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एसडीओ-नगर पालिका सचिव के ऑडियो में जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय को गिराने की धमकी...
Updated Thu, 10 May 2018 11:28 PM IST
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एसडीओ-नगर पालिका सचिव के ऑडियो में जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय को गिराने की धमकी...
एसडीओ को विधायक के भाई का नाम लेकर धमका रहे हैं नगर पालिका सचिव
विधायक के कथित ठेकेदार भाई को पानी न देने वाले एसडीओ पर कार्यालय में हमले का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
गुहला-चीका के जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ व नगर पालिका सचिव के बीच हुए विवाद के बीच वायरल हुआ ऑडियो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर पालिका सचिव एसडीओ को सीधे तौर पर विधायक, विधायक के भाई का नाम लेते हुए धमकाते हुए सुना जा रहा है। सचिव का कहना है कि वे केवल जनहित के लिए पानी की मांग कर रहे थे।
विदित रहे कि दो दिन पूर्व जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ पर उनके कार्यालय में हमला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने एसडीओ की शिकायत पर नगर पालिका सचिव व दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद अब एक ऑडियो वायरल हुआ है। नगर पालिका सचिव के एक मिनट 36 सेकंड के ऑडियो में एसडीओ को धमकाते हुए सुन रहे हैं। नगर पालिका सचिव ऑडियो में सीधा कह रहे हैं कि सरकार का काम चल रहा है। इसीलिए पानी दे दीजिए। विधायक के भाई को ही जरूरत है। जबकि एसडीओ कह रहे हैं कि वे ठेकेदार को पानी नहीं दे सकते।
विधायक के नाम से कार्यालय को गिराने तक की धमकी दी:-ऑडियो में नगर पालिका सचिव ने स्पष्ट कहा कि एसडीओ साहब जिस जमीन में आप बैठो हो, वह नगर पालिका चीका की है। विधायक के भाई ने कहा है। वेदपाल जी भाई है, जिस जमीन में आप बैठो हो, वह नगर पालिका चीका है। विधायक जी ने मुझे टाइट कर कहा है यार.., उन्होंने कहा कि इसे गिरा दो..जहां पर आप बैठे हो।
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इस पर एसडीओ कहते हैं कि इतनी गूंजण की जरूरत नहीं है, आराम से बात कर।
इसके जवाब में सचिव कहते सुन रहे हैं कि तू कौन होता है आराम से कहने वाला, हू आर यू..मैं अभी आज जाऊं तेरे ऑफिस, कहां बैठा है तू...
इसके जवाब में एसडीओ कहते सुन रहे हैं कि मैं ऑफिस बैठा हूं। आ जाओ।
पूरे प्रकरण में सवाल:-
1. जहां पानी देने के लिए नगर पालिका सचिव दबाव डाल रहे हैं? यदि उस काम के लिए ठेकेदार को ठेका दिया गया है तो क्या ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं बनती कि लेबर को पानी दिया जाए?
2. क्या ठेकेदार के पानी देने के लिए नगर पालिका सचिव विधायक का नाम लेकर एसडीओ पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग करने का दबाव नहीं डाल रहे?
3. क्या नगर पालिका सचिव को किसी निजी जगह पानी देने के लिए इतना अधिकार है कि वे फोन पर पानी देने वाले विभाग के कार्यालय को गिराने की धमकी दें, भले ही वह नगर पालिका की जमीन हो?
4. ऑडियो से जो जानकारी मिल रही है, उसमें ठेकेदार विधायक का भाई, पानी का टैंकर सरकारी फायर ब्रिगेड का, पानी लेने के लिए जाने वाले नगर पालिका चीका के कर्मचारी। काम ठेकेदार का। तो क्या चीका नगर पालिका में सब कुछ किसी पारिवारिक शिकंजे में हैं?
