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Jind News: स्कीम वर्कर्स ने सांसद सेलजा के नाम सौंपा ज्ञापन, संसद मार्च का ऐलान
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फोटो 3 नरवाना। सांसद प्रतिनिधि एवं पार्षद आशुतोष शर्मा को सांसद कुमारी सैलजा के नाम ज्ञापन सौंप
नरवाना। आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन हरियाणा, आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा और मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन हरियाणा के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को नेहरू पार्क में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सिरसा लोकसभा क्षेत्र की सांसद कुमारी सेलजा के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन सांसद प्रतिनिधि एवं पार्षद आशुतोष शर्मा को दिया गया। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में कार्यरत कर्मियों को अधिकार दिलाने के लिए संसद में उनकी मांगें उठाने की मांग की।
कार्यकर्ताओं में सुमन, माया, अनीता, मूर्ति, मंजूबला, रेखा, संतोष, जीतकौर ने कहा कि आईसीडीएस, मिड-डे मील और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं के संचालन में लाखों महिला कर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें उचित कर्मचारी का दर्जा और पर्याप्त वेतन व सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मांगों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है।
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प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से आग्रह किया कि आगामी संसद सत्र में उनकी मांगों को प्रमुखता से उठाया जाए। सांसद प्रतिनिधि आशुतोष शर्मा ने कार्यकर्ताओं की मांगें सुनीं और ज्ञापन सांसद कुमारी सेलजा तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। यूनियनों ने अपनी मांगों के समर्थन में एक से तीन दिसंबर 2026 तक दिल्ली में संसद मार्च करने का एलान भी किया। उन्होंने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में स्कीम वर्कर्स इसमें शामिल होंगे।
ये हैं प्रमुख मांगें
सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स, हेल्पर्स, आशा, मिड-डे मील, क्रेच वर्कर्स सहित स्कीम वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
सभी स्कीम वर्कर्स को कम से कम 42 हजार रुपये मासिक न्यूनतम वेतन और 12 महीने का वेतन दिया जाए।
ग्रेच्युटी, सेवानिवृत्ति लाभ और 21 हजार रुपये मासिक पेंशन सुनिश्चित की जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को रद्द करने और हटाए गए मिड-डे मील वर्कर्स को बहाल करने की मांग की गई।
आंगनवाड़ी सेवाओं में एफआरएएस की अनिवार्यता पर रोक लगाई जाए।
छह वर्ष तक के सभी बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत कर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
आशा वर्कर्स के लिए केंद्र द्वारा घोषित 1500 रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की जाए।
एनएचएम में बढ़ते ऑनलाइन कार्यभार को कम कर योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाए।
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ज्ञापन सांसद प्रतिनिधि एवं पार्षद आशुतोष शर्मा को दिया गया। कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में कार्यरत कर्मियों को अधिकार दिलाने के लिए संसद में उनकी मांगें उठाने की मांग की।
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कार्यकर्ताओं में सुमन, माया, अनीता, मूर्ति, मंजूबला, रेखा, संतोष, जीतकौर ने कहा कि आईसीडीएस, मिड-डे मील और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं के संचालन में लाखों महिला कर्मी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें उचित कर्मचारी का दर्जा और पर्याप्त वेतन व सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मांगों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है।
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प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से आग्रह किया कि आगामी संसद सत्र में उनकी मांगों को प्रमुखता से उठाया जाए। सांसद प्रतिनिधि आशुतोष शर्मा ने कार्यकर्ताओं की मांगें सुनीं और ज्ञापन सांसद कुमारी सेलजा तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। यूनियनों ने अपनी मांगों के समर्थन में एक से तीन दिसंबर 2026 तक दिल्ली में संसद मार्च करने का एलान भी किया। उन्होंने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में स्कीम वर्कर्स इसमें शामिल होंगे।
ये हैं प्रमुख मांगें
सभी आंगनवाड़ी वर्कर्स, हेल्पर्स, आशा, मिड-डे मील, क्रेच वर्कर्स सहित स्कीम वर्कर्स को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
सभी स्कीम वर्कर्स को कम से कम 42 हजार रुपये मासिक न्यूनतम वेतन और 12 महीने का वेतन दिया जाए।
ग्रेच्युटी, सेवानिवृत्ति लाभ और 21 हजार रुपये मासिक पेंशन सुनिश्चित की जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को रद्द करने और हटाए गए मिड-डे मील वर्कर्स को बहाल करने की मांग की गई।
आंगनवाड़ी सेवाओं में एफआरएएस की अनिवार्यता पर रोक लगाई जाए।
छह वर्ष तक के सभी बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत कर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
आशा वर्कर्स के लिए केंद्र द्वारा घोषित 1500 रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की जाए।
एनएचएम में बढ़ते ऑनलाइन कार्यभार को कम कर योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाए।