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क्लोरीन के 75 नमूने फेल, दूषित पानी पीने से फैल सकती हैं बीमारियां
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कैथल। जिले में जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्लाई किए जा रहे पेयजल में क्लोरीन की मात्रा कम है। यह बात स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सर्वे में सामने आई है। जिसमें जनस्वास्थ्य विभाग के क्लोरीन मिक्स करने के प्वाइंट्स से लिए गए पानी के 75 सैंपल फेल पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग के ऐसे 593 प्वाइंट्स का सर्वे करवाया है, जहां अस्वच्छता का आलम है। यदि इसे ठीक नहीं किया गया तो कई तरह की बीमारियां फैल सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गर्मियों में अधिकतर बीमारियों का कारण पानी रहता है। जिस कारण विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग के उन 593 प्वाइंट्स का सर्वे करवाया। जहां पानी में क्लोरीन डाला जाता है। रिपोर्ट में सभी जगह अस्वच्छता का आलम पाया गया है। इन सभी प्वाइंट्स पर साफ-सफाई की आवश्यकता है। कई जगह पाइप में जंग लगी हुई है। इसके अलावा भी गंदगी का माहौल है। सीवन में तो गंदे पानी के बीच में पेयजल का ट्यूबवेल लगा हुआ है। जहां से पीने का पानी सप्लाई होता है।
दूषित पेयजल से हो सकती हैं ये बीमारियां : ऐसे दूषित पेयजल पीने से उल्टी-दस्त, डायरिया, पेचिस, टाईफाइड, पीलिया जैसे रोग हो सकते हैं। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में यह सर्वे करवाया है।
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सीएमओ डॉ. सुरेंद्र नैन ने बताया कि विभाग द्वारा क्लोरीन के लिए गए सैंपलों में से 75 सैंपल फेल पाए गए हैं। इसके अलावा कई जगह अस्वच्छता पाई गई। जिस पर विभाग के अधीक्षक अभियंता के साथ बैठक की गई। जिसमें विभाग के एक्सईएन व जेई स्तर के अधिकारियों ने भी भाग लिया। अधिकारियों से आग्रह किया गया कि पेयजल की इस स्थिति में सुधार किया जाए। ताकि लोगों को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सके।
जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता वीके गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने खुद की सैंपलिंग की है। अभी दोनों विभागों की ज्वाइंट सैंपलिंग होनी है। तभी पता चलेगा कि सैंपल फेल हैं या नहीं। जहां भी डोजर खराब मिले हैं, उन्हें भी ठीक करवाया जा रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गर्मियों में अधिकतर बीमारियों का कारण पानी रहता है। जिस कारण विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग के उन 593 प्वाइंट्स का सर्वे करवाया। जहां पानी में क्लोरीन डाला जाता है। रिपोर्ट में सभी जगह अस्वच्छता का आलम पाया गया है। इन सभी प्वाइंट्स पर साफ-सफाई की आवश्यकता है। कई जगह पाइप में जंग लगी हुई है। इसके अलावा भी गंदगी का माहौल है। सीवन में तो गंदे पानी के बीच में पेयजल का ट्यूबवेल लगा हुआ है। जहां से पीने का पानी सप्लाई होता है।
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दूषित पेयजल से हो सकती हैं ये बीमारियां : ऐसे दूषित पेयजल पीने से उल्टी-दस्त, डायरिया, पेचिस, टाईफाइड, पीलिया जैसे रोग हो सकते हैं। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में यह सर्वे करवाया है।
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सीएमओ डॉ. सुरेंद्र नैन ने बताया कि विभाग द्वारा क्लोरीन के लिए गए सैंपलों में से 75 सैंपल फेल पाए गए हैं। इसके अलावा कई जगह अस्वच्छता पाई गई। जिस पर विभाग के अधीक्षक अभियंता के साथ बैठक की गई। जिसमें विभाग के एक्सईएन व जेई स्तर के अधिकारियों ने भी भाग लिया। अधिकारियों से आग्रह किया गया कि पेयजल की इस स्थिति में सुधार किया जाए। ताकि लोगों को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सके।
जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता वीके गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने खुद की सैंपलिंग की है। अभी दोनों विभागों की ज्वाइंट सैंपलिंग होनी है। तभी पता चलेगा कि सैंपल फेल हैं या नहीं। जहां भी डोजर खराब मिले हैं, उन्हें भी ठीक करवाया जा रहा है।