हैं। बार-बार मांग के बावजूद इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
लंबी मांग के बाद करीब 3 साल पहले कुरुक्षेत्र से दिल्ली वाया कैथल सुबह एक ट्रेन शुरू हुई थी। तीन साल पहले तत्कालीन सांसद नवीन जिंदल ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। लोगों में खुशी तो थी ही, साथ में कैथल से नरवाना, जींद, उचाना, रोहतक सहित नई दिल्ली तक करीब 32 जगह ठहराव से लोगों को इन क्षेत्रों में आने-जाने की सुविधा भी मिली थी।
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सुविधा बनी दुविधा : ट्रेन सुबह 6 बजे कैथल रेलवे स्टेशन पर पहुंचती है। यहां कुरुक्षेत्र जाने वाली ट्रेन की क्रॉसिंग होती है। कैथल से चलकर दिल्ली तक करीब 6 घंटे लंबा सफर है। इस दौरान यदि किसी को शौचालय जाने की इच्छा हो जाए तो उसे उस स्टेशन का इंतजार करना पड़ेगा, जहां इस ट्रेन का ठहराव 10 मिनट से ज्यादा का है। इसके अंदर सभी शौचालयों को वेल्डिंग करके बंद किया हुआ है। यात्री आढ़ती पवन कुमार आर्य, रोहतक जाने वाले राजकुमार ने कहा कि इस सुविधा का ध्यान रखा जाए। इसके सभी शौचालयों पर लगे वोल्डिंग सील तुड़वाकर इसे खोला जाए। ताकि लोगों को परेशानी न हो।
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ट्रेन के कोचों की खिड़कियां टूटीं, सर्द मौसम में यात्रा करना मुश्किल : तीन साल में ही इस ट्रेन की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। सुबह 6 बजे मौसम में ठंड होती है। सुबह के समय लोगों को भीड़ के चलते सीट मुश्किल से मिलती है। बाद में यदि टूटी हुई खिड़की के निकट बैठे हैं तो गंतव्य तक उन्हें उसी ठंड में बैठे रहना पड़ता है।
ओ भई ए ता ए सी आ...: सुबह के समय यात्रा कर रहे बुजुर्ग निहाल सिंह ने कहा कि खिड़की टूटी हुई हैं। ओ भई ए ता ऐसी आ...पर हुण ठंड आ गई ए..। एस ए सी नू बंद कर देणा चाइदा।
सुविधाओं पर ध्यान दे रेलवे : लेक्चरर सुरेंद्र सैनी ने कहा कि इस क्षेत्र की जनता के लिए यह सस्ता व सुबह के समय सुलभ यातायात का साधन है। इसमें सुविधाओं का ध्यान दिया जाना चाहिए। इसी समय में दिल्ली से कुरुक्षेत्र के लिए भी एक ट्रेन चलनी चाहिए। ताकि सुबह यदि दिल्ली क्षेत्र से आना चाहे तो वह जल्दी अपने गंतव्य पर आ सके।
टिकट काटने के लिए एक कर्मचारी, दो ट्रेनों का समय एक साथ होने के कारण होती है परेशानी : रेलवे स्टेशन पर टिकट के लिए महज एक खिड़की है। जहां सुबह केवल एक कर्मचारी की ड्यूटी लगती है। कई बार नए स्टेशन पर दिल्ली तक के लिए टिकट नहीं मिलती तो यहां से चढ़ने वाले यात्रियों को भी बड़े स्टेशन से जाकर टिकट लेनी पड़ती है। लेकिन यहां केवल एक कर्मचारी होने के कारण न केवल कर्मचारी बल्कि लोगों को परेशानी होती है। कई बार यात्रियों को बेटिकट यात्रा के लिए भी मजबूर होना पड़ता है। जब लाइन में काफी संख्या में लोग लगे हों। ऐसे में लोगों की मांग है कि यहां दो खिड़की बनाई जाएं और कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ाई जाए।
रेलयात्री कल्याण समिति के संयोजक सतपाल गुप्ता ने कहा कि उन्होंने बंद पड़े शौचालयों के लिए रेलवे को पत्र लिखा था, पत्र का जवाब आया कि ट्रेन के शौचालयों को खोल दिया गया है। लेकिन अभी तक उन्हें खोला नहीं। जिससे यात्री परेशान हैं। रेलवे स्टेशन पर भी दिक्कतें हैं। लेकिन रेलवे अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
रेलवे स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह ने कहा कि टिकट संबंधी लोगों की मांग है। इसके समाधान के लिए काम चल रहा है। ट्रेन में शौचालय खोले जाने संबंधी मामला उच्चाधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में आता है।
सांसद राजकुमार सैनी ने कहा कि शीघ्र ही इन समस्याओं के संबंध में आला अधिकारियों को पत्र लिखकर समाधान करवाया जाएगा।
5 बजे कुरुक्षेत्र से चलकर 11 बजे दिल्ली पहुंचने तक के 6 घंटे के सफर में जनसुविधाओं की मांग
तीन साल पहले चली ट्रेन की खिड़कियों के टूटे हुए हैं शीशे, सुबह के समय सर्द हवाओं के बीच सफर करते हैं यात्री
कहा-मजबूरी है, एकमात्र ट्रेन शुरू हुई थी, रेलवे का इस ओर नहीं है ध्यान
रेलवे स्टेशन पर टिकट काटने के लिए सुबह विंडो पर महज एक कर्मचारी, कई यात्रियों को करनी पड़ती है बिना टिकट यात्रा
फोटो संख्या-6, 7, 8, 9, 10, 11, 12