धमकी नहीं दी, कार्यालय में जाने को कहा था:-मैंने जनहित में केवल पानी के लिए कहा है। यदि किसी गरीब आदमी को पानी की जरूरत है तो उसे मुहैया करवाना मेरा फर्ज है। मैंने धमकी नहीं दी बल्कि इतना कहा था कि मैं आपके कार्यालय में आ जाता हूं। विधायक जी के आदेश हैं कि शहर में पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए। वह एसडीओ अब जनहित के लिए भी पानी नहीं दे रहा। पिछले कुछ माह में उसके 8 तबादले हो चुके हैं। वह मानसिक रुप से परेशान रहता है।
मेरे किसी भाई ने कोई ठेका नहीं लिया है। मैंने तीन-चार दिन पहले सचिव को एक बस्ती में पानी के लिए जरूर कहा था। ठेकेदार की लेबर है तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह पानी का प्रबंध करे। मैंने किसी कार्यालय को गिराने जैसी कोई बात नहीं की। ना ही ऐसा हो सकता। मैं तेलंगाना में ट्रेनिंग के लिए गया हुआ हूं। तीन-चार दिन में वापिस आकर दोनों की बात सुनी जाएगी। दोनों को बैठाकर मामला निपटवा दिया जाएगा। यदि नहीं निपटता है तो जिसकी गलती होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई करवाई जाएगी।
कुलवंत बाजीगर, विधायक, गुहला-चीका।
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एसडीओ को विधायक के भाई का नाम लेकर धमका रहे हैं नगर पालिका सचिव
विधायक के कथित ठेकेदार भाई को पानी न देने वाले एसडीओ पर कार्यालय में हमले का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल।
गुहला-चीका के जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ व नगर पालिका सचिव के बीच हुए विवाद के बीच वायरल हुआ ऑडियो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। नगर पालिका सचिव एसडीओ को सीधे तौर पर विधायक, विधायक के भाई का नाम लेते हुए धमकाते हुए सुना जा रहा है। सचिव का कहना है कि वे केवल जनहित के लिए पानी की मांग कर रहे थे।
विदित रहे कि दो दिन पूर्व जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ पर उनके कार्यालय में हमला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने एसडीओ की शिकायत पर नगर पालिका सचिव व दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद अब एक ऑडियो वायरल हुआ है। नगर पालिका सचिव के एक मिनट 36 सेकंड के ऑडियो में एसडीओ को धमकाते हुए सुन रहे हैं। नगर पालिका सचिव ऑडियो में सीधा कह रहे हैं कि सरकार का काम चल रहा है। इसीलिए पानी दे दीजिए। विधायक के भाई को ही जरूरत है। जबकि एसडीओ कह रहे हैं कि वे ठेकेदार को पानी नहीं दे सकते।
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विधायक के नाम से कार्यालय को गिराने तक की धमकी दी:-ऑडियो में नगर पालिका सचिव ने स्पष्ट कहा कि एसडीओ साहब जिस जमीन में आप बैठो हो, वह नगर पालिका चीका की है। विधायक के भाई ने कहा है। वेदपाल जी भाई है, जिस जमीन में आप बैठो हो, वह नगर पालिका चीका है। विधायक जी ने मुझे टाइट कर कहा है यार.., उन्होंने कहा कि इसे गिरा दो..जहां पर आप बैठे हो।
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इस पर एसडीओ कहते हैं कि इतनी गूंजण की जरूरत नहीं है, आराम से बात कर।
इसके जवाब में सचिव कहते सुन रहे हैं कि तू कौन होता है आराम से कहने वाला, हू आर यू..मैं अभी आज जाऊं तेरे ऑफिस, कहां बैठा है तू...
इसके जवाब में एसडीओ कहते सुन रहे हैं कि मैं ऑफिस बैठा हूं। आ जाओ।
पूरे प्रकरण में सवाल:-
1. जहां पानी देने के लिए नगर पालिका सचिव दबाव डाल रहे हैं? यदि उस काम के लिए ठेकेदार को ठेका दिया गया है तो क्या ठेकेदार की जिम्मेदारी नहीं बनती कि लेबर को पानी दिया जाए?
2. क्या ठेकेदार के पानी देने के लिए नगर पालिका सचिव विधायक का नाम लेकर एसडीओ पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग करने का दबाव नहीं डाल रहे?
3. क्या नगर पालिका सचिव को किसी निजी जगह पानी देने के लिए इतना अधिकार है कि वे फोन पर पानी देने वाले विभाग के कार्यालय को गिराने की धमकी दें, भले ही वह नगर पालिका की जमीन हो?
4. ऑडियो से जो जानकारी मिल रही है, उसमें ठेकेदार विधायक का भाई, पानी का टैंकर सरकारी फायर ब्रिगेड का, पानी लेने के लिए जाने वाले नगर पालिका चीका के कर्मचारी। काम ठेकेदार का। तो क्या चीका नगर पालिका में सब कुछ किसी पारिवारिक शिकंजे में हैं?
धमकी नहीं दी, कार्यालय में जाने को कहा था:-मैंने जनहित में केवल पानी के लिए कहा है। यदि किसी गरीब आदमी को पानी की जरूरत है तो उसे मुहैया करवाना मेरा फर्ज है। मैंने धमकी नहीं दी बल्कि इतना कहा था कि मैं आपके कार्यालय में आ जाता हूं। विधायक जी के आदेश हैं कि शहर में पेयजल की कमी नहीं होनी चाहिए। वह एसडीओ अब जनहित के लिए भी पानी नहीं दे रहा। पिछले कुछ माह में उसके 8 तबादले हो चुके हैं। वह मानसिक रुप से परेशान रहता है।
मेरे किसी भाई ने कोई ठेका नहीं लिया है। मैंने तीन-चार दिन पहले सचिव को एक बस्ती में पानी के लिए जरूर कहा था। ठेकेदार की लेबर है तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह पानी का प्रबंध करे। मैंने किसी कार्यालय को गिराने जैसी कोई बात नहीं की। ना ही ऐसा हो सकता। मैं तेलंगाना में ट्रेनिंग के लिए गया हुआ हूं। तीन-चार दिन में वापिस आकर दोनों की बात सुनी जाएगी। दोनों को बैठाकर मामला निपटवा दिया जाएगा। यदि नहीं निपटता है तो जिसकी गलती होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई करवाई जाएगी।
कुलवंत बाजीगर, विधायक, गुहला-चीका।