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Jind News: कर्नल की यादों में आज भी जिंदा हैं चिट्ठियां

Fri, 09 Oct 2026 02:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2026 02:39 AM IST
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The letters are still alive in the Colonel's memory.
08जेएनडी21: सेवानिवृत कर्नल डीके भारद्वाज। - फोटो : shiv tripathi
सुशील टुर्ण जींद। आज मोबाइल फोन की घंटी बजते ही दुनिया सिमटकर हथेली में आ जाती है। वीडियो कॉल पर हजारों किलोमीटर दूर बैठे माता-पिता, पत्नी और बच्चों का चेहरा सामने होता है। मैसेज भेजने में कुछ सेकंड लगते हैं और जवाब भी तुरंत मिल जाता है लेकिन चार दशक पहले लेह की बर्फीली पहाड़ियों पर तैनात जवानों के लिए घर से जुड़ने का रास्ता इतना आसान नहीं था।
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सप्ताह में एक बार आने वाला जहाज सिर्फ डाक नहीं लाता था बल्कि अपने साथ घर की खुशियां, चिंता और अपनों की आवाज लेकर आता था। कर्नल भारद्वाज की यादों में आज भी चिट्ठियों का दौर जिंदा है।
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करीब 78 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्नल डीके भारद्वाज वर्ष 1983 से 1986 तक लेह में तैनात रहे। वह दौर आज भी उनकी यादों में किसी फिल्म की तरह दर्ज है। वे बताते हैं कि सप्ताह में एक बार जहाज आता था।
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जवानों की नजरें डाक के बंडल पर टिकी रहती थीं। हर कोई अपने नाम का लिफाफा तलाशता था। किसी के हाथ पत्नी की चिट्ठी लगती तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती और किसी को बच्चों का पत्र मिलता तो वह उसे बार-बार पढ़ता। पहाड़ों का मौसम इस इंतजार की परीक्षा भी लेता था। बर्फबारी या खराब मौसम के कारण जहाज नहीं पहुंचा तो चिट्ठियां भी रुक जातीं।

एक सप्ताह का इंतजार कई बार दो सप्ताह तक खिंच जाता। कभी ऐसा भी होता कि पहले लिखी गई चिट्ठी बाद में पहुंचती और बाद में भेजा गया पत्र पहले। संवाद

08जेएनडी21: सेवानिवृत कर्नल डीके भारद्वाज।

08जेएनडी21: सेवानिवृत कर्नल डीके भारद्वाज।- फोटो : shiv tripathi

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