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Kaithal News: आसमान तले 17,500 एमटी गेहूं, तिरपाल सहारा
Wed, 08 Apr 2026 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 08 Apr 2026 02:03 AM IST
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नई अनाज मंडी में तिरपाल से ढकी गेहूं की ढेरियां। संवाद
- फोटो : संगठन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होते ही मंडियों में अव्यवस्थाएं सामने आने लगी हैं। करीब 17,500 मीट्रिक टन गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। फसल को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल सहारा है।
दरअसल, एक ओर जहां गेहूं की आवक तेज हो गई है, वहीं खरीद की सुस्त रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के 42 मंडी केंद्रों पर करीब 22 हजार मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, लेकिन अब तक केवल 4,500 मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है।
मंगलवार दोपहर बाद हुई हल्की बारिश ने प्रशासन और खरीद एजेंसियों की तैयारियों की पोल खोल दी। हालांकि गेहूं को तिरपाल से ढककर नमी से बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन किसानों का कहना है कि यदि तेज बारिश हुई तो यह व्यवस्था नाकाफी साबित होगी और हजारों क्विंटल अनाज खराब होने का खतरा है।
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प्रशासन ने जिले में 42 खरीद केंद्र तो स्थापित कर दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समन्वय की कमी साफ नजर आ रही है। मौसम खराब होने की स्थिति में गेहूं को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल किसान अपनी फसल के जल्द तौल होने का इंतजार कर रहे हैं।
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कैथल। गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होते ही मंडियों में अव्यवस्थाएं सामने आने लगी हैं। करीब 17,500 मीट्रिक टन गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। फसल को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल सहारा है।
दरअसल, एक ओर जहां गेहूं की आवक तेज हो गई है, वहीं खरीद की सुस्त रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के 42 मंडी केंद्रों पर करीब 22 हजार मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, लेकिन अब तक केवल 4,500 मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है।
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मंगलवार दोपहर बाद हुई हल्की बारिश ने प्रशासन और खरीद एजेंसियों की तैयारियों की पोल खोल दी। हालांकि गेहूं को तिरपाल से ढककर नमी से बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन किसानों का कहना है कि यदि तेज बारिश हुई तो यह व्यवस्था नाकाफी साबित होगी और हजारों क्विंटल अनाज खराब होने का खतरा है।
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प्रशासन ने जिले में 42 खरीद केंद्र तो स्थापित कर दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समन्वय की कमी साफ नजर आ रही है। मौसम खराब होने की स्थिति में गेहूं को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन सकता है। फिलहाल किसान अपनी फसल के जल्द तौल होने का इंतजार कर रहे हैं।