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मुख्यमंत्री सहित स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी व सीएमओ को भेजा लीगल नोटिस
Updated Sun, 07 Jan 2018 11:33 PM IST
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बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर सीएम और स्वास्थ्य मंत्री, एसीएस और सीएमओ को भेजा नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सीएम विंडो सहित कई अन्य माध्यमों से गुहार लगाने के बावजूद गांव बालू की पीएचसी के खाली पड़े 25 में से 22 पदों को ना भरे जाने पर अब गांव बालू के लोगों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, स्वास्थ्य विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी और सीएमओ कैथल को लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में 15 दिन में सभी रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग की गई है। यदि पद नहीं भरते हैं तो नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगली कानूनी कार्रवाई के लिए सभी लोग खुद जिम्मेवार होंगे। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रदीप कुमार रापड़िया के माध्यम से यह नोटिस भेजा।
ग्रामीण गुरदेव सिंह (45), मंगत (62), जयबीर (32), डिंपल (46), कुलदीप (32), संतो (65), दरिया (65), जिला (62), गोबंद(30), गजे सिंह (65), रामफल (60), कृष्ण (26) व रेखा (25) ने यह नोटिस भेजा। इनमें अधिकतर बुजुर्ग और महिलाएं हैं। साथ ही 3 विकलांग भी शामिल हैं।
नोटिस में कहा-सीएम विंडो पर भी नहीं हुई सुनवाई
नोटिस में लोगों ने वकील के माध्यम से कहा कि उन्होंने सीएम विंडो में शिकायत देकर मांग की थी कि गांव बालू की पीएचसी मेें डॉक्टरों के पद भरे जाएं। यहां 25 में से 22 पद खाली हैं। जो तीन भरे हुए हैं, उनमें एक भी डॉक्टर नहीं है। यही हाल कलायत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है। साथ ही कैथल के जिला अस्पताल में भी 36 डॉक्टरों के पद खाली हैं। गांव के गरीब लोगों, बुजुर्गों व महिलाओं को विभिन्न बीमारियों के लिए इलाज नहीं मिलता तो उन्हें 22 किलोमीटर दूर स्थित निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ता है। स्वास्थ्य बुनियादी जरूरत व मौलिक अधिकार है। इसीलिए आग्रह है कि यह लीगल नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर अंदर गांव बालू की पीएचसी सहित आसपास के गांवों के अस्पतालों व जिला अस्पताल में भी आवश्यक स्टाफ उपलब्ध करवाया जाए। अन्यथा अगली कानूनी कार्रवाई के लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगे। अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया ने कहा कि स्वास्थ्य लोगों का मौलिक अधिकार है। इसके लिए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी अमित झा और कैथल सीएमओ को लीगल नोटिस भेजा गया है।
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गांव बालू पीएचसी, कलायत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कैथल जिला अस्पताल में चिकित्सकों के खाली पड़े पदों को 15 दिन में भरने का नोटिस
गांव बालू के बुजुर्गों, महिलाओं और तीन विकलांग लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रदीप रापड़िया के माध्यम से नोटिस दिया
सीएम विंडो सहित कई जगह गुहार लगाए जाने के बावजूद बालू पीएचसी में नहीं मिल पा रही सुविधाएं
फोटो संख्या-39 व 40
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सीएम विंडो सहित कई अन्य माध्यमों से गुहार लगाने के बावजूद गांव बालू की पीएचसी के खाली पड़े 25 में से 22 पदों को ना भरे जाने पर अब गांव बालू के लोगों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, स्वास्थ्य विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी और सीएमओ कैथल को लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में 15 दिन में सभी रिक्त पड़े पदों को भरने की मांग की गई है। यदि पद नहीं भरते हैं तो नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगली कानूनी कार्रवाई के लिए सभी लोग खुद जिम्मेवार होंगे। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रदीप कुमार रापड़िया के माध्यम से यह नोटिस भेजा।
ग्रामीण गुरदेव सिंह (45), मंगत (62), जयबीर (32), डिंपल (46), कुलदीप (32), संतो (65), दरिया (65), जिला (62), गोबंद(30), गजे सिंह (65), रामफल (60), कृष्ण (26) व रेखा (25) ने यह नोटिस भेजा। इनमें अधिकतर बुजुर्ग और महिलाएं हैं। साथ ही 3 विकलांग भी शामिल हैं।
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नोटिस में कहा-सीएम विंडो पर भी नहीं हुई सुनवाई
नोटिस में लोगों ने वकील के माध्यम से कहा कि उन्होंने सीएम विंडो में शिकायत देकर मांग की थी कि गांव बालू की पीएचसी मेें डॉक्टरों के पद भरे जाएं। यहां 25 में से 22 पद खाली हैं। जो तीन भरे हुए हैं, उनमें एक भी डॉक्टर नहीं है। यही हाल कलायत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है। साथ ही कैथल के जिला अस्पताल में भी 36 डॉक्टरों के पद खाली हैं। गांव के गरीब लोगों, बुजुर्गों व महिलाओं को विभिन्न बीमारियों के लिए इलाज नहीं मिलता तो उन्हें 22 किलोमीटर दूर स्थित निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ता है। स्वास्थ्य बुनियादी जरूरत व मौलिक अधिकार है। इसीलिए आग्रह है कि यह लीगल नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर अंदर गांव बालू की पीएचसी सहित आसपास के गांवों के अस्पतालों व जिला अस्पताल में भी आवश्यक स्टाफ उपलब्ध करवाया जाए। अन्यथा अगली कानूनी कार्रवाई के लिए आप स्वयं जिम्मेवार होंगे। अधिवक्ता प्रदीप रापड़िया ने कहा कि स्वास्थ्य लोगों का मौलिक अधिकार है। इसके लिए मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी अमित झा और कैथल सीएमओ को लीगल नोटिस भेजा गया है।
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गांव बालू पीएचसी, कलायत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और कैथल जिला अस्पताल में चिकित्सकों के खाली पड़े पदों को 15 दिन में भरने का नोटिस
गांव बालू के बुजुर्गों, महिलाओं और तीन विकलांग लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रदीप रापड़िया के माध्यम से नोटिस दिया
सीएम विंडो सहित कई जगह गुहार लगाए जाने के बावजूद बालू पीएचसी में नहीं मिल पा रही सुविधाएं
फोटो संख्या-39 व 40