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Jind News: कामयाबी नहीं मिलने पर जिंदगी से मुंह मोड़ रहे युवा, तनाव आत्महत्या का मुख्य कारण
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09जेएनडी12-काउंसलर नरेश जागलान।
प्रमोद राठी
जींद। जीवन अनमोल है। खुशी से जीवन व्यतीत करें। नशा और तनाव आत्महत्या करने के मुख्य कारण हैं। आंकड़ों की बात करें तो तीन सालों से 57 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। परिवारों में रोजाना होने वाले आपसी झगड़े, तनाव, बेरोजगारी लोगों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर रही है।
एक शोध के अनुसार 90 प्रतिशत आत्महत्या करने वाले लोगों की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच पाई गई है। यह 90 प्रतिशत लोग घर में चल रहे झगड़ों, मानसिक तनाव, बेरोजगारी और अंधभक्ति के शिकार होते हैं। युवा भी पढ़ाई को लेकर कामयाबी नहीं मिलने पर जिंदगी से मुंह मोड़ रहे हैं।
आत्महत्या से बचाव के लिए घर में ही दोस्ताना व्यवहार का होना बेहद जरूरी है। परिवार का दोस्ताना माहौल परिवार के सदस्यों में आत्मविश्वास को बढ़ाता है। जिंदगी खत्म नहीं होती क्योंकि जिंदगी के किरदार अलग-अलग हैं। प्रत्येक इंसान को उन्हें समझने की जरूरत है। कई ऐसे लोग हैं जिन्हें अपनी परेशानियों का अंत केवल आत्महत्या करना लगता है।
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माता-पिता द्वारा बच्चों को समय देना आत्महत्या रोकने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है क्योंकि मां-बाप का विश्वास बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाता है। माता-पिता को बच्चों पर चीजों को थोपने की बजाए उन्हें प्यार से समझाना चाहिए। परिवार के झगड़े और तनाव से बच्चों को दूर रखना चाहिए।
बॉक्स
जीवन में ब्रेकअप भी आत्महत्या के कारण
कई युवक-युवतियां मन लगाकर पढ़ाई करने के बाद भी सफल नहीं हो पाते। ऐसे में वह आत्मविश्वास खो देते हैं और आत्महत्या करने जैसा कदम उठा लेते हैं जबकि उनको चाहिए कि जीवन बहुत लंबा है। यदि पढ़ाई में सफलता नहीं मिली तो आगे सफल होने के लिए बहुत विकल्प मिलेंगे। वहीं आजकल युवक-युवतियों में मित्रता का ज्यादा प्रचलन है। कम उम्र के युवक-युवतियां भी इस प्रचलन से अभिनज्ञ नहीं है। फिर युवक-युवतियां ब्रेकअप जैसी समस्या से गुजरते हैं। कई तो इसमें संभल जाते हैं लेकिन कई आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।
बाक्स
एक्सपर्ट व्यू
आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है। यदि कोई सोचता है कि उसकी जिंदगी में कुछ नहीं रहा तो वह सामाजिक कार्याें में ज्यादा समय लगाएं। प्रकृति के नजदीक रहें। पढ़ाई में कुछ नहीं बना तो आगे बहुत समय है। योग और मेडिटेशन करें। इससे अपने अंदर सकारात्मकता आएगी। आत्महत्या का विचार आना अस्थाई है। रात के बाद सवेरा अवश्य होगा।
-नरेश जागलान, काउंसलर, मनोवैज्ञानिक
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जींद। जीवन अनमोल है। खुशी से जीवन व्यतीत करें। नशा और तनाव आत्महत्या करने के मुख्य कारण हैं। आंकड़ों की बात करें तो तीन सालों से 57 लोग आत्महत्या कर चुके हैं। परिवारों में रोजाना होने वाले आपसी झगड़े, तनाव, बेरोजगारी लोगों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर रही है।
एक शोध के अनुसार 90 प्रतिशत आत्महत्या करने वाले लोगों की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच पाई गई है। यह 90 प्रतिशत लोग घर में चल रहे झगड़ों, मानसिक तनाव, बेरोजगारी और अंधभक्ति के शिकार होते हैं। युवा भी पढ़ाई को लेकर कामयाबी नहीं मिलने पर जिंदगी से मुंह मोड़ रहे हैं।
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आत्महत्या से बचाव के लिए घर में ही दोस्ताना व्यवहार का होना बेहद जरूरी है। परिवार का दोस्ताना माहौल परिवार के सदस्यों में आत्मविश्वास को बढ़ाता है। जिंदगी खत्म नहीं होती क्योंकि जिंदगी के किरदार अलग-अलग हैं। प्रत्येक इंसान को उन्हें समझने की जरूरत है। कई ऐसे लोग हैं जिन्हें अपनी परेशानियों का अंत केवल आत्महत्या करना लगता है।
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माता-पिता द्वारा बच्चों को समय देना आत्महत्या रोकने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है क्योंकि मां-बाप का विश्वास बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाता है। माता-पिता को बच्चों पर चीजों को थोपने की बजाए उन्हें प्यार से समझाना चाहिए। परिवार के झगड़े और तनाव से बच्चों को दूर रखना चाहिए।
बॉक्स
जीवन में ब्रेकअप भी आत्महत्या के कारण
कई युवक-युवतियां मन लगाकर पढ़ाई करने के बाद भी सफल नहीं हो पाते। ऐसे में वह आत्मविश्वास खो देते हैं और आत्महत्या करने जैसा कदम उठा लेते हैं जबकि उनको चाहिए कि जीवन बहुत लंबा है। यदि पढ़ाई में सफलता नहीं मिली तो आगे सफल होने के लिए बहुत विकल्प मिलेंगे। वहीं आजकल युवक-युवतियों में मित्रता का ज्यादा प्रचलन है। कम उम्र के युवक-युवतियां भी इस प्रचलन से अभिनज्ञ नहीं है। फिर युवक-युवतियां ब्रेकअप जैसी समस्या से गुजरते हैं। कई तो इसमें संभल जाते हैं लेकिन कई आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।
बाक्स
एक्सपर्ट व्यू
आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं है। यदि कोई सोचता है कि उसकी जिंदगी में कुछ नहीं रहा तो वह सामाजिक कार्याें में ज्यादा समय लगाएं। प्रकृति के नजदीक रहें। पढ़ाई में कुछ नहीं बना तो आगे बहुत समय है। योग और मेडिटेशन करें। इससे अपने अंदर सकारात्मकता आएगी। आत्महत्या का विचार आना अस्थाई है। रात के बाद सवेरा अवश्य होगा।
-नरेश जागलान, काउंसलर, मनोवैज्ञानिक