फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   104 rooms in schools remain incomplete in Kaithal

कैथल के स्कूलों में अधूरे पड़े हैं 104 कमरे

Tue, 22 Apr 2014 01:05 AM IST
अमर उजाला कैथ्ाल
अमर उजाला कैथ्ाल Updated Tue, 22 Apr 2014 01:05 AM IST
विज्ञापन
104 rooms in schools remain incomplete in Kaithal
कैथल। कमरों के निर्माण के लिए ग्रांट मंजूर हो जाने के बाद भी कैथल के 104 स्कूलों के कमरे अभी तक अधूरे पड़े है। इनमें से कई कमरों का निर्माण तो शुरू भी नहीं हो पाया है। इन कमरों के लिए मंजूरी वर्ष 2010-11 में मिल चुकी थी। अब विभागीय लापरवाही का खामियाजा स्कूलों में बच्चों को भुगतना पड़ रहा है और उन्हें स्कूल के मैदान या फिर बरामदों के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। अभिभावकों की ओर से बार-बार उठाई जा रही मांग के बावजूद शिक्षा विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया है।
विज्ञापन

विभागीय जानकारी के अनुसार जिले भर में इस अवधि में सर्वशिक्षा अभियान के तहत 831 निर्माण कार्य पूरा किए जाने थे। इसमें से 477 कमरे बनाए जाने थे, लेकिन इनमें से अभी तक 104 कमरे अधूरे पड़े हुए हैं। इनमें 46 कमरे तो ऐसे हैं। जहां काम भी शुरू नहीं हो पाया। जबकि 58 कमरों का निर्माण अभी भी लटका हुआ है। कमरे के निर्माण के लिए विभाग द्वारा कुल 3 लाख 84 हजार रुपये की राशि जारी की जा रही है। जो शुरूआत में 2 लाख 91 हजार थी। सबसे पहले 50 प्रतिशत, दूसरी किश्त के रूप में 45 प्रतिशत तथा तीसरी किश्त के रूप में 5 प्रतिशत राशि विभाग द्वारा जारी की जाती है।
विज्ञापन

अब इन कमरों के निर्माण कार्य में देरी होने के कारण एक ओर बढ़ी समस्या आड़े आएगी। जिसमें निर्माण सामग्री के लगातार महंगी होने के कारण दो साल पहले स्वीकृत राशि कम रहेगी। महंगे होते जा रहे मैटीरियल की कीमत के गैप को पूरा करना भी विभाग के लिए बड़ी समस्या बन सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्ष 2010-11 में मंजूर हुए थे कमरे
सर्व शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2010-11, 2011-12 एवं 2012-13 में जिले में विभिन्न स्कूलों में सर्वशिक्षा अभियान के तहत कमरे बनाए जाने का मंजूरी दी गई थी। वर्ष 2013-14 में कमरों के निर्माण के लिए पैसा मंजूर नहीं हो पाया। अब वर्ष 2014-15 का सत्र शुरू हो गया है, लेकिन चार साल पहले मंजूर हुए कमरों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
अध्यापक संघ के सचिव सतबीर गोयत का कहना है कि विभाग की जानकारी में पूरा मामला है। जिन स्कूलों में जरूरत थी, उन्हीं स्कूलों के लिए कमरों को मंजूरी मिली थी। जो विभिन्न प्रकार से स्कूलों में प्रयोग में लाए जाने थे। लेकिन अनेकों स्कूल ऐसे हैं, जहां पहली किश्त के बाद दूसरी किश्त जारी ही नहीं हो पाई है। जबकि कई ऐसे हैं, जहां फाइनल किश्त के अभाव में कमरों का निर्माण कार्य अटका हुआ है।
इस संबंध में सर्वशिक्षा अभियान के प्रभारी सुरेंद्र मोर का कहना हैकि अधूरे पड़े कमरों की संख्या ज्यादा नहीं है। करीब 50 कमरों की फाईनल फाइल तैयार करते हुए विभाग को भेज दी गई है। कई मामलों में अध्यापकों द्वारा जारी किए गए पैसे का उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा नहीं करवाया गया तो कई जगह अध्यापक के सेवानिवृत्त होने के कारण मामला लटक गया है। प्रयास किया जा रहा है कि सभी कमरों का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा हो जाए।

 बाक्स
बच्चों को बैठने के लिए नहीं मिलती छत
स्कूलों में कमरों के निर्माण कार्य पूरा न होने का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। या तो बच्चे खुले मैदान में बैठते हैं। या फिर बरामदों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। कैथल शहर के हुडा सेक्टर 19 में स्थित प्राथमिक पाठशाला, कोटड़ा, छौत, सेरहधा, नरवल, कठवाड़, खरकां सहित जिले भर के अनेकों स्कूल हैं। जहां इन कमरों के निर्माण कार्य का पूरा होने का बच्चे बड़ी ही शिद्दत से इंतजार कर रहे हैं।
वर्जन
 पता लगाया जाएगा कि कमरे अधूरे क्यों पड़े हैं। विभागीय नियमानुसार इन्हें पूरा करवाया जाएगा। ताकि बच्चों को परेशानी न हो।
एन के सोलंकी,डीसी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed