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स्वार्थ होता है वहां मित्रता नहीं होती : शर्मा
Thu, 05 Sep 2024 02:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 05 Sep 2024 02:29 AM IST
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उचाना। संंबंध तो सुदामा और कृष्ण जैसा होना चाहिए। एक ने कुछ मांगा नहीं दूसरे ने सब देकर भी जताया नहीं।
यह बात पुजारी अशोक शर्मा ने महाराजा अग्रसेन मंदिर उचाना मंडी में चल रहे प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण, सुदामा बाल सखा थे। द्वारका के राजा भगवान कृष्ण के बनने के बाद जब बाल सखा सुदामा उनसे मिलने आया तो उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार की स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी सुदामा ने भगवान कृष्ण से कुछ नहीं मांगा लेकिन भगवान कृष्ण ने बिना सुदामा के मांगे उसे सब कुछ दिया। इसलिए मित्रता हो तो कृष्ण सुदमा जैसी होनी चाहिए। जहां स्वार्थ होता है वहां मित्रता नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि जीवन में दूसरों को कष्ट देकर हासिल किए गए सुख की उम्र बहुत कम होती है। दूसरों को कष्ट देकर कुछ समय के लिए तो हो सकता है सुख मिले लेकिन वो कब तक मिलेगा ये तय नहीं होता है। इसलिए कभी भी खुद के सुख के लिए दूसरों को कष्ट न दे। दूसरों की प्रशंसा करना स्वयं के अहम का नाश करते हुए आपको सहज ही दूसरों के प्रेम और सम्मान का अधिकारी बना देती है। इसलिए हमेशा खुद की प्रशंसा में कभी यकीन न रखते दूसरों के अच्छे कामों की प्रशंसा करें। जीवन में कभी भी किसी भी समय गरीब का मजाक कभी नहीं बनाइए क्योंकि अमीर बननने में वक्त लगता है और गरीब बनन में वक्त नहीं लगता।
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यह बात पुजारी अशोक शर्मा ने महाराजा अग्रसेन मंदिर उचाना मंडी में चल रहे प्रवचन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण, सुदामा बाल सखा थे। द्वारका के राजा भगवान कृष्ण के बनने के बाद जब बाल सखा सुदामा उनसे मिलने आया तो उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार की स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी सुदामा ने भगवान कृष्ण से कुछ नहीं मांगा लेकिन भगवान कृष्ण ने बिना सुदामा के मांगे उसे सब कुछ दिया। इसलिए मित्रता हो तो कृष्ण सुदमा जैसी होनी चाहिए। जहां स्वार्थ होता है वहां मित्रता नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि जीवन में दूसरों को कष्ट देकर हासिल किए गए सुख की उम्र बहुत कम होती है। दूसरों को कष्ट देकर कुछ समय के लिए तो हो सकता है सुख मिले लेकिन वो कब तक मिलेगा ये तय नहीं होता है। इसलिए कभी भी खुद के सुख के लिए दूसरों को कष्ट न दे। दूसरों की प्रशंसा करना स्वयं के अहम का नाश करते हुए आपको सहज ही दूसरों के प्रेम और सम्मान का अधिकारी बना देती है। इसलिए हमेशा खुद की प्रशंसा में कभी यकीन न रखते दूसरों के अच्छे कामों की प्रशंसा करें। जीवन में कभी भी किसी भी समय गरीब का मजाक कभी नहीं बनाइए क्योंकि अमीर बननने में वक्त लगता है और गरीब बनन में वक्त नहीं लगता।
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