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बदहाली का दंश झेल रहा शहीद ऊधम सिंह पार्क
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कैथल। शहर के माता गेट स्थित करोड़ों रुपये की लागत से बना पार्क बदहाल हो चुका है। जिससे यहां पर सैर के लिए आने वाले लोग परेशान हैं। पार्क में स्ट्रीट लाइट, सफाई व्यवस्था से लेकर शौचालयों की हालत खस्ता हो चुकी है। लेकिन नप के अधिकारी इस समस्या पर आंखें मूंदकर बैठे हैं। करीब एक वर्ष पहले लाखों रुपये से पार्क का जीर्णोद्घार हुआ था परंतु उसके बाद स्थिति ज्यों की त्यों है। इसके साथ ही यहां पर न माली है और न ही कोई चौकीदार। जिस कारण पार्क में लगातार चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं और शरारती तत्व भी पार्क को नुकसान पहुंचाने से पीछे नहीं हट रहे।
स्टील के दोनों गेट तोड़ने का प्रयास, कभी भी हो सकती है चोरी:
पार्क में सैर करने के लिए पहुंचे दीपक सुखीजा ने बताया कि पार्क के दोनों मुख्य गेट को तोड़ने का प्रयास किया गया है, जिसके बाद से यह खुल गए हैं। अब लोग अपनी मोटरसाइकिलों को पार्क के अंदर ले जाते हैं। इसके साथ ही यहां पर पशु भी आ जाते हैं। जिससे सैर करने के लिए आने वाले लोगों को उनके द्वारा हमला करने का भय बना रहता है।
सारी स्ट्रीट लाइटें टूटी हुई हैं:
माता गेट निवासी महिला आशा ने बताया कि पार्क में लाइटों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यहां पर एक ही हाई मास्क लाइट जलती है, जो पूरे पार्क को रोशन करती है। जबकि पार्क में लगी अन्य लाइटें पिछले आठ महीनों से खराब हैं। जिसकी किसी ने कोई सुधि नहीं ली। इसके साथ ही पार्क में स्थित शौचालयों की हालत भी खस्ता है और यहां पर भी शरारती तत्वों ने तोड़फोड़ की है।
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समाजसेवी अश्वनी हतवाल ने कहा कि यहां पर कुछ दिन पूर्व ही पार्क में लगे मुख्य द्वार को तोड़कर चोरी करने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही यहां पर कुछ दिन पहले झूले भी चोरी हो चुके हैं जिस पर नप के अधिकारियों ने पुलिस में शिकायत तक नहीं दी है। नप की लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बने पार्क की हालत खस्ता है। ईओ को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण टर्मिनेट करना चाहिए।
कोई भी माली नहीं है पार्क में:
नानकपुरी कॉलोनी निवासी सुनील कुमार ने बताया कि पार्क में माली भी नहीं है। जिस कारण यहां पर सैर करने का रास्ता तक नहीं बचा है। लोगों को सैर करने के लिए ट्रैक पर दौड़ते समय भी हाथों से ट्रैक पर आई झाड़ियों को हटाना पड़ता है। कम से कम यहां पर एक माली रखा जाए तो पार्क में उगी घास व अन्य पौधों की रखवाली हो पाएगी। इसके साथ ही यहां कुछ महीने पहले शुरू हुए फव्वारें भी बंद हो चुके हैं।
पार्षद निशा गर्ग ने कहा कि पिछले साल करीब 20 लाख रुपये की लागत से पार्क में सुधार कार्य करवाए गए थे। लेकिन करीब दस महीनों के बाद स्थिति पहले जैसी हो गई है। यह सब नगर परिषद में बैठे अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुआ है। यदि नप के अधिकारी अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करें तो यह समस्या दोबारा न होती। करीब तीन महीने तक चौकीदार को नौकरी पर रख जेब से वेतन भी दिया है।
ईओ अशोक हुड़िया ने कहा कि पार्क को लेकर आवश्यक जानकारी जुटाने के बाद सुधार के निर्देश दिए जाएंगे।
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स्टील के दोनों गेट तोड़ने का प्रयास, कभी भी हो सकती है चोरी:
पार्क में सैर करने के लिए पहुंचे दीपक सुखीजा ने बताया कि पार्क के दोनों मुख्य गेट को तोड़ने का प्रयास किया गया है, जिसके बाद से यह खुल गए हैं। अब लोग अपनी मोटरसाइकिलों को पार्क के अंदर ले जाते हैं। इसके साथ ही यहां पर पशु भी आ जाते हैं। जिससे सैर करने के लिए आने वाले लोगों को उनके द्वारा हमला करने का भय बना रहता है।
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सारी स्ट्रीट लाइटें टूटी हुई हैं:
माता गेट निवासी महिला आशा ने बताया कि पार्क में लाइटों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यहां पर एक ही हाई मास्क लाइट जलती है, जो पूरे पार्क को रोशन करती है। जबकि पार्क में लगी अन्य लाइटें पिछले आठ महीनों से खराब हैं। जिसकी किसी ने कोई सुधि नहीं ली। इसके साथ ही पार्क में स्थित शौचालयों की हालत भी खस्ता है और यहां पर भी शरारती तत्वों ने तोड़फोड़ की है।
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समाजसेवी अश्वनी हतवाल ने कहा कि यहां पर कुछ दिन पूर्व ही पार्क में लगे मुख्य द्वार को तोड़कर चोरी करने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही यहां पर कुछ दिन पहले झूले भी चोरी हो चुके हैं जिस पर नप के अधिकारियों ने पुलिस में शिकायत तक नहीं दी है। नप की लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बने पार्क की हालत खस्ता है। ईओ को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण टर्मिनेट करना चाहिए।
कोई भी माली नहीं है पार्क में:
नानकपुरी कॉलोनी निवासी सुनील कुमार ने बताया कि पार्क में माली भी नहीं है। जिस कारण यहां पर सैर करने का रास्ता तक नहीं बचा है। लोगों को सैर करने के लिए ट्रैक पर दौड़ते समय भी हाथों से ट्रैक पर आई झाड़ियों को हटाना पड़ता है। कम से कम यहां पर एक माली रखा जाए तो पार्क में उगी घास व अन्य पौधों की रखवाली हो पाएगी। इसके साथ ही यहां कुछ महीने पहले शुरू हुए फव्वारें भी बंद हो चुके हैं।
पार्षद निशा गर्ग ने कहा कि पिछले साल करीब 20 लाख रुपये की लागत से पार्क में सुधार कार्य करवाए गए थे। लेकिन करीब दस महीनों के बाद स्थिति पहले जैसी हो गई है। यह सब नगर परिषद में बैठे अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुआ है। यदि नप के अधिकारी अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करें तो यह समस्या दोबारा न होती। करीब तीन महीने तक चौकीदार को नौकरी पर रख जेब से वेतन भी दिया है।
ईओ अशोक हुड़िया ने कहा कि पार्क को लेकर आवश्यक जानकारी जुटाने के बाद सुधार के निर्देश दिए जाएंगे।