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Jind News: बाजार की रौनक गुल, ग्राहकों की कमी से विक्रेता मायूस
Fri, 08 Aug 2025 11:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 08 Aug 2025 11:49 PM IST
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08जेएनडी34-बाजारों में राखी खरीदते हुए महिला। संवाद
नरवाना। रक्षाबंधन को लेकर इस बार बाजारों में वह चहल-पहल नजर नहीं आ रही है जो हर साल होती थी। शहर के मुख्य बाजारों में सजी राखियों की दुकानों पर ग्राहकों की संख्या कम है। इससे राखी विक्रेताओं की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है।
व्यापारी पंकज और दिनेश गोयल ने बताया कि इस बार त्योहार को देखते हुए रंग-बिरंगी, डिजिटल, रेशमी और चेन वाली राखियों का स्टॉक बड़ी मात्रा में खरीदा था। उन्हें लगा था कि पिछले साल की तरह इस बार भी अच्छी बिक्री होगी लेकिन इस बार तो ग्राहक ही नजर नहीं आ रहे।
दुकानदार रमेश और विकेश ने कहा कि इस बार दिनभर में मुश्किल से आठ-दस ग्राहक ही राखी खरीदने आते हैं। हमने दुकान के बाहर आकर्षक स्टॉल लगाए हैं और नई डिजाइनों की राखियां मंगवाई हैं लेकिन ग्राहकों का रिस्पॉन्स बहुत ही कमजोर है।
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विक्रेताओं का कहना है कि 2024 में रक्षाबंधन पर जबरदस्त बिक्री हुई थी। हर स्टॉल पर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी लेकिन इस बार न तो लोगों में त्योहार को लेकर उत्साह दिख रहा है और न ही कोई खास डिजाइन की मांग की जा रही है।
दुकानदारों को चिंता सता रही है कि कहीं इस बार राखियों का बड़ा स्टॉक बिना बिके ही न रह जाए। मंदी जैसे हालात से गुजर रहे इन छोटे व्यापारियों की उम्मीदें अब आखिरी दो-तीन दिनों की बिक्री पर टिकी हैं।
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व्यापारी पंकज और दिनेश गोयल ने बताया कि इस बार त्योहार को देखते हुए रंग-बिरंगी, डिजिटल, रेशमी और चेन वाली राखियों का स्टॉक बड़ी मात्रा में खरीदा था। उन्हें लगा था कि पिछले साल की तरह इस बार भी अच्छी बिक्री होगी लेकिन इस बार तो ग्राहक ही नजर नहीं आ रहे।
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दुकानदार रमेश और विकेश ने कहा कि इस बार दिनभर में मुश्किल से आठ-दस ग्राहक ही राखी खरीदने आते हैं। हमने दुकान के बाहर आकर्षक स्टॉल लगाए हैं और नई डिजाइनों की राखियां मंगवाई हैं लेकिन ग्राहकों का रिस्पॉन्स बहुत ही कमजोर है।
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विक्रेताओं का कहना है कि 2024 में रक्षाबंधन पर जबरदस्त बिक्री हुई थी। हर स्टॉल पर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी लेकिन इस बार न तो लोगों में त्योहार को लेकर उत्साह दिख रहा है और न ही कोई खास डिजाइन की मांग की जा रही है।
दुकानदारों को चिंता सता रही है कि कहीं इस बार राखियों का बड़ा स्टॉक बिना बिके ही न रह जाए। मंदी जैसे हालात से गुजर रहे इन छोटे व्यापारियों की उम्मीदें अब आखिरी दो-तीन दिनों की बिक्री पर टिकी हैं